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पञ्चाङ्ग 27 जनवरी 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक - 27 जनवरी 2026*
*🎈 दिन- मंगलवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शरद*
*🎈 मास - माघ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈तिथि-     नवमी    19:04:38* तक तत्पश्चात दशमी*
*🎈 नक्षत्र -     भरणी    11:07:47 तक तत्पश्चात् कृत्तिका*
*🎈 योग    - शुक्ल    27:11:44*pm तक तत्पश्चात्      ब्रह्म*     
*🎈करण    -         बालव    08:13:18 तक तत्पश्चात्     कोलव*
*🎈राहुकाल -हर जगह का अलग होगा
 3:30:am to 04:50 am तक (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
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*🎈चन्द्र राशि-       मेष    till 16:43:50
*🎈चन्द्र राशि-    वृषभ    from 16:43:50*
*🎈सूर्य राशि-     मकर    *
*🎈 सूर्योदय-07:24:39am*
*🎈सूर्यास्त -    18:11:17pm* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:38 ए एम से 06:31 ए एम*(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:26 पी एम से 01:10 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:21 ए एम, जनवरी 27 से 01:14 ए एम, जनवरी 27*
 *🎈रवि योग-    11:08 ए एम, जनवरी 28 से 07:33 ए एम, जनवरी 28*
*🎈 व्रत एवं पर्व- ... नवमी व्रत*
*🎈विशेष माघ मास महात्म्य *
माघ मास प्रयागराज में कल्पवास चल रहा है* 
🌺 माघ गुप्त नवरात्रि 2026 🌺
(दस महाविद्याओं की उपासना)
🔸 19 जनवरी – माँ काली
🔸 20 जनवरी – माँ तारा
🔸 21 जनवरी – माँ त्रिपुरसुंदरी (षोडशी)
🔸 22 जनवरी – माँ भुवनेश्वरी
🔸 23 जनवरी – माँ भैरवी
🔸 24 जनवरी – माँ छिन्नमस्ता
🔸25 जनवरी – माँ धूमावती
🔸 26 जनवरी – माँ बगलामुखी
🔸 👉 27 जनवरी – माँ मातंगी
🔸 28 जनवरी – माँ कमलात्मिका
✨ गुप्त नवरात्रि में साधना, मंत्र-जप और तप का विशेष महत्व होता है।
🙏 जय माँ आदिशक्ति
kundli


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    *🛟चोघडिया, दिन🛟*
   नागौर, राजस्थान, (भारत)    
   मानक सूर्योदय के अनुसार।
day




    
        *🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


  
 

     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
🌷 ✍️💥गुप्त नवरात्रि माघ💥 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🌷❤️💐🌼🪔❤️💐👉 ✍️ ★√*🛡️🌹

   
⏳🙏 महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद, जब धृतराष्ट्र ने अपने सभी 100 पुत्रों को खो दिया, तो उनका हृदय अत्यंत दुखी था। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण से प्रश्न किया, "हे केशव! मैंने इस जन्म में कभी किसी का बुरा नहीं किया, मैं जन्मांध हूँ और सदैव धर्म की मर्यादा में रहा। फिर मुझे इतना कष्ट क्यों मिला कि मेरे कुल में दीपक जलाने वाला भी कोई नहीं बचा?"
तब श्री कृष्ण ने उन्हें अपनी दिव्य दृष्टि से 50 जन्म पीछे देखने को कहा।
पिछला जन्म: राजा और हंस के अंडे
उस जन्म में धृतराष्ट्र एक प्रतापी राजा थे। उनके राज्य में एक ब्राह्मण रहता था जो अपनी तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले अपने प्रिय हंस और हंसिनी के जोड़े को राजा की देखरेख में छोड़ गया।
कुछ समय बाद हंसिनी ने 100 अत्यंत सुंदर अंडे दिए। राजा उन अंडों की सुंदरता पर मोहित हो गया, लेकिन उसके भीतर का लालच जाग उठा। उसने एक-एक करके उन 100अंडों को खा लिया (या नष्ट कर दिया)।
क्रूरता और पक्षियों का विलाप
जब उन अंडों से बच्चे नहीं निकले, तो हंस का जोड़ा वियोग में तड़पने लगा। अपनी संतान के वियोग में और राजा के विश्वासघात से दुखी होकर उन पक्षियों ने तड़प-तड़प कर प्राण त्याग दिए। मरते समय उनकी आँखों से जो पीड़ा निकली, वही धृतराष्ट्र के अगले जन्मों का आधार बनी।
(लोक कथाओं के अनुसार, चूँकि अंडों के भीतर पक्षियों की आँखें बंद रहती हैं, इसलिए राजा अगले जन्म में अंधा पैदा हुआ।)
50 जन्मों का इंतज़ार क्यों?
धृतराष्ट्र ने पूछा, "प्रभु, यदि अपराध 50 जन्म पहले हुआ था, तो दंड आज क्यों मिला?"
श्री कृष्ण ने समझाया:
 "राजन, 100 पुत्रों की मृत्यु का शोक सहने के लिए आपके पास उतना 'पुण्य' भी होना चाहिए था। पिछले 50जन्मों में आपने इतने पुण्य एकत्रित किए कि आप एक चक्रवर्ती सम्राट बन सकें और आपको100 पुत्रों का सुख प्राप्त हो सके। जैसे ही वह पुण्य समाप्त हुआ, आपके पिछले जन्म का वह 'पाप' फल देने के लिए जाग उठा।"
यह कहानी हमें तीन स्पष्ट बातें सिखाती है:
 * अदृश्य न्याय: हम जो बोते हैं, वही काटते हैं। कर्म कभी मरता नहीं, वह बस सही समय की प्रतीक्षा करता है।
 * विश्वासघात का फल: ब्राह्मण और उन बेजुबान पक्षियों के विश्वास को तोड़ना ही धृतराष्ट्र के पतन का कारण बना।
 * प्रारब्ध: वर्तमान की परिस्थितियाँ अक्सर हमारे उन कार्यों का परिणाम होती हैं जो हमें याद भी नहीं।


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.     💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥

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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध वि12:19 ए एम, जनवरी 19 से 01:12 ए एम, जनवरी 19शेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱
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