*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 29 जनवरी 2026*
*🎈 दिन- गुरुवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शरद*
*🎈 मास - माघ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈तिथि- एकादशी व्रत - 01:54:31 पी एम तक* तत्पश्चात द्वादशी प्रदोष व्रत*
*🎈 नक्षत्र -रोहिणी - 07:31 ए एम तकतत्पश्चात्*👇
*🎈 👉मृगशिरा - 05:29 ए एम, जनवरी 30 तक*
*🎈 योग -इन्द्र - 08:27 पी एम तकतत्पश्चात् वैधृति*
*🎈करण - विष्टि - 01:55 पी एम तक
ⓘवार गुरुवार तक तत्पश्चात् बव *
*🎈राहुकाल -02:10 पी एम से 03:31 पी एम. (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈चन्द्र राशि- वृषभ - 06:31 पी एम तक तत्पश्चात् मिथुन*
*🎈सूर्य राशि- मकर *
*🎈 सूर्योदय-07:23:00am*
*🎈सूर्यास्त - 06:13 pm*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈 दिनमान- 10 घण्टे 51 मिनट्स 36 सेकण्ड्स
*🎈रात्रिमान- 13 घण्टे 07 मिनट्स 57 सेकण्ड्स*
*🎈मध्याह्न- 12:48 पी एम*
*🎈दिशा शूल- दक्षिण दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:37 ए एम से 06:30 ए एम*(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:27 पी एम से 01:10 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:22 ए एम, जनवरी 30 से 01:14 ए एम, जनवरी 30*
*🎈रवि योग- 07:23 ए एम से 07:31 ए एम*
*🎈 अमृत काल 09:26 पी एम से 10:54 पी एम*
*🎈 व्रत एवं पर्व- ... दशमी व्रत*
*🎈विशेष माघ मास महात्म्य *
माघ मास प्रयागराज में कल्पवास चल रहा है*
🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
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*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।
*🛟शुभ - उत्तम-07:23 ए एम से 08:44 ए एम*
*🛟रोग - अमंगल-08:44 ए एम से 10:05 ए एम*
*🛟उद्वेग - अशुभ-10:05 ए एम से 11:27 ए एम*
*🛟चर - सामान्य-11:27 ए एम से 12:48 पी एम*
*🛟लाभ - उन्नति-12:48 पी एम से 02:10 पी एम*
*🛟अमृत - सर्वोत्तम-02:10 पी एम से 03:31 पी एम*
*🛟काल - हानि-03:31 पी एम से 04:53 पी एम काल वेला*
*🛟शुभ - उत्तम-04:53 पी एम से 06:14 पी एम वार वेला*
*🛟चोघडिया, रात्🛟*
*🛟 अमृत - सर्वोत्तम-06:14 पी एम से 07:53 पी एम*
*🛟 चर - सामान्य-07:53 पी एम से 09:31 पी एम*
*🛟 रोग - अमंगल-09:31 पी एम से 11:10 पी एम*
*🛟 काल - हानि-11:10 पी एम से 12:48 ए एम, जनवरी 30*
*🛟 लाभ - उन्नति-12:48 ए एम से 02:27 ए एम, जनवरी 30 काल रात्रि*
*🛟 उद्वेग - अशुभ-02:27 ए एम से 04:05 ए एम, जनवरी 30*
*🛟 शुभ - उत्तम-04:05 ए एम से 05:44 ए एम, जनवरी 30*
*🛟 अमृत - सर्वोत्तम-05:44 ए एम से 07:22 ए एम, जनवरी 30*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
🌷 ✍️💥गुप्त नवरात्रि माघ💥
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⏳🌺 जब राधारानी ने अपने 'मेहमानों' को भोजन कराया: बरसाना का अद्भुत प्रसंग 🌺
यमुना जी के पावन तट पर, ब्रज की धूल फांकते हुए तीन साधु अपनी मस्ती में चले जा रहे थे। उनमें से एक साधु अत्यंत वृद्ध थे, शरीर जर्जर हो चुका था। जब थकान हावी होने लगी, तो वे एक गाँव के बाहर स्थित मंदिर में रुक गए और अपने साथियों से बोले—
"भाइयों! मेरा शरीर अब और साथ नहीं दे रहा। मैं यहीं आसन लगाता हूँ। तुम दोनों युवा हो, तुम अपनी यात्रा जारी रखो।"
वृद्ध साधु की आज्ञा पाकर दोनों युवा साधु आगे बढ़ चले। उनके पैरों में थकान थी, पर मन में ब्रज-रज का उत्साह था।
चलते-चलते सूरज ढलने लगा। आकाश में सिंदूरी रंग बिखर गया। सामने पहाड़ी पर एक दिव्य गाँव दिखाई दिया— बरसाना! जगत जननी श्री राधारानी का धाम।
गाँव की सीमा पर पहुँचते ही एक साधु ने दूसरे से पूछा, "भाई! शाम हो गई है, भूख भी लगी है। भिक्षा माँगने कहाँ चलें?"
दूसरा साधु, जो थोड़ा विनोदी और भावुक स्वभाव का था, मुस्कुराकर बोला—
"अरे पगले! यह हमारी लाडली जी का गाँव है। बेटी के घर जाकर बाप भी कभी भीख माँगता है क्या? हम तो राधारानी के मेहमान हैं। मेहमान माँगते नहीं, मेहमानों की तो खातिरदारी होती है।"
दोनों ने हँसी-ठिठोली में यह बात कही, पर कहीं न कहीं उनके अंतर्मन में एक गहरा विश्वास भी था। उन्होंने तय किया—
"आज माँगेंगे नहीं। अगर वो अपनी चौखट पर भूखा सुलाएगी, तो भूखे सो जाएंगे। देखेंगे हमारी मेज़बानी वो कैसे करती है!"
शाम की आरती हुई, मंदिरों में शंख और घंटे बजे। धीरे-धीरे भीड़ छंट गई। दोनों साधु मंदिर के एक कोने में अपनी गुदड़ी बिछाकर, पेट पर कपड़ा बांधकर, 'राधे-राधे' का स्मरण करते हुए सो गए।
रात गहरा गई थी। पूरा बरसाना नींद के आगोश में था। घड़ी की सुइयां रात के 11 बजा रही थीं।
राधारानी जी के मुख्य पुजारी अपने घर में गहरी नींद में सो रहे थे।
तभी... पुजारी जी को लगा जैसे किसी ने उन्हें जोर से हिलाया। एक नन्ही बालिका की मीठी, लेकिन अधिकार भरी आवाज़ गूंजी—
"अरे! तू यहाँ चैन से सो रहा है? और वहां मेरे मेहमान भूखे सो रहे हैं?"
पुजारी जी हड़बड़ा कर उठे। पसीने से तर-बतर। इधर-उधर देखा, कोई नहीं था। उन्होंने सोचा, "शायद कोई सपना है।" और फिर लेटने लगे।
तभी फिर वही आवाज़, इस बार थोड़ी और तेज़—
"उठता है कि नहीं? जा, मंदिर के कोने में दो साधु सो रहे हैं। वे मेरे मेहमान हैं, भूखे हैं। जल्दी जा और उन्हें भोजन करा।"
पुजारी के तो होश उड़ गए। साक्षात् लाडली जी का आदेश!
वे नंगे पैर भागे। रसोई खोली। देखा तो उत्सव का बचा हुआ छप्पन भोग रखा था—गरमा-गरम पूड़ियाँ, रसीली सब्जियाँ, खीर, मालपुआ और मिठाइयाँ।
पुजारी जी ने थाल सजाए और पागलों की तरह मंदिर के उस कोने में पहुँचे।
वहाँ सचमुच दो साधु चादर ओढ़े सो रहे थे।
पुजारी ने उन्हें झकझोरा, "महात्माओं! उठिए! जागिए!"
साधु घबराकर उठे, "क्या हुआ? कोई अपराध हो गया क्या?"
पुजारी जी की आँखों में आंसू थे। उन्होंने गदगद कंठ से पूछा, "क्या आप ही राधारानी के मेहमान हैं?"
यह सुनते ही साधुओं के रोंगटे खड़े हो गए।
साधु बोले, "महाराज, हमने तो शाम को बस आपस में मज़ाक किया था... क्या हमारी छोटी सी बात हमारी माँ ने सच में सुन ली?"
पुजारी ने बड़े आदर से उनके हाथ-पैर धुलाए, आसन बिछाया और वह दिव्य प्रसाद उन्हें परोसा। साधुओं ने पेट भरकर भोजन किया। उनकी आँखों से आंसू नहीं रुक रहे थे— "हे करुणामयी! हमने तो हँसी की थी, पर तूने उसे भी प्रार्थना मान लिया।"
भोजन करके, तृप्त होकर साधु फिर सो गए।
रात्रि के अंतिम पहर में, दोनों साधुओं को एक जैसा सपना आया।
सपने में क्या देखते हैं—
कि एक 12 वर्ष की किशोरी, जिसका रूप कोटि-कोटि चंद्रमाओं से भी सुंदर है, उनके पास आई है।
उसने बड़े लाड़ से पूछा, "बाबा! भोजन तो कर लिया न? पेट भर गया? तृप्ति मिली?"
साधु (सपने में): "हाँ लाडली, बहुत आनंद आया।"
किशोरी जी: "कोई और सेवा? कुछ और चाहिए?"
साधु: "नहीं-नहीं मैया, अब कुछ नहीं चाहिए।"
तब किशोरी जी ने शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा—
"देखो, वो पुजारी भी न, एकदम भोला है। डर के मारे तुम्हें भोजन तो करा गया, पर जल्दबाजी में मेरा 'पान-बीड़ा' (तांबूल) देना भूल गया। मेहमान को भोजन के बाद पान न मिले, तो विदाई अधूरी रहती है। लो, मैं तुम्हारे लिए पान लाई हूँ।"
ऐसा कहकर उस नन्ही किशोरी ने एक सुगंधित पान का बीड़ा उनके सिरहाने रख दिया।
जैसे ही किशोरी जी ने सिरहाने हाथ रखा, साधुओं की नींद खुल गई।
सुबह की पहली किरण फूट रही थी।
दोनों साधु हक्का-बक्का होकर एक-दूसरे को देख रहे थे।
एक बोला, "भाई! मैंने एक अद्भुत सपना देखा..."
दूसरा बोला, "क्या राधारानी पान देने आई थीं?"
पहला चौंक गया, "तुझे कैसे पता?"
और जैसे ही उन्होंने अपने सिरहाने देखा—वे स्तब्ध रह गए!
वहाँ सचमुच ताज़ा, सुगंधित पान का बीड़ा रखा हुआ था। उसमें से ऐसी दिव्य अलौकिक सुगंध आ रही थी जो इस धरती की हो ही नहीं सकती।
दोनों साधु फूट-फूटकर रोने लगे और 'राधे-राधे' की पुकार से पूरा मंदिर गुंजा दिया।
"धन्य है आपकी करुणा! हमने तो मज़ाक में संबंध जोड़ा था, पर आपने उसे सचमुच निभा दिया।"
यह प्रसंग हमें सिखाता है कि:
* ईश्वर से हमारा रिश्ता केवल 'विधि-विधान' का नहीं, बल्कि 'भाव' का है।
* आप जिस अधिकार से, जिस अपनत्व से उन्हें पुकारेंगे, वे उसी रूप में दौड़े चले आएंगे।
* बरसाना की वो सरकार अपने भक्तों की छोटी-सी-छोटी इच्छा, यहाँ तक कि 'पान' तक का खयाल रखती हैं।
बोलिए किशोरी जू की जय!
🙏बरसाने वाली राधारानी की जय! 🙏
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. 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध वि12:19 ए एम, जनवरी 19 से 01:12 ए एम, जनवरी 19शेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱


