*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक -14 मार्च 2026*
*🎈 वार- शनिवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈 मास - चैत्र मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष,*
*🎈तिथि- दशमी 08:10:20* तत्पश्चात् एकादशी*
*🎈 नक्षत्र - उत्तराषाढा 28:48:12* तक तत्पश्चात् उत्तराषाढा 👇
*🎈 योग - वरियान 10:41:28* तक तत्पश्चात् वरियान *
*🎈करण - विष्टि भद्र 08:10:20* तक तत्पश्चात् बव*
*🎈राहुकाल -09:45 pm से 11:15pm(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈चन्द्र राशि- धनु *till 09:32:03
*🎈 चन्द्र राशि- मकर from 09:32:03
*🎈सूर्य राशि - कुम्भ till 25:01:10*
*🎈सूर्य राशि- मीन from 25:01:10"
*🎈 सूर्योदय - 06:47:05*
*🎈सूर्यास्त - 18:41:14*pm*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:09 ए एम से 05:58 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:21 पी एम से 01:08 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:20 ए एम, मार्च 15 से 01:08 ए एम, मार्च 15*
*🎈 अमृत काल -09:56 पी एम से 11:40 पी एम*
*🎈 व्रत एवं पर्व पापमोचनी एकादशी व्रत
रविवार को*
*🎈विशेष चैत्र मास महात्म्य *
🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
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*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*
🛟
*🛟चोघडिया, रात्🛟*
*🛟
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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🔱 64 योगिनियों का दिव्य यन्त्र - चौंतीसा महायन्त्र 🔱
एक यन्त्र में समाई 64 योगिनियों की अपार शक्ति
नमस्ते दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसे अद्भुत और रहस्यमय यन्त्र के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसमें 64 योगिनियों की सम्पूर्ण शक्ति समाई हुई है। यह है चौंतीसा महायन्त्र - जो 64 शक्तियों का केन्द्र है और जिसके माध्यम से आप सभी 64 योगिनियों को एक साथ प्रसन्न कर सकते हैं।
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🌟 क्या हैं 64 योगिनियाँ?
64 योगिनियाँ देवी दुर्गा की 64 प्रमुख शक्तियाँ हैं। ये सभी अलग-अलग रूपों में, अलग-अलग शक्तियों के साथ विद्यमान हैं। तंत्र शास्त्र में 64 योगिनियों का बहुत महत्व बताया गया है। ये योगिनियाँ साधक की हर प्रकार से रक्षा करती हैं, उसके सभी कार्य सिद्ध करती हैं और उसे हर संकट से बाहर निकालती हैं।
64 योगिनियों की उपासना से साधक के जीवन में कोई बाधा नहीं रहती। सभी प्रकार के भय, शत्रु, रोग, ग्रह दोष, पितृ दोष, कुलदेवी के बंधन - सब समाप्त हो जाते हैं।
📿 श्री चतुःषष्टि योगिनी स्तोत्रम्
॥ श्रीचतुःषष्टियोगिनीस्तोत्रम् ॥
अं ह्रीं दिव्ययोगी महायोगी सिद्धयोगी गणेश्वरी।
प्रेताशी डाकिनी काली कालरात्रि निशाचरी (९)॥१॥
हुङ्कारी सिद्धवैताली ह्रीङ्कारी भूतडामरी।
ऊर्ध्वकेशी विरूपाक्षी शुक्लाङ्गी नरभोजिनी (१७)॥२॥
षट्कारी वीरभद्रा च धूम्राक्षी कलहप्रिया।
राक्षसी घोररक्ताक्षी विश्वरूपा भयङ्करी (२५)॥३॥
वैरी कुमारिका चण्डी वाराही मुण्डधारिणी।
भास्करी राष्ट्रटङ्कारी भीषणी त्रिपुनका (३४)॥४॥
रौरवी ध्वंसिनी क्रोधा दुर्मुखी प्रेतवाहनी।
खट्वाङ्गी दीर्घलम्बोष्ठी मालिनी मन्त्रयोगिनी (४३)॥५॥
कालिनी त्राहिनी चक्री कङ्काली भुवनेश्वरी।
कटी निकटी माया च वामदेवा कपर्दिनी (५२)॥६॥
केशमर्दी च रक्ता च रामजङ्घा महर्षिणी।
विशाली कार्मुकी लोला काकदृष्टिरधोमुखी (५९)॥७॥
मडोयधारिणी व्याघ्री भूतादिप्रेतनाशिनी।
भैरवी च महामाया कपालिनी वृथाङ्गनी (६४)॥८॥
चतुषष्टिः समाख्याता योगिन्यो वरदाः प्रदा।
त्रैलोक्ये पूजिता नित्यं देवमानवयोगिभिः॥९॥
चतुर्दश्यां तथाष्टम्यां सङ्क्रातौ नवमीषु च।
यः पठेत्पुरतो भूत्वा तस्य विघ्नं प्रणश्यति॥१०॥
राजद्वारे तथोद्वेगे सङ्ग्रामे अरिसङ्कटे।
अग्निचौरनिपातेषु सर्वग्रहविनाशिनि॥११॥
य इमां जपते नित्यं शरीरे भयमागते।
स्मृत्वा नारायणी देवी सर्वोपद्रवनाशिनी॥१२॥
॥ इति श्रीचतुःषष्टियोगिनीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
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🔱 चौंतीसा महायन्त्र - 64 शक्तियों का केन्द्र
चौंतीसा महायन्त्र एक विशेष प्रकार का यन्त्र है जिसमें 64 योगिनियों की शक्तियों को एक केन्द्र में समाहित किया गया है। यह यन्त्र 64 खानों में विभाजित होता है, जिसमें हर खाने में एक विशेष योगिनी की शक्ति निवास करती है।
यन्त्र की संरचना -
यह यन्त्र 8x8 के ग्रिड में बना होता है, जिसमें कुल 64 खाने होते हैं। हर खाने में एक विशेष अंक और एक विशेष बीज मंत्र लिखा जाता है। जब साधक इस यन्त्र की साधना करता है, तो सभी 64 योगिनियाँ एक साथ जाग्रत होती हैं और उसकी रक्षा करती हैं।
✨ इस यन्त्र और स्तोत्र के अद्भुत लाभ
🔥 पितृ बंधन से मुक्ति
यह यन्त्र और स्तोत्र पितरों के सभी प्रकार के बंधनों को काटता है। 64 योगिनियाँ मिलकर पितरों के बंधन तोड़ती हैं और उन्हें मुक्ति दिलाती हैं। पितृ दोष से पीड़ित लोगों के लिए यह संजीवनी से कम नहीं है।
🌺 कुलदेवी प्रसन्न
जब 64 योगिनियाँ प्रसन्न होती हैं, तो कुलदेवी स्वतः प्रसन्न हो जाती हैं। वे अपनी कृपा बरसाती हैं और परिवार की रक्षा करती हैं। कुलदेवी के बंधन और क्रोध से मुक्ति मिलती है।
🕉️ कुलदेवता की कृपा
कुलदेवता का आशीर्वाद मिलता है। 64 योगिनियाँ कुलदेवता को भी प्रसन्न करती हैं। वे सही मार्ग दिखाते हैं और परिवार की उन्नति करते हैं।
⚔️ दुर्गा कृपा
64 योगिनियाँ स्वयं माँ दुर्गा की शक्तियाँ हैं। इसलिए इस यन्त्र और स्तोत्र की साधना से माँ दुर्गा की विशेष कृपा होती है। वे शत्रुओं का नाश करती हैं और विजय दिलाती हैं।
🖤 काली कृपा
माँ काली का संरक्षण मिलता है। 64 योगिनियों में काली प्रमुख हैं। वे नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती हैं और तांत्रिक बाधाओं को दूर करती हैं।
💫 सर्व-कार्य-सिद्धि
हर कार्य बिना रुकावट के पूरा होता है। 64 शक्तियाँ मिलकर साधक के हर कार्य को सिद्ध करती हैं। चाहे वह व्यापार हो, नौकरी हो, विवाह हो या कोई अन्य कार्य - सब सिद्ध होते हैं।
🛡️ पूर्ण सुरक्षा
64 योगिनियाँ मिलकर साधक के चारों ओर एक अभेद्य सुरक्षा कवच बना देती हैं। कोई भी नकारात्मक शक्ति साधक के पास नहीं फटक सकती। राजद्वार, संग्राम, शत्रु संकट, अग्नि, चोर - सबसे रक्षा होती है।
⏰ विशेष तिथियों पर लाभ
स्तोत्र के अनुसार - चतुर्दशी, अष्टमी, संक्रांति और नवमी के दिन इस स्तोत्र का पाठ करने से सभी विघ्न नष्ट हो जाते हैं।
⚡ यन्त्र और स्तोत्र साधना की विधियाँ
विधि 1 - 1000 जाप (एक साथ)
✅ ग्रहण के दिन, दीपावली के दिन या होली के दिन इस यन्त्र के सामने चौंतीसा मन्त्र का 1000 जाप करें।
✅ इसके बाद 11 बार योगिनी स्तोत्र का पाठ करें।
✅ इससे यह यन्त्र सिद्ध हो जाता है और जीवनभर काम करता है।
विधि 2 - 11 दिन की साधना
✅ रोज 5 माला (540 बार) चौंतीसा मन्त्र का जाप करें।
✅ रोज 3 बार योगिनी स्तोत्र का पाठ करें।
✅ 11 दिन तक लगातार करें।
✅ इससे यह यन्त्र प्रभावी हो जाता है।
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🕉️ यन्त्र पूजन और जाप विधि
पहला चरण - यन्त्र स्थापना
1. यन्त्र को किसी स्वच्छ स्थान पर लाल कपड़े पर रखें।
2. षोडशोपचार (16 उपचार) से यन्त्र का पूजन करें - आसन, स्वागत, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, नीराजन, मंत्रपुष्प, प्रदक्षिणा।
दूसरा चरण - संकल्प
हाथ में जल लेकर संकल्प करें -
"मैं (अपना नाम, गोत्र) 64 योगिनियों की कृपा प्राप्ति, सर्व-कार्य-सिद्धि और पूर्ण सुरक्षा के लिए इस चौंतीसा महायन्त्र की साधना और योगिनी स्तोत्र का पाठ कर रहा हूँ। हे 64 योगिनियों! हे कुलदेवी! हे माँ दुर्गा! हे माँ काली! मेरी साधना स्वीकार करें।"
तीसरा चरण - यन्त्र पर ध्यान
यन्त्र पर ध्यान करें। उसमें 64 योगिनियों की उपस्थिति महसूस करें। उनके विभिन्न रूपों का ध्यान करें।
चौथा चरण - मंत्र जाप
अब चौंतीसा मन्त्र का जाप शुरू करें -
"सातो पुत्र कालिका, बारह वर्ष कुंआर। एक देवी परमेश्वरी, चौदह भुवन दुवार। दो ह्रीं पक्षी, निर्मली तेरह देवी। देव अष्ट-भुजी परमेश्वरी। ग्यारह रुद्र-शरीर। सोलह कला सम्पूर्ण त्रय देवी। रक्ष-पाल दश औतार। उचरी पाँच पाण्डव। नार नव नाथ। बट-दर्शनी पन्द्रह तिथौ। जान चौही कीटी। परसिये काट माता। मुशकिल आन।"
पाँचवाँ चरण - योगिनी स्तोत्र का पाठ
मंत्र जाप के बाद श्री चतुःषष्टि योगिनी स्तोत्र का 1, 3 या 11 बार पाठ करें।
छठा चरण - प्रार्थना
जाप के बाद प्रार्थना करें -
"हे 64 योगिनियों! हे कुलदेवी! हे माँ कालिका! हे माँ दुर्गा! मेरे सभी कार्य सिद्ध करें। मेरी पूर्ण रक्षा करें। मेरे पितरों को मुक्ति दें। मेरे कुल की रक्षा करें। सभी विघ्नों का नाश करें। जय माता दी!"
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🌿 यन्त्र धारण करने के नियम
✅ यन्त्र को सिद्ध करने के बाद उसे लाल कपड़े में लपेटकर रखें।
✅ इसे तिजोरी, पूजा स्थान या व्यापार के गल्ले में रखा जा सकता है।
✅ पुरुष इसे दाएँ हाथ में धारण कर सकते हैं।
✅ स्त्री इसे बाएँ हाथ में धारण कर सकती हैं।
✅ यन्त्र को कभी गिराएं नहीं, सम्मान से रखें।
💫 64 योगिनियों के नाम
स्तोत्र में वर्णित 64 योगिनियाँ ये हैं -
1. दिव्ययोगी, 2. महायोगी, 3. सिद्धयोगी, 4. गणेश्वरी, 5. प्रेताशी, 6. डाकिनी, 7. काली, 8. कालरात्रि, 9. निशाचरी, 10. हुङ्कारी, 11. सिद्धवैताली, 12. ह्रीङ्कारी, 13. भूतडामरी, 14. ऊर्ध्वकेशी, 15. विरूपाक्षी, 16. शुक्लाङ्गी, 17. नरभोजिनी, 18. षट्कारी, 19. वीरभद्रा, 20. धूम्राक्षी, 21. कलहप्रिया, 22. राक्षसी, 23. घोररक्ताक्षी, 24. विश्वरूपा, 25. भयङ्करी, 26. वैरी, 27. कुमारिका, 28. चण्डी, 29. वाराही, 30. मुण्डधारिणी, 31. भास्करी, 32. राष्ट्रटङ्कारी, 33. भीषणी, 34. त्रिपुनका, 35. रौरवी, 36. ध्वंसिनी, 37. क्रोधा, 38. दुर्मुखी, 39. प्रेतवाहनी, 40. खट्वाङ्गी, 41. दीर्घलम्बोष्ठी, 42. मालिनी, 43. मन्त्रयोगिनी, 44. कालिनी, 45. त्राहिनी, 46. चक्री, 47. कङ्काली, 48. भुवनेश्वरी, 49. कटी, 50. निकटी, 51. माया, 52. वामदेवा, 53. कपर्दिनी, 54. केशमर्दी, 55. रक्ता, 56. रामजङ्घा, 57. महर्षिणी, 58. विशाली, 59. कार्मुकी, 60. लोला, 61. काकदृष्टि, 62. अधोमुखी, 63. मडोयधारिणी, 64. व्याघ
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. 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱





