*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 07 सितंबर 2026*
*🎈 वार- सोमवार*
*🎈 मास - भाद्रपद मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि- एकादशी - 05:03 पी एम तक तत्पश्चात द्वादशी*
*🎈 नक्षत्र- पुनर्वसु - 06:14 पी एम तक तत्पश्चात पुष्य*
*🎈योग - द्वादशी - 02:42 पी एम तक
तत्पश्चात् शिव*
*🎈करण-तैतिल - 02:42 पी एम तक
तत्पश्चात् गर,वाणिज्य*
*🎈राहुकाल- 03:40 पी एम से 05:14 पी एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय-06:17 ए एम*
*🎈सूर्यास्त-06:49 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- मिथुन*12.37.33till तक तत्पश्चात कर्क*
*🎈सूर्य राशि- सिंह*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:45 ए एम से 05:31 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:08 पी एम से 12:58 पी एम*
*🎈अमृत काल - 10:40 ए एम से 12:10 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -12:10 ए एम, सितम्बर 09 से 12:56 ए एम, सितम्बर 09*
*🎈अमृत काल 10:33 ए एम से 12:03 पी एम*
*🎈 सर्वार्थ सिद्धि योग- 04:39 पी एम से 06:18 ए एम, सितम्बर 09*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-
🌹एकादशी व्रत आज है।
🛟07 सितंबर 2026, सोमवार (अजा एकादशी) का दिन सभी 12 राशियों के लिए करियर, धन, स्वास्थ्य और पारिवारिक मामलों में मिले-जुले संकेत लेकर आया है। चंद्र गोचर और अन्य योगों का प्रभाव सभी पर अलग-अलग रहेगा।
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
★√*★√*★√*★√*★√*★
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
‼️💢आज का राशिफल💢‼️
🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️
💥 मेष राशि: दिन की शुरुआत बेहद सक्रिय और भागदौड़ भरी रहेगी। पैसों के मामले में समझदारी से कदम उठाएं और बचत पर ध्यान दें।
💥वृषभ राशि: पुराने अनुभवों से सीख लेकर नए कार्यों की शुरुआत के योग हैं। दोस्तों की सलाह और सही खर्च प्रबंधन से आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा।
💥मिथुन राशि: कार्यक्षेत्र में फुर्ती बनी रहेगी, लेकिन वित्तीय मामलों में नियंत्रण रखना जरूरी है। दोपहर के बाद मानसिक स्थिति में सुधार होगा।
💥कर्क राशि: चंद्रमा और गुरु का आपकी राशि में गोचर भविष्य की सुरक्षा को लेकर गंभीर बनाएगा। काम में लगन बढ़ेगी और परिवार का सहयोग मिलेगा।
💥सिंह राशि: दिखावे से दूर रहें और अपनी प्राथमिकताओं पर ध्यान दें। सुख-सुविधाओं की चीजों पर धन खर्च होने की संभावना है।
💥कन्या राशि: बुध के गोचर से आपका हिसाब-किताब और बजट बहुत सटीक रहेगा। दफ्तर में आपकी अलग पहचान बनेगी और रुके हुए काम पूरे होंगे।
💥तुला राशि: शुक्र की स्थिति से आर्थिक लेन-देन में संतुलन और पारिवारिक रिश्तों से लाभ मिलेगा। मित्रों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा।
💥वृश्चिक राशि: खातों की जांच और पैसों को सुरक्षित रखने पर आपका पूरा ध्यान रहेगा। टैरो संकेतों के अनुसार रिश्तों में सुधार देखने को मिलेगा।
💥धनु राशि: साझीदारी के कार्यों में पूरी सफाई और पारदर्शिता रखें। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह आपके लिए फायदेमंद साबित होगी।
💥मकर राशि: कामकाज में जिम्मेदारियों का सही बंटवारा करें। नियमबद्ध तरीके से बचत करने की आदत आपके भविष्य को सुरक्षित करेगी।
💥कुंभ राशि: निवेश करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतें। नई सोच और योजनाओं पर अमल करने के लिए दिन अनुकूल है।
💥मीन राशि: अपनी दैनिक आदतों में सुधार लाएं और पेंडिंग पड़े हुए कार्यों को समय पर पूरा करें। सेहत सामान्य रहेगी
💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 माँ यह तस्वीर भगवान शनिदेव और बाल गणेश से जुड़ी एक बेहद प्रसिद्ध पौराणिक कथा को दर्शाती है। यह दृश्य उस समय का है जब माता पार्वती ने गणेश जी को जन्म दिया था और सभी देवी-देवता उनके दर्शन और आशीर्वाद के लिए कैलाश पर्वत पर आए थे। [1]इस चित्र के पीछे की पूरी पौराणिक कहानी नीचे दी गई है:1. शनिदेव को मिला श्रापपौराणिक कथाओं (विशेषकर ब्रह्मवैवर्त पुराण) के अनुसार, शनिदेव भगवान शिव के परम भक्त थे। वे हमेशा भगवान कृष्ण की भक्ति और तपस्या में लीन रहते थे। एक बार जब वे ध्यान में मग्न थे, तब उनकी पत्नी उनके पास आईं, लेकिन शनिदेव ने उन पर ध्यान नहीं दिया। क्रोधित होकर उनकी पत्नी ने उन्हें श्राप दे दिया कि "अब से आपकी दृष्टि (नजर) जिस किसी पर भी पड़ेगी, उसका विनाश हो जाएगा।" इसी वजह से शनिदेव की नजर को अशुभ या 'वक्र दृष्टि' कहा जाने लगा। 2. बाल गणेश का जन्म उत्सवजब माता पार्वती ने बालक गणेश को जन्म दिया, तो कैलाश में एक भव्य उत्सव का आयोजन किया गया। सभी ऋषि-मुनि और नवग्रह (नौ ग्रह) बालक को आशीर्वाद देने पहुंचे। शनिदेव भी वहां मौजूद थे, लेकिन अपने श्राप के कारण वे सिर झुकाए खड़े रहे ताकि उनकी नजर नवजात बच्चे पर न पड़े। 3. माता पार्वती का आग्रहजब माता पार्वती ने देखा कि शनिदेव बालक की तरफ नहीं देख रहे हैं, तो उन्होंने उनसे इसका कारण पूछा। शनिदेव ने बड़ी विनम्रता से अपने श्राप के बारे में बताया और कहा कि मेरी दृष्टि आपके बालक का अहित कर सकती है। लेकिन माता पार्वती को अपने पुत्र की सुरक्षा पर पूरा विश्वास था और उन्होंने सोचा कि शनिदेव जैसे परम भक्त की दृष्टि उनके पुत्र का कुछ नहीं बिगाड़ सकती। इसलिए उन्होंने शनिदेव से बालक के मुख की ओर देखने का बार-बार आग्रह किया। 4. दृष्टि पड़ते ही घटित हुई घटनामाता पार्वती के अत्यधिक अनुरोध पर, शनिदेव ने जैसे ही तिरछी नजरों से बाल गणेश के चेहरे की तरफ देखा, वैसे ही उनके श्राप के प्रभाव (वक्र दृष्टि) से बाल गणेश का मस्तक (सिर) धड़ से अलग होकर आकाश में विलीन हो गया। (तस्वीर में इसी क्षण को एक तीव्र प्रकाश पुंज या लेजर जैसी रोशनी के रूप में दिखाया गया है, जो शनिदेव की आंखों से निकलकर बच्चे के मस्तक पर पड़ रही है)। 5. इस घटना का परिणामपुत्र की यह दशा देखकर माता पार्वती बेहोश हो गईं और कैलाश पर हाहाकार मच गया। इस संकट की स्थिति को संभालने के लिए भगवान विष्णु तुरंत अपने वाहन गरुड़ पर सवार होकर उत्तर दिशा की ओर निकले। वहां उन्हें सबसे पहले एक हथनी का बच्चा मिला, जिसका सिर उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से काटकर अलग किया और उसे लाकर बाल गणेश के धड़ से जोड़ दिया। इस तरह भगवान गणेश को नया जीवन मिला और वे "गजानन" (हाथी के मुख वाले) कहलाए।
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💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
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*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️














