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पञ्चाङ्ग 03अक्टूबर 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*

jyotis


*🎈दिनांक 03अक्टूबर 2026*
*🎈वार-  शनिवार*
*🎈मास - आश्विन मास*
*🎈पक्ष -  कृष्ण पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-सप्तमी-07:59.08 ए एम तक तत्पश्चात अष्टमी* 
*🎈नक्षत्र- आर्द्रा - 25:28:35 ए एम, अक्टूबर 02 तक तत्पश्चात, पुनर्वसु*
*🎈करण    - बव - 07:59:08 पी एम तक तत्पश्चात्, बालव,कौलव*
*🎈योग-    वारियान - 15:20:39 पी एम तकतत्पश्चात् परिध* 
*🎈राहुकाल- 09:26 ए एम से 10:55 ए एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय- 06:29.39 ए एम*
*🎈सूर्यास्त- 06:18:09 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- मिथुन*
*🎈सूर्य राशि- कन्या*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:51 ए एम से 05:40 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:00 पी एम से 12:48 पी एम*
*🎈अमृत काल    -04:05 पी एम से 05:35 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -12:00 पी एम से 12:48 ए एम, अक्टूबर 04*

*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-  🏵️ ☀️☀️☀️03 अक्टूबर 2026: अष्टमी श्राद्ध  है।🏓🏓🏓
👁️"विष्णु भगवान की जय हो "🙏 🌹

🛟ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, अष्टमी तिथि को नारियल का फल खाना वर्जित (निशिद्ध) है।
धार्मिक मान्यता एवं प्रभाव
• बुद्धि का नाश: शास्त्रों के अनुसार, अष्टमी तिथि के दिन नारियल खाने से मनुष्य की बुद्धि का नाश होता है और विवेक कमजोर पड़ता है।


💥3 अक्टूबर 2026, शनिवार का दिन सभी 12 राशियों के लिए करियर, धन, स्वास्थ्य और रिश्तों के मामले में मिला-जुला और खास रहने वाला है।
kundli


👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
     🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
       *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day



          🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
★√*★√*★√*★√*★√*★
     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
   
    ‼️💢आज का राशिफल💢‼️

🏓🏓सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल💕
💥•  • मेष राशि: दिन भाग्यशाली रहेगा। कार्यक्षेत्र में बॉस और सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। मेहनत रंग लाएगी और कोई अच्छी खबर मिल सकती है।

💥• वृषभ राशि: मनचाहा आर्थिक लाभ मिलने के योग हैं। पैसों से जुड़े मामलों में लिए गए सही फैसले फायदेमंद साबित होंगे। जीवनसाथी के साथ समय अच्छा बीतेगा।

💥• मिथुन राशि: व्यापार और कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता मिल सकती है। पुरानी गलतियों से सीखकर योजनाएं सुधारेंगे। खर्चों पर थोड़ा नियंत्रण रखना जरूरी है।

💥• कर्क राशि: लंबे समय से रुका हुआ काम पूरा हो सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। परिवार में किसी मांगलिक कार्य की बाधा दूर हो सकती है।

💥• सिंह राशि: कारोबार में बंपर मुनाफा हो सकता है। मान-सम्मान बढ़ेगा, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर कुछ छोटी-मोटी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

💥• कन्या राशि: कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत और समझदारी की सराहना होगी। कामकाज के सिलसिले में नए और व्यावहारिक अवसर सामने आएंगे।

💥• तुला राशि: सोशल मीडिया और संपर्कों के जरिए बिजनेस में नए क्लाइंट्स व लाभ के मौके मिलेंगे। यात्रा के योग बन सकते हैं जो नए अवसर लाएंगे।

💥• वृश्चिक राशि: मानसिक शांति पाने के लिए कुछ सार्थक प्रयास करने होंगे। रिश्तों और परिवार में स्थिरता व अपनापन बनाए रखने का प्रयास करें।

💥• धनु राशि: मशीनरी या कारखाने से जुड़े कारोबार में लाभदायक अनुबंध मिलने के योग हैं। आत्मविश्वास मजबूत रहेगा और बड़े निर्णय ले सकते हैं।

💥• मकर राशि: ऑफिस में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। सीनियर आपकी मेहनत से प्रभावित होंगे। सेहत को लेकर पेट या पाचन से जुड़ी समस्या के प्रति सतर्क रहें।

💥• कुंभ राशि: बाजार में फंसा या उधार दिया हुआ रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। दिन ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरपूर रहेगा।

💥• मीन राशि: निवेश या पुराने सौदों से वित्तीय लाभ होगा। कला और रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए दिन शानदार रहेगा।

💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
  
 ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं अभी श्राद्ध पक्ष चल रहा है। ☀️

#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼 
🌿 🌿 पितृपक्ष के सम्बंध में आवश्यक जानकारी
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सर्व वेदवेत्ता गुरुजनों को वंदन करके पितृपक्ष के विषय में थोड़ी जानकारी प्राप्त करते हैं। श्रद्धा से जो किया जाता है, उसे शास्त्रकारों ने "श्राद्ध" की संज्ञा दी है।

मृत व्यक्ति के उद्देश्य से प्रतिवर्ष जो श्राद्ध किया जाता है, उसे सांवत्सरिक श्राद्ध कहा जाता है। पितृपक्ष में जो श्राद्ध किया जाता है, उसे महालय श्राद्ध कहा जाता है।

हमारे आकाश को 360 अंशों में कल्पित किया गया है। सूर्य के छठी राशि अर्थात "कन्या राशि" में प्रवेश करने से लेकर उसके वृश्चिक राशि में प्रवेश करने तक का समय लगभग दो महीने का होता है। इस अवधि में महालय श्राद्ध किया जा सकता है।

आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से लेकर आश्विन अमावस्या तक के कृष्ण पक्ष में प्रतिदिन महालय श्राद्ध करना चाहिए, ऐसा शास्त्रों में कहा गया है। वर्तमान समय में लगातार 15 दिनों तक श्राद्ध करना व्यावहारिक दृष्टि से थोड़ा कठिन होने के कारण, पिता या अन्य पूर्वज के निधन की तिथि अथवा अमावस्या के दिन एक बार महालय श्राद्ध किया जाता है। यह पक्ष भी शास्त्रसम्मत माना गया है।

सांवत्सरिक श्राद्ध में तीन पीढ़ियों को उद्देश्य करके पिंडदान किया जाता है — माता, दादी, परदादी अथवा पिता, दादा, परदादा। परंतु महालय श्राद्ध में सभी संबंधित मृत रिश्तेदारों के लिए पिंडदान किया जाता है।

पितृत्रयी . पिता, दादा, परदादा

मातृत्रयी . माता, दादी, परदादी

मातामहत्रयी . माता के पिता, नाना, परनाना

मातामहीत्रयी . माता की माता, नानी, परनानी

सापत्न माता . सौतेली माता

पत्नी . यदि पत्नी का निधन हो चुका हो

पुत्र . यदि उपनयन संस्कार हो चुका पुत्र दिवंगत हुआ हो

दुहिता . यदि विवाहित पुत्री का निधन हो चुका हो

पितृव्य . सगे चाचा। यदि चाची का निधन हो चुका हो तो सपत्नीक का उल्लेख किया जाता है। यदि चचेरे भाई का निधन हुआ हो तो ससुत का उल्लेख किया जाता है।

मातुल . सगे मामा। यदि मामी का निधन हुआ हो तो सपत्नीक तथा यदि ममेरे भाई का निधन हुआ हो तो ससुत का उल्लेख किया जाता है।

भ्राता . सगा भाई। यदि भाभी का निधन हुआ हो तो सपत्नीक का उल्लेख किया जाता है।

पितृभगिनी . सगी बुआ। यदि बुआ के पति का निधन हो चुका हो तो सभर्तृ का उल्लेख किया जाता है और यदि बुआ के पुत्र का निधन हुआ हो तो ससुत कहा जाता है।

मातृभगिनी . सगी मौसी। यदि मौसी के पति का निधन हुआ हो तो सभर्तृ और यदि मौसेरे भाई का निधन हुआ हो तो ससुत का उल्लेख किया जाता है।

आत्मभगिनी . सगी बहन। यदि उसके पति का भी निधन हो चुका हो तो सभर्तृ का उल्लेख किया जाता है।

श्वशुर . ससुर। यदि सास का निधन हो चुका हो तो सपत्नीक कहा जाता है।

गुरु . जिन्होंने गायत्री मंत्र का उपदेश दिया हो। यदि पिता ने ही उपनयन संस्कार कराया हो तो पिता ही गुरु माने जाते हैं। यदि किसी अन्य व्यक्ति ने उपनयन संस्कार कराया हो तो वे गुरु माने जाते हैं।

आचार्य गुरु . जिन्होंने विद्या एवं शिक्षा प्रदान की हो।

शिष्य . अपना विद्यार्थी।

आप्त . उपर्युक्त नामों में जिनका उल्लेख नहीं है, लेकिन जिनके साथ हमारे आत्मीय संबंध थे और जिन्होंने हम पर उपकार किए हैं, उन सभी को "आप्त" की संज्ञा देकर उनके लिए भी पिंडदान किया जा सकता है।

सभी मृत रिश्तेदारों के नाम और गोत्र सहित एक कॉपी में लिखकर रखना चाहिए तथा पुरोहित की सलाह के अनुसार उपरोक्त प्रकार से व्यवस्थित सूची बनानी चाहिए। इसके अलावा महालय में चार धर्मपिंडों की भी व्यवस्था की गई है।

मित्र, सखा, पशु, वृक्ष तथा जाने-अनजाने जिन लोगों ने हम पर उपकार किए हैं, उनके लिए धर्मपिंड दिया जाता है। जो हमारे आश्रित थे, उनके लिए भी धर्मपिंड की व्यवस्था है।

मातृवंश, पितृवंश, गुरु के वंश अथवा आप्त-बांधवों में जिन लोगों की संतान नहीं होने के कारण पिंडदान नहीं हो पाता, जिनका क्रियाकर्म नहीं हुआ, जो जन्म से अंधे या दिव्यांग पैदा हुए अथवा जिनका शरीर विकृत था, उनके लिए भी धर्मपिंड की व्यवस्था है।

जो कुंभीपाक नामक नरक में पापकर्मों के कारण कष्ट भोग रहे हैं, उनके लिए भी धर्मपिंड दिया जाता है। इस प्रकार महालय में चार धर्मपिंड दिए जाते हैं।

महालय श्राद्ध कितने प्रकार से किया जा सकता है?
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कई श्रद्धावान और आस्तिक लोग नौकरी अथवा व्यस्त जीवन के कारण पितृपक्ष में विस्तृत रूप से श्राद्ध नहीं कर पाते। उनके लिए शास्त्रों में विभिन्न प्रकार की व्यवस्थाएं बताई गई हैं।

1. दो या पांच ब्राह्मण अथवा चट पर दर्भ-बटु ब्राह्मण की योजना करके, श्राद्ध का भोजन बनाकर सपिंडक महालय किया जा सकता है।

2. आमन्न अर्थात शिधा-सामग्री की व्यवस्था करके आमश्राद्ध किया जा सकता है।

3. दूध, केले तथा अल्पाहार की व्यवस्था करके हिरण्यश्राद्ध किया जा सकता है। इसमें पिंडदान नहीं होता।

4. ब्रह्मार्पण . दो या पांच ब्राह्मणों को भोजन कराकर तथा यदि किसी सवाष्णी का निधन हुआ हो तो सवाष्णी अर्थात सुवासिनी पूजन करके अन्नसंतर्पण किया जाता है। इसमें पिंडदान नहीं होता।

5. यदि किसी की आर्थिक स्थिति अच्छी न हो अथवा आयु या शारीरिक सामर्थ्य के कारण मनुष्यबल कम हो, तो "शमीपत्र" जितना पिंड देना भी शास्त्रसम्मत माना गया है। शमीपत्र लगभग चावल के एक दाने जितना होता है।

यदि इनमें से कुछ भी करना संभव न हो, तो घने वन में जाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़े होकर दोनों भुजाएं ऊपर उठाकर यह प्रार्थना करनी चाहिए कि — मेरी आर्थिक स्थिति न होने के कारण मैं पिंडदान अथवा अपने पितरों का श्राद्ध करने में असमर्थ हूं, इसके लिए मैं क्षमा चाहता हूं। इस प्रकार पितरों का स्मरण करने से भी श्राद्ध का फल प्राप्त होता है।

श्राद्ध में विकिर और प्रकीर नामक दो भाग दिए जाते हैं।

जिनका अग्निदाह हुआ हो अथवा जिनका अग्निदाह नहीं हुआ हो, गर्भस्राव में जिनकी मृत्यु हुई हो, जिन्हें शरीर या रूप भी प्राप्त नहीं हुआ हो — इन सभी के लिए महालय श्राद्ध में एक भाग दिया जाता है।

जिन देवताओं को सोमभाग प्राप्त नहीं होता, उनके लिए भी श्राद्ध में एक भाग दिया जाता है।

रामचंद्रजी ने वनवास के समय राजा दशरथ के लिए वन में कंद-मूल से पिंड प्रदान किए थे, ऐसा उल्लेख रामायण में भी मिलता है।🌺




🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏

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 💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
  ✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
           *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹          

 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
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