*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 04अक्टूबर 2026*
*🎈वार- रविवार*
*🎈मास - आश्विन मास*
*🎈पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-नवमी - 03:53 ए एम, अक्टूबर 05 तक तत्पश्चात दशमी *
*🎈नक्षत्र- पुनर्वसु - 12:13 ए एम, अक्टूबर 05 तक तत्पश्चात, पुष्य*
*🎈करण - तैतिल - 04:51 पी एम तकतत्पश्चात्, गर, वाणिज*
*🎈योग- परिघ - 12:32 पी एम तकतत्पश्चात् शिव*
*🎈राहुकाल- 04:50 पी एम से 06:18 पी एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय- 06:29.08 ए एम*
*🎈सूर्यास्त- 06:18:03 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- मिथुन*till18:30:58 तत्पश्चात कर्क*
*🎈सूर्य राशि- कन्या*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:51 ए एम से 05:40 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:00 पी एम से 12:47 पी एम*
*🎈अमृत काल -09:57 पी एम से 11:28 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -11:59 पी एम से 12:48 ए एम, अक्टूबर 05*
*🎈 रवि पुष्य योग 12:13 ए एम, अक्टूबर 05 से 06:29 ए एम, अक्टूबर 05*
*🎈 सर्वार्थ सिद्धि योग 12:13 ए एम, अक्टूबर 05 से 06:29 ए एम, अक्टूबर 05*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण- 🏵️ ☀️☀️☀️04 अक्टूबर 2026: नवमी श्राद्ध है।🏓🏓🏓
👁️"विष्णु भगवान की जय हो "🙏 🌹
🛟ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंडः 27.29-34) के अनुसार, नवमी तिथि के दिन लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य (वर्जित) माना गया है।
धार्मिक मान्यताएं एवं नियम
• लौकी का निषेध: शास्त्रों के अनुसार नवमी तिथि को लौकी का सेवन करना वर्जित है और इसे गोमांस के समान पापकर्म या त्याज्य बताया गया है।
💥4 अक्टूबर 2026 (रविवार) का दिन सभी 12 राशियों के लिए करियर, धन, परिवार और स्वास्थ्य के लिहाज से मिला-जुला रहने वाला है।
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
★√*★√*★√*★√*★√*★
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
‼️💢आज का राशिफल💢‼️
🏓🏓सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल💕
💥• मेष राशि (Aries)
• करियर और धन: व्यापार में बाहरी संपर्कों से लाभ मिलेगा। नई नीतियां फायदेमंद साबित होंगी।
• स्वास्थ्य और परिवार: दोस्तों और परिवार के साथ जश्न मनाने का मौका मिलेगा।
💥2. वृषभ राशि (Taurus)
• करियर और धन: फंसा हुआ पैसा वापस मिलने के योग हैं। पैतृक कारोबार को आगे बढ़ाने की योजना सफल होगी।
• स्वास्थ्य और परिवार: किसी अनुभवी की मदद से विवादित मामले सुलझेंगे।
💥3. मिथुन राशि (Gemini)
• करियर और धन: कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों से तालमेल बेहतर रहेगा। काम करने के तरीके में बदलाव से लाभ होगा।
• स्वास्थ्य और परिवार: कामकाजी महिलाओं को अपने फोकस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
💥4. कर्क राशि (Cancer)
• करियर और धन: चंद्रमा का गोचर आपकी ही राशि में है, जिससे मेहनत का पूरा फल मिलेगा। कारोबारी विवादों से दूर रहें।
• स्वास्थ्य और परिवार: संतुलित व्यवहार से कठिन लक्ष्य हासिल कर पाएंगे।
💥5. सिंह राशि (Leo)
• करियर और धन: विदेशी कंपनियों से बड़ी डील या नए अनुबंध मिलने के योग हैं।
• स्वास्थ्य और परिवार: सामाजिक गतिविधियों में समय बीतेगा, लेकिन ईर्ष्यालु लोगों से सतर्क रहें।
💥6. कन्या राशि (Virgo)
• करियर और धन: बीमा और निवेश से जुड़े कामों में फायदा हो सकता है। पेशेवर प्रभाव बढ़ेगा।
• स्वास्थ्य और परिवार: घर का वातावरण खुशनुमा रहेगा और मन को संतोष मिलेगा।
💥7. तुला राशि (Libra)
• करियर और धन: कामकाज समय पर पूरे होंगे। बिजनेस बढ़ाने की योजना आगे बढ़ेगी, कोई बड़ा प्रोजेक्ट मिल सकता है।
• स्वास्थ्य और परिवार: परिवार में मांगलिक कार्यक्रम की रूपरेखा बनेगी।
💥8. वृश्चिक राशि (Scorpio)
• करियर और धन: भूमि या वाहन खरीदने के योग बन रहे हैं। नए कर्ज या जोखिम भरे निवेश से बचें।
• स्वास्थ्य और परिवार: आत्मविश्वास बढ़ेगा। सेहत के लिए खुद को हाइड्रेटेड रखें।
💥9. धनु राशि (Sagittarius)
• करियर और धन: करियर में रफ्तार आएगी, लेकिन पैसों के लेन-देन में सावधानी बरतें।
• स्वास्थ्य और परिवार: नजरिए में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
💥10. मकर राशि (Capricorn)
• करियर और धन: इनकम बढ़ने के योग हैं। लैंड डील फाइनल हो सकती है और नौकरी में तरक्की मिलेगी।
• स्वास्थ्य और परिवार: दिन नई उम्मीदों और उत्साह से भरा रहेगा।
💥11. कुंभ राशि (Aquarius)
• करियर और धन: पुराने अनुभवों का लाभ उठाकर आर्थिक मामलों में सही फैसले लें।
• स्वास्थ्य और परिवार: मानसिक शांति के लिए योग और विश्राम को समय दें।
💥12. मीन राशि (Pisces)
• करियर और धन: योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर वित्तीय मामलों में स्थिरता आएगी।
• स्वास्थ्य और परिवार: परिवार के साथ संबंध मजबूत होंगे और भावनात्मक सहयोग मिलेगा।
💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं अभी श्राद्ध पक्ष चल रहा है। ☀️
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🌿 🌿 पितृपक्ष में भगवान पितरों को धरती पर जाने का आदेश क्यों देते हैं?
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यह प्रश्न केवल एक तिथि का नहीं, यह प्रश्न सृष्टि के सबसे बड़े रहस्य - मृत्यु के बाद जीवन का रहस्य है। पितृपक्ष क्या है, 15 दिन के लिए हमारे पितर धरती पर क्यों आते हैं, भगवान उन्हें आदेश क्यों देते हैं, इसका उत्तर आपको एक नहीं, पांच पुराणों और तीन शाप-कथाओं को जोड़कर समझना पड़ेगा।
💕पहला अध्याय 👉🏻 पितृलोक क्या है, कहां है?
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हम सोचते हैं, स्वर्ग और नर्क बस दो ही लोक हैं। पर गरुड़ पुराण कहता है, सृष्टि में 14 लोक हैं, 7 ऊपर, 7 नीचे। ऊपर के लोकों में - भू, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः, सत्यम्। भू लोक यह धरती है, जहां हम रहते हैं। भुवः लोक अंतरिक्ष है, जहां भूत-प्रेत, पिशाच रहते हैं। स्वः लोक इंद्र का स्वर्ग है, जहां देवता रहते हैं।
🛟पर पितरों का लोक इनसे अलग है। पितृलोक, चंद्रमा के ऊपर, और सूर्य से नीचे, एक विशेष स्थान पर है, जिसे *पितृलोक या यमलोक का एक भाग* कहा जाता है। इस लोक के अधिपति हैं *अर्यमा*, जो 12 आदित्यों में से एक हैं, और पितरों के राजा हैं, और इनके न्यायाधीश हैं *यमराज*।
🛟हर जीव जब मरता है, तो उसकी तीन गतियां होती हैं। यदि उसने बहुत पाप किए हैं, तो वह नरक में जाता है। यदि बहुत पुण्य किए हैं, तो स्वर्ग में जाता है। पर 90% सामान्य मनुष्य, जिनमें पाप और पुण्य दोनों हैं, वे पितृलोक में जाते हैं। वहां वे अपने परिवार के लोगों की प्रतीक्षा करते हैं, कि कब उनका पुत्र, पौत्र, उनके नाम से पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध करेगा, ताकि उन्हें आगे की गति मिले, मुक्ति मिले।
🛟गरुड़ पुराण कहता है, पितर, वायु रूप में होते हैं, उनका शरीर सूक्ष्म होता है, उन्हें भूख लगती है, प्यास लगती है, पर वे अन्न नहीं खा सकते, वे केवल गंध और भाव से तृप्त होते हैं। जब उनका पुत्र उनके नाम से जल देता है, काले तिल के साथ, *"इदं पितृभ्यः नमः"* कहकर, तो वह जल, मंत्र के द्वारा, अमृत बनकर, सीधा पितृलोक में उनके पास पहुंच जाता है। और जब पिंडदान होता है, तो वह चावल का पिंड, उनके लिए दिव्य भोजन बन जाता है।
🛟अब प्रश्न उठता है, तो पितर पितृलोक में ही तृप्त क्यों नहीं हो जाते, उन्हें धरती पर आने की क्या आवश्यकता है?
👉दूसरा अध्याय
👉🏻 तीन ऋण का सिद्धांत
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सनातन धर्म कहता है, हर मनुष्य जन्म लेते ही, तीन ऋणों के साथ पैदा होता है - *देव ऋण, ऋषि ऋण, और पितृ ऋण।*
👉देव ऋण
👉🏻 हम देवताओं से सूर्य का प्रकाश, चंद्रमा की शीतलता, इंद्र का जल, वायु की सांस लेते हैं, इसलिए यज्ञ-पूजन करके हमें देव ऋण चुकाना होता है।
👉ऋषि ऋण
👉🏻 हम वेद, शास्त्र, ज्ञान, जो ऋषियों ने हजारों वर्ष तपस्या करके हमें दिया, उससे हम शिक्षित होते हैं, इसलिए स्वाध्याय करके, ज्ञान बांटकर, हमें ऋषि ऋण चुकाना होता है।
👉और तीसरा, सबसे बड़ा ऋण
👉🏻 पितृ ऋण। यह शरीर हमें हमारे माता-पिता ने दिया, यह नाम हमें हमारे दादा-परदादा ने दिया, यह जमीन-जायदाद, संस्कार, गोत्र, सब हमें पितरों से मिला। इसलिए संतान उत्पन्न करके, उनका श्राद्ध-तर्पण करके, हमें पितृ ऋण चुकाना होता है।
🛟यदि कोई मनुष्य पितृ ऋण नहीं चुकाता, तो उसके पितर पितृलोक में अतृप्त रहते हैं, भूखे-प्यासे भटकते हैं, और वे दुखी होकर, अपने ही वंश को श्राप दे देते हैं, जिसे *पितृदोष* कहते हैं। पितृदोष से घर में संतान नहीं होती, धन नहीं टिकता, विवाह में बाधा आती है, रोग पीछा नहीं छोड़ता।
💕इसलिए भगवान ने एक व्यवस्था बनाई।
💕तीसरा अध्याय
👉🏻 भगवान का आदेश, सूर्य के कन्या राशि में आने पर
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आपने देखा होगा, पितृपक्ष हमेशा तब आता है, जब सूर्य, कन्या राशि में प्रवेश करता है। इसे *कनागत* भी कहते हैं। ज्योतिष कहता है, कन्या राशि, पितरों की राशि है।
पद्म पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण में कथा आती है, सृष्टि के आरंभ में, ब्रह्मा जी ने जब पितरों की रचना की, तो पितर बहुत भूखे थे, उन्होंने ब्रह्मा जी से कहा, हे सृष्टिकर्ता, हमारे लिए भोजन की व्यवस्था कीजिए। ब्रह्मा जी ने कहा, तुम्हारे वंशज जो तुम्हें श्राद्ध में भोजन देंगे, वही तुम्हारा भोजन होगा।
पर पितर पितृलोक से देख नहीं सकते कि उनका वंशज क्या कर रहा है, वे सूक्ष्म लोक में हैं। इसलिए भगवान विष्णु ने, यमराज को आदेश दिया, और यमराज ने नियम बनाया -
🛟"आश्विन मास के कृष्ण पक्ष के 15 दिन, जब सूर्य कन्या राशि में होगा, तब मैं पितृलोक के द्वार खोल दूंगा, और सभी पितरों को मैं 15 दिन के लिए, पृथ्वी पर, अपने-अपने वंशजों के घर जाने की अनुमति दूंगा, ताकि वे स्वयं देख सकें, कि उनका वंशज उन्हें याद कर रहा है या नहीं, उनका श्राद्ध कर रहा है या नहीं।"
🛟इसे ऐसे समझिए, जैसे जेल में कैदियों को, साल में एक बार, अपने घर जाने के लिए पैरोल मिलती है। वैसे ही, यमराज, पितरों को 15 दिन की पैरोल देते हैं, धरती पर आने की।
🛟और इसीलिए, पितृपक्ष में भगवान, पितरों को आदेश देते हैं - "गच्छ, वत्स, पृथ्वी पर जाओ, देखो तुम्हारे पुत्र तुम्हें याद करते हैं या नहीं।"
🛟यदि वंशज श्राद्ध करता है, तर्पण करता है, ब्राह्मण को भोजन कराता है, तो पितर तृप्त होकर, आशीर्वाद देकर वापस जाते हैं। और यदि वंशज नहीं करता, भूल जाता है, तो पितर निराश होकर, भूखे-प्यासे, रोते हुए, वापस पितृलोक चले जाते हैं, और श्राप दे जाते हैं।
🌺चौथा अध्याय
👉🏻 तीन पौराणिक कथाएं, जो इसका प्रमाण हैं
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1. महाभारत की कर्ण की कथा👇🏻
💕 आप सब जानते हैं, कर्ण, कुंती का पुत्र था, पर दानवीर था, वह सोना, चांदी, हीरे-मोती, सब दान करता था, पर उसने कभी अन्न का दान नहीं किया था। जब कर्ण युद्ध में मारा गया, और स्वर्ग में गया, तो उसे खाने के लिए सोना-चांदी दिया गया। कर्ण ने इंद्र से पूछा, मैं सोना कैसे खाऊं। इंद्र ने कहा, तुमने जीवन भर सोना दान किया, अन्न दान कभी नहीं किया, इसलिए तुम्हें यही मिलेगा। कर्ण ने कहा, मुझे तो पता ही नहीं था कि मेरे पितर कौन हैं, इसलिए मैंने पितरों के नाम का श्राद्ध कभी नहीं किया। तब इंद्र ने कृपा करके, कर्ण को 15 दिन के लिए, पृथ्वी पर वापस भेजा, और कहा, जाओ, इन 15 दिनों में अन्न दान करो, अपने पितरों का श्राद्ध करो। वही 15 दिन, पितृपक्ष कहलाए। कर्ण ने धरती पर आकर, गरीबों को अन्न दान किया, पितरों का तर्पण किया, और फिर उसे स्वर्ग में अन्न मिला। यह कथा इस बात का प्रमाण है कि स्वयं देवता भी चाहते हैं, कि पितर 15 दिन धरती पर आकर, अन्न प्राप्त करें।💯
शेष भाग आगे.......
🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏
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💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~*अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️




