*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 12 मई 2026*
*🎈 वार- मंगलवार *
*🎈 मास - ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - दशमी 14:51:50 तत्पश्चात् एकादशी*
*🎈 नक्षत्र - पूर्वभाद्रपदा 25:16:34*
तक तत्पश्चात् उत्तरभाद्रपदा*
*🎈योग - वैधृति 23:18:32* तक तत्पश्चात् विश्कुम्भ*
*🎈करण - विष्टि भद्र 14:51:51* तक तत्पश्चात् बव*
*🎈राहुकाल - 03:52pm से 05:33pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि - कुम्भ*till 19:24:02
*🎈चन्द्र राशि - मीन from 19:24:02
*🎈सूर्य राशि - मेष*
*🎈 सूर्योदय - 05:50:05*
*🎈 सूर्यास्त - 19:13:10*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:25 ए एम से 05:07 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:05 पी एम से 12:58 पी एम*
*🎈अमृत काल- 06:05 पी एम से 07:43 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:10 ए एम, मई 12 से 12:52 ए एम, मई 12*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण दशमी व्रत आज होगा (मासिक व्रत )*
*🎈विशेष - दशमी के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- जेष्ठ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💥सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
★√*★√*★√*★√*★√*★√*★√*
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
👣🕉️ 🌹🌹 🌹🌹।। 🔶🔶🌹🌹 🌹
🔱🌹🌸 🌹समस्तमंत्रों एवं ध्वनि का गुप्तज्ञान!!🌹
१. बन्धन, उच्चाटन, में 'हूं'!
२. विद्वेषण-कार्यों में 'फट्'!
३. भूत-प्रेतादि शांति में 'हुं फट्'!
४. शुभ कार्यों में 'वषट्'!
५. यज्ञादि में 'स्वाहा'!
६. पूजन-कार्यों में 'नमः'!
७. पुष्टि, पुत्रादि कार्यों में 'स्वाहा'!
८. प्रबल वशीकरण में 'स्वधा'!
६. परस्पर-विद्वेष कार्यों में 'वषट्'!
१०. आकर्षण में 'हूं'!
यदि आप किसी भी मंत्र का जाप कर रहे है इष्ट या गुरु मंत्र का आपने क्या ये मंत्र की गति अपने भीतर आभास की है ?
1. यदि बाई नासिका से श्वास चलता है, तो 'सौम्य मंत्र जाग्रत होते हैं।
2. यदि दोनों नासिका-रन्ध्रों से श्वास चलता हो उस समय सभी मंत्र जाग्रत होते हैं।
3. जिस समय जो मंत्र जाग्रत हो, उसी का जप करने से सफलता मिलती है।
4. जिस मंत्र के अन्त में 'स्वाहा' शब्द का प्रयोग होता है वे 'स्त्री संज्ञक' मंत्र कहलाते हैं।
5. जिन मंत्रों के अन्त में 'हुँ' या 'फट्' शब्द का प्रयोग होता है उन्हें 'पुरुष-संज्ञक' मंत्र कहते हैं ।
6. जिन मन्त्रों के अन्त में 'स्वाहा' शब्द का प्रयोग होता है उन्हें 'नपु'सक संज्ञीय' मंत्र कहा जाता है।
7. जिन मंत्रों के अन्त में ओ३म्(Om) का प्रयोग हो उन्हें 'आग्नेय मंत्र' कहा जाता है।
8. पुरुष-संज्ञक मंत्रों का प्रयोग वशीकरण, अभिचार आदि कार्यों में किया जाता है।
9. स्त्री-संज्ञक मंत्र शत्रु व्याधि नाश रोग नाश कार्यों में किया जाता है।
I0. अन्य सभी कार्यों में नपुंशक-संज्ञक मंत्रों का प्रयोग होता है।.....
1. शांति कार्यों में नमः शब्द, स्तंभन में वषट्, वशीकरण में स्वाहा, उच्चाटन में 'हुँ' तथा मारण- कार्यों में 'फट्' शब्द का प्रयोग करना चाहिए।(यहाँ मारण का अर्थ मृत्यु देना नही अपितु रोगी शरीर को मंत्र पढ़ गंगाजल देकर मुक्ति देने से है) ये शब्द मंत्र के अन्त में लगाने चाहिए ।
2. मंत्रों की भी अलग-अलग जातियाँ हैं। एक वर्ण वाले मंत्र को 'कर्तरी', दो अक्षर वाले मंत्र को 'सूची', तीन अक्षरों वाले को 'मुद्गर, चार को 'मुसल', पंचाक्षरीय मंत्र को 'क्रूर', पडक्षर को 'शृंखला', सप्ताक्षरीय मंत्र को 'क्रकच', अष्टाक्षर को 'शूल', नवाक्षर को 'वज्र', दशाक्षर को 'शक्ति', एकादशाक्षर को 'परशु', द्वादशाक्षर को 'चक्र', त्रयोदशाक्षर को 'कुलिश', चतुर्दशाक्षर को 'नाराच', पंचदशाक्षर को 'भुशुंडी' एवं षोडपाक्षरीय मंत्र को 'पद्म' के नाम से संबोधित किया जाता है।
3. अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग जाति के मंत्रजप का विधान है। मंत्र-छेदन में 'कलंरी', भेद-कार्यों में 'सूचो', मंजन कार्यों में 'मुद्गर', क्षोम में 'मुसल', बन्धनादि में 'श्रृंखला', छेदन-कार्यों में 'क्रकम,' घात-कर्म में 'शूल', स्तम्मन भादि सिद्धि में 'वज्र', बन्धन में 'शक्ति', विद्वेषण में 'परशु', सभी प्रकार के कार्यों में 'चक्र', उत्साद में 'कुलिश', मारण-कार्यों में भूषुण्डी शक्ति-कार्यों में 'पद्म' मंत्र का प्रयोग करना चाहिए ।
4. जिस मंत्र के प्रारम्भ में नाम लिया जाता है, उसे 'पल्लव' मंत्र कहते हैं।
5. जिस मंत्र के अन्त में नाम लेने का विधान हो उसे 'योजन' मंत्र कहा जाता है ।(देवता तथा इष्ट नाम)
6. नाम के प्रारम्भ, मध्य या अन्त में मंत्र होने से उसे 'रोध' मंत्र कहा जाता है।
7. नाम के प्रत्येक अक्षर के पीछे जो मंत्र होता है, उसे 'पर' नाम की संज्ञा दी जाती है।
8. नाम के प्रारम्भ मे मंत्र तथा अन्त मे वही विलोम मंत्र देने से उसे 'सम्पुट' मंत्र कहा जाता है।(ॐ कालिके क्री क्री नमः क्री क्री कालिके ॐ) ऐसे
9. दो अक्षर मंत्र के फिर दो अक्षर नाम के इस प्रकार क्रम करने से उस मंत्र को 'विदर्भ मंत्र' की संज्ञा दी जाती है।
10. मंत्र के बीच में नाम ग्रथित (बांधा) होने पर उस मंत्र को "वेषण' मंत्र कहा जाता है।
11. मारण, उच्चाटन, विद्वेषण आदि कार्यों मे 'पल्लव' मंत्र का प्रयोग करना चाहिए ।
12. वशीकरण, शांति, मोहन आदि कार्यों में 'योजन' मंत्र का प्रयोग किया जाता है।
🙇 #जयश्रीसीताराम 🙇
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
♨️ ⚜️ 🕉🌞 🌞🕉 ⚜🚩*♥️~💕
💥अगर आपको हमारा पंचांग नियमित चाहिए तो आप मुझे इस चैनल को फॉलो करे
https://whatsapp.com/channel/0029Va65aSaKrWR
♨️ ⚜️ 🕉🌞 🌞🕉 ⚜🚩
🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
‼️अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱




