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पञ्चाङ्ग -26 फरवरी 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक -26 फरवरी 2026*
*🎈 वार-  गुरुवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈 मास - फाल्गुन मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ला पक्ष*
*🎈तिथि-     दशमी    24:32:51* तत्पश्चात् एकादशी*
*🎈 नक्षत्र -        मृगशीर्षा    12:10:26* तक तत्पश्चात्             आद्रा    👇
*🎈 योग    -     प्रीति    22:32:24* तक तत्पश्चात्         आयुष्मान*
*🎈करण    -     तैतुल    13:35:57* तक तत्पश्चात्     गर*
*🎈राहुकाल -02:14 pm से 03: 40pm(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈 चन्द्र राशि-     मिथुन    *
*🎈सूर्य राशि-      कुम्भ    *
*🎈 सूर्योदय-07:03:34am*
*🎈सूर्यास्त -        18:32:39*pm* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- दक्षिण दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)

*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:22 ए एम से 06:12 ए एम    *
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:25 पी एम से 01:11 पी एम*
*🎈 अमृत काल-    01:23 ए एम, फरवरी 27 से 02:53 ए एम, फरवरी 27*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:23 ए एम, फरवरी 27 से 01:13 ए एम, फरवरी 27*


 *🎈 व्रत एवं पर्व व्रत *दशमी*

*🎈विशेष फाल्गुन मास महात्म्य *
 🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
kundli



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    *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
   नागौर, राजस्थान, (भारत)    
   मानक सूर्योदय के अनुसार।*
day

🛟

    
        *🛟चोघडिया, रात्🛟*
night

*🛟 
 


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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🌷❤️💐🌼🪔❤️💐👉 ✍️ ★√*🛡️🌹

🌿✨  #*🕉️ #🌺#🌹🙏 लघु विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र 🙏

21 दिनों में बदल देगा जीवन - सिद्ध प्रयोग

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

 लघु विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र - जो 1000 नामों का संक्षिप्त लेकिन अत्यंत प्रभावशाली रूप है। जो लोग विष्णु सहस्त्रनाम जैसी कठिन साधना नहीं कर सकते, उनके लिए यह स्तोत्र वरदान है। नियमित पाठ से विष्णु सहस्त्रनाम के बराबर फल की प्राप्ति होती है।

🌟 इस स्तोत्र के अद्भुत लाभ:

✅ ग्रह शांति - सभी नवग्रह शांत होते हैं। कुंडली के सभी दोष दूर होते हैं। मंगल, शनि, राहु-केतु के दुष्प्रभाव समाप्त होते हैं।

✅ शीघ्र विवाह - विवाह में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं। अच्छे वर/वधू की प्राप्ति होती है। विवाह के योग बनते हैं।

✅ दिव्य तेज - चेहरे पर दिव्य कांति आती है। व्यक्तित्व में निखार आता है। आत्मविश्वास बढ़ता है।

✅ धन समृद्धि - वैश्यों के लिए धनवृद्धि होती है। व्यापार में लाभ होता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

✅ विजय - क्षत्रियों के लिए शत्रुओं पर विजय मिलती है। मुकदमों में सफलता मिलती है। प्रतिस्पर्धा में विजय प्राप्त होती है।

✅ विद्या - विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवृद्धि होती है। परीक्षा में सफलता मिलती है। बुद्धि तेज होती है।

✅ सभी भयों से मुक्ति - अग्नि भय, चोर भय, सर्प भय, राक्षस भय, रोग भय - सभी से रक्षा होती है। जैसा कि फलश्रुति में कहा गया है - "नाग्निराजभयं तस्य न चोरात् पन्नगाद्भयम्। राक्षसेभ्यो भयं नास्ति व्याधिभिर्नैव पीड्यते॥"

✅ लक्ष्मी की प्राप्ति - जहाँ विष्णु होंगे, वहाँ लक्ष्मी स्वयं आएंगी। घर में सुख-समृद्धि का वास होगा।

✅ शत्रु नाश - यह स्तोत्र युद्ध में शत्रुओं के विनाश के लिए अर्जुन को दिया गया था। इसके पाठ से शत्रुओं का नाश होता है।

✅ मोक्ष की प्राप्ति - अंततः यह स्तोत्र मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। विष्णु भगवान की कृपा से जीवन सफल होता है।

🌼🌼संपूर्ण लघु विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र:

॥ अथ लघु विष्णुसहस्त्रनाम स्तोत्रम् ॥

अलं नामसहस्रेण केशवोऽर्जुनमब्रवित्।
श्रुणु मे पार्थ नामानि यैश्च तुष्यामि सर्वदा॥१॥

केशवः पुण्डरीकाक्षः स्वयंभूर्मधुसूदनः।
दामोदरो हृषीकेशः पद्मनाभो जनार्दनः॥२॥

विष्वक्सेनो वासुदेवो हरिर्नारायणस्तथा।
अनंतश्च प्रबोधश्च सत्यः कृष्णः सुरोत्तमः॥३॥

आदिकर्ता वराहश्च वैकुण्ठो विष्णुरच्युतः।
श्रीधरः श्रीपतिः श्रीमान् पक्षिराजध्वजस्तथा॥४॥

एतानि मम नामानि विद्यार्थी ब्राह्मणः पठेत्।
क्षत्रियो विजयस्यार्थे वैश्यो धनसमृद्धये॥५॥

नाग्निराजभयं तस्य न चोरात् पन्नगाद्भयम्।
राक्षसेभ्यो भयं नास्ति व्याधिभिर्नैव पीड्यते॥६॥

इदं नामसहस्त्रं तु केशवेनोद्धृतं स्तवम्।
उद्धृत्य चार्जुने दत्तं युद्धे शत्रुविनाशनम्॥७॥

॥ इति श्री विष्णुपुराणे लघु विष्णुसहस्त्रनामस्तवः ॥
```
🌼🌼 स्तोत्र का सरल अर्थ:

श्लोक 1: केशव (भगवान श्रीकृष्ण) ने अर्जुन से कहा - हे पार्थ! हजारों नामों की आवश्यकता नहीं। मेरे उन नामों को सुनो जिनसे मैं सदा प्रसन्न होता हूँ।

श्लोक 2-4: इन श्लोकों में भगवान के 28 प्रमुख नामों का वर्णन है - केशव, पुण्डरीकाक्ष, स्वयंभू, मधुसूदन, दामोदर, हृषीकेश, पद्मनाभ, जनार्दन, विष्वक्सेन, वासुदेव, हरि, नारायण, अनंत, प्रबोध, सत्य, कृष्ण, सुरोत्तम, आदिकर्ता, वराह, वैकुण्ठ, विष्णु, अच्युत, श्रीधर, श्रीपति, श्रीमान, पक्षिराजध्वज (गरुड़ध्वज)।

श्लोक 6: इसके पाठ से अग्नि का भय नहीं रहता, चोरों का भय नहीं रहता, सर्पों का भय नहीं रहता, राक्षसों का भय नहीं रहता और व्याधियों से पीड़ा नहीं होती।

श्लोक 7: यह नामसहस्त्र स्तव केशव (श्रीकृष्ण) द्वारा कहा गया है और अर्जुन को दिया गया है जो युद्ध में शत्रुओं का विनाश करने वाला है।

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.     💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥

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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
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*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
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