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पञ्चाङ्ग -25 फरवरी 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक -25 फरवरी 2026*
*🎈 वार-  बुधवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈 मास - फाल्गुन मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ला पक्ष*
*🎈तिथि-     नवमी    26:40:18* तत्पश्चात् दशमी*
*🎈 नक्षत्र -        रोहिणी    13:37:42* तक तत्पश्चात्         मृगशीर्षा    👇
*🎈 योग    -     विश्कुम्भ    25:27:31* तक तत्पश्चात्         प्रीति*
*🎈करण    -     बालव    15:45:27* तक तत्पश्चात् कौलव*
*🎈राहुकाल -12:48 pm से 02: 15pm(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈 चन्द्र राशि-     वृषभ* till 24:53:42*
*🎈 चन्द्र राशि-     मिथुन    from 24:53:42*
*🎈सूर्य राशि-      कुम्भ    *
*🎈 सूर्योदय-07:04:31am*
*🎈सूर्यास्त -        18:32:02*pm* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)

*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:24 ए एम से 06:14 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:25 पी एम से 01:11 पी एम*
*🎈 अमृत काल-    12:51 पी एम से 02:22 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:23 ए एम, फरवरी 25 से 01:13 ए एम, फरवरी 25*
*🎈 सर्वार्थ सिद्धि योग-    07:04 ए एम से 03:07 पी एम*

 *🎈 व्रत एवं पर्व व्रत *नवमी*

*🎈विशेष फाल्गुन मास महात्म्य *
 🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
kundli



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    *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
   नागौर, राजस्थान, (भारत)    
   मानक सूर्योदय के अनुसार।*
day

🛟

    
        *🛟चोघडिया, रात्🛟*
night

*🛟 
 


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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🌷❤️💐🌼🪔❤️💐👉 ✍️ ★√*🛡️🌹

🌿✨  #*🕉️ #🌺#🌹प्रतिष्ठित देवता के मंदिर में रजस्वलावधू या स्त्री एवं चाण्डाल 
[चाण्डाल तीन प्रकार के- 
१) सन्यासोत्तर उत्पन्न पुत्र,
२) ब्राह्मणी में शूद्र से उत्पन्न पुत्र, 
३) समानगोत्रप्रवर में विवाहित पितरों की संतान]

प्रवेश करले या ग्रामोत्सव (पाटोत्सवादि) के समय मंदिर से १०० हाथ के अन्तराल में भी यदि ये आ जाएं अथवा पराशरोक्त- "युगं यगद्वयं चैवेत्यादि श्लोकद्वयोक्त" 

(१) पतित (ब्रह्महत्यादि महापातकी, विदेशयात्री, आत्मघाती, भ्रूणघाती) 
(२) रजस्वला
(३) प्रसूतिस्त्री एवं 
(४) चाण्डाल आदि 

भी प्रतिमा के क्रमशः ४/८/१२/१६ हाथ अर्थात् ६/१२/१८/२४फूट के अन्तराल में भी यदि आ जाएं तो देवता के विग्रह की कला हानि होती है। जनपति का मरण होता है, उस ग्राम का क्षय होता और फसल का नाश होता है। यथा---

(कारिकावृत्ति प्रायश्चित्तखण्ड)--
रुद्रस्य वाथ विष्णोर्वा प्राकाराभ्यन्तरे यदि। 
रजस्वलावधूश्चैव चाण्डालश्च समागतः॥
ततो ग्रामोत्सवे हस्तशताभ्यन्तरतां यदि।
तद्देवस्य कलाहानिः राज्ञो मरणमेव च॥
तद् ग्रामस्य क्षयः प्रोक्तः सस्यांनां नाशनं ध्रुवम्॥


🎉लक्ष्मी स्तोत्र☀️
ईश्वर उवाच:-
देवि कमले
विष्णुवल्लभे ।
मयिस्थिरा ।।
त्रैलोक्यपूजिते देवि
यथात्वम् सुस्थिराक्षणे तथा भव
ईश्वरी कमला लक्ष्मीश्चला भूतिहरिप्रिया ।
पद्मा पद्मालया सम्पुदुच्चैः श्रीं पद्मचारिणी ।।
द्वादशैतानि नामानि लक्ष्मीं सपूज्य यः पठेत ।
स्थिरा लक्ष्मीर्भवेतस्य पुत्रदारादिभिः सह । ।
☀️जो व्यक्ति लक्ष्मी पूजन के समय लक्ष्मी जी के बारह नाम वाले इस स्तोत्र का पाठ करता
है उसके यहाँ भगवती लक्ष्मी स्थिर होकर रहती हैं तथा उसके स्त्री, पुत्र आदि निरन्तर उन्नति
करते रहते हैं।
💢इसी प्रकार लक्ष्मी जी के अष्टोत्तर शतनाम, सहस्त्रनाम आदि स्तोत्र भी हैं।
💕लक्ष्मी कवच
विनियोगः-
कवचम्ः-
ॐ अस्य सर्वोश्वयप्रदास्यास्य लक्ष्मीकवचस्तोत्रस्य विधिः ऋषिः
पंक्तिश्छन्दः पद्मालया देवता सिदैश्वर्यअपेष्वेव विनियोगः ।
मस्तकं पातु मे पद्मा कण्ठं हरिप्रिया ।
नासिकांपातु मे लक्ष्मीः कमला पातु लोचनम् ।।
केशान केशवकान्ता च कपाल कमलालया ।
जगत्प्रसूगण्डयुग्मं स्कंध सम्पत्प्रदा सदा ।।
ॐ श्रीं कमलवास्नियै स्वाहा पृष्ठ सदावतु ।
ॐ श्रीं पद्मालयायै स्वाहा वक्षः सदावतु ।।
पातु श्रीममं ककालम् बाहुयुग्म च ते नमः ।।
ॐ ह्रीं श्रीं अक्षययैनमः पादौ पातु मे सततं चिरम्
ॐ ह्रीं श्रीं नमः पद्मायै स्वाहा सर्वागम् पातु मे सदा ।
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्षम्यै स्वाहा माम् पातु सर्वतः ।।
💢धन-सम्पत्ति
यह सर्वेश्वर्य प्रदायक लक्ष्मी कवच है, जो सम्पूर्ण दुखों को दूर करने वाला,
ऐश्वर्य प्रदान करने वाला तथा समस्त शत्रुओं का मर्दन करने वाला है। मनुष्य इसे विधिपूर्वक
कंठ में अथवा दाहिनी भुजा में धारण कर सर्वत्र विजयी होता है। महालक्ष्मी उसके घर को
कभी नहीं त्यागतीं, बल्कि प्रत्येक जन्म में छाया की भाँति उसके साथ रहती हैं। इस      🎉लक्ष्मी कवच
को धारण करने से साधक की लक्ष्मी साधना में आने वाली विपत्ति, बाधाओं से रक्षा होती है।


🌿✨ “जहाँ लक्ष्मी स्थिर, वहाँ दरिद्रता का नामोनिशान नहीं!”🎉
🌿✨ “सिर्फ 12 नामों का पाठ — और जीवन में धन, सुख, समृद्धि का वास!”
🌿✨ “लक्ष्मी कवच धारण करें, हर बाधा से पाएं दिव्य रक्षा!”
🌿✨ “जो पढ़े लक्ष्मी स्तोत्र, उसके घर सदा महालक्ष्मी का निवास!”
🌿✨ “दरिद्रता हटेगी, भाग्य चमकेगा — आज ही करें लक्ष्मी साधना!”

🛟🌸 लक्ष्मी स्तोत्र एवं लक्ष्मी कवच 🌸🛟
जो साधक लक्ष्मी पूजन के समय भगवती के बारह नामों का श्रद्धा से पाठ करता है, उसके घर में धन, ऐश्वर्य, सुख और संतान वृद्धि सदा बनी रहती है।
🔯 लक्ष्मी कवच धारण करने से —
✔️ धन-सम्पत्ति की वृद्धि
✔️ शत्रु बाधा नाश
✔️ रोग-दुःख से रक्षा
✔️ व्यापार व नौकरी में उन्नति
✔️ घर में स्थायी लक्ष्मी का वास

🔥 विशेष सुख-शांति एवं धन वृद्धि हेतु अनुष्ठान 🔥

📍श्री चिदात्म ज्योतिष अनुसंधान केंद्र,नागौर राजस्थान ३४१००१.
🔱 रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश प्रेमजी:
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👉 अगर आप भी चाहते हैं जीवन में स्थायी लक्ष्मी का वास, तो आज ही संपर्क करें।
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.     💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥

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अगर आपको हमारा पंचांग नियमित चाहिए तो आप मुझे फॉलो करे
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱
vipul

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