*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 24 अक्टूबर 2026*
*🎈वार- शनिवार*
*🎈मास - आश्विन मास*
*🎈पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-त्रयोदशी - 01:36 पी एम तक तत्पश्चात चतुर्दशी*
*🎈नक्षत्र- उत्तर भाद्रपद - 08:32 पी एम तक तत्पश्चात रेवती*
*🎈करण- तैतिल - 01:36 पी एम तक तत्पश्चात् गर,वणिज *
*🎈योग- व्याघात - 08:01 पी एम तक तत्पश्चात्,हर्षण*
*🎈राहुकाल- 09:30 ए एम से 10:55 ए एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈 पञ्चक- पूरे दिन*
*🎈सूर्योदय- 06:41.03. ए एम*
*🎈सूर्यास्त- 05:57.01 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- कुंभ till 03.02.55 तत्पश्चात मीन*
*🎈सूर्य राशि- तुला*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:58 ए एम से 05:49 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 11:56 ए एम से 12:42 पी एम*
*🎈अमृत काल- 03:50 पी एम से 05:24 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -11:54 पी एम से 12:45 ए एम, अक्टूबर 24*
*🎈 रवि योग- 06:40 ए एम से 12:56 पी एम*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण- 🏵️ ☀️
☀️☀️24 अक्टूबर 2026 त्रयोदशी व्रत 🏓🏓🏓
👁️"विष्णु भगवान की जय हो "🙏 🌹
💢.ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, त्रयोदशी तिथि के दिन बैंगन खाना वर्जित (मना) माना गया है।।
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
★√*★√*★√*★√*★√*★
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼
💢धर्मपत्नी के भाई को साला क्यों कहते हैं ?
👉साला शब्द की रोचक जानकारी:-
हम प्रचलन की बोलचाल में साला शब्द को एक "गाली" के रूप में देखते हैं साथ ही "धर्मपत्नी" के भाई/भाइयों को भी "साला", "सालेसाहब" के नाम से इंगित करते हैं।
💞"पौराणिक कथाओं" में से एक "समुद्र मंथन" में हमें एक जिक्र मिलता है, मंथन से जो 14 दिव्य रत्न प्राप्त हुए थे वो :
कालकूट (हलाहल), ऐरावत, कामधेनु, उच्चैःश्रवा, कौस्तुभमणि, कल्पवृक्ष, रंभा (अप्सरा), महालक्ष्मी, शंख (जिसका नाम साला था!), वारुणी, चन्द्रमा, शारंग धनुष, गंधर्व, और अंत में अमृत।
💞"लक्ष्मीजी" मंथन से "स्वर्ण" के रूप में निकली थी, इसके बाद जब "साला शंख" निकला, तो उसे लक्ष्मीजी का भाई कहा गया!
💞दैत्य और दानवों ने कहा कि अब देखो लक्ष्मीजी का भाई साला (शंख) आया है ..
💞तभी से ये प्रचलन में आया कि नव विवाहिता "बहु" या धर्मपत्नी जिसे हम "गृहलक्ष्मी" भी कहते है, उसके भाई को बहुत ही पवित्र नाम साला"कह कर पुकारा जाता हैं।
💞समुद्र मंथन के दौरान "पांचजन्य साला शंख" प्रकट हुआ, इसे भगवान विष्णु ने अपने पास रख लिया।
इस शंख को "विजय का प्रतीक" माना गया है, साथ ही इसकी ध्वनि को भी बहुत ही शुभ माना गया है।
‼️विष्णु पुराण के अनुसार *माता लक्ष्मी समुद्रराज की पुत्री हैं तथा शंख उनका सहोदर भाई है। अतः यह भी मान्यता है कि जहाँ शंख है, वहीं लक्ष्मी का वास होता है। इन्हीं कारणों से हिन्दुओं द्वारा पूजा के दौरान शंख को बजाया जाता है।
💕जब भी धन-प्राप्ति के उपाय करो " शंख" को कभी नजर अंदाज ना करे, लक्ष्मीजी का चित्र या प्रतिमा के नजदीक रखें।
जब भी किसी जातक का साला या जातिका का भाई खुश होता है तो ये उनके यहाँ "धन आगमन" का शुभ सूचक होता है और इसके विपरीत साले से संबंध बिगाड़ने पर जातक घोर दरिद्रता का जीवन जीने लगता है।
😜अतः साले साहब को सदैव प्रसन्न रखें, लक्ष्मी स्वयं चलकर आपके घर दस्तक देगी और है तो बनी रहेगी !!
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🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏
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💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
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*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
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*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
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