Type Here to Get Search Results !

पञ्चाङ्ग 27 अक्टूबर 2026

*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
JYOTISH


*🎈दिनांक  27 अक्टूबर 2026*
*🎈वार-    मंगलवार*
*🎈मास - आश्विन मास*
*🎈पक्ष -  कृष्ण पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-प्रतिपदा - 07:01 ए एम तक तत्पश्चात द्वितीया*
*🎈नक्षत्र- भरणी - 03:39 पी एम तक तत्पश्चात कृतिका*
*🎈करण-    कौलव - 07:01 ए एम तक तत्पश्चात्  तैतिल, गर,वाणिज्य*
*🎈योग-    सिद्धि - 10:53 ए एम तक तत्पश्चात् व्यतिपात*
*🎈राहुकाल- 03:07 पी एम से 04:31 पी एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)* 
*🎈सूर्योदय- 06:42 ए एम*
*🎈सूर्यास्त- 05:56 पी एम*
*🎈चंद्र राशि-मेष - 09:06 पी एम तक तत्पश्चात् वृषभ*
intiriyar


*🎈सूर्य राशि- तुला*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
hero

pawan


*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:00 ए एम से 05:51 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 11:56 ए एम से 12:41 पी एम*
*🎈अमृत काल-    11:15 ए एम से 12:43 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -11:53 पी एम से 12:45 ए एम, अक्टूबर 28*
*🎈 रवि योग- 06:40 ए एम से 07:22 पी एम*
*🎈त्रिपुष्कर योग    03:39 पी एम से 04:06 ए एम, अक्टूबर 28*
*🎈सर्वार्थ सिद्धि योग    03:39 पी एम से 06:42 ए एम, अक्टूबर 28*

*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-  🏵️ ☀️
☀️☀️26 अक्टूबर 2026 व्रत 🏓🏓🏓
👁️"विष्णु भगवान की जय हो "🙏 🌹

🏓🏓26 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को चंद्रमा का गोचर मेष राशि में हो रहा है और विभिन्न ग्रहों (बुध वक्री, शुक्र वक्री, गुरु और मंगल सिंह राशि में) 

💢.ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, प्रतिपदा तिथि के दिन कूष्माण्ड (कुम्हड़ा या पेठा) खाना वर्जित है।
kundli


  
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
     🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
       *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day



          🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
★√*★√*★√*★√*★√*★
     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
   
  ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼 
           💢कार्तिक मास‼️

‼️ आकाश दीप का महत्व‼️

🛟नमः पितृभ्यः प्रेतेभ्यो नमो धर्माय विष्णवे ।
 नमो यमाय रुद्राय कान्तारपतये नमः ॥

💥पितरों को नमस्कार है, प्रेतों को नमस्कार है, धर्मस्वरूप विष्णु को नमस्कार है, यमराज को नमस्कार है तथा दुर्गम पथ में रक्षा करनेवाले भगवान् रुद्रको नमस्कार है।

◆कार्तिक मास में दीपदान करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

◆इस महीने में आकाश दीप के विधान से पितरों की राह आलोकित होती है।

◆कार्तिक मास में आकाश दीप से यमराज का दर्शन नहीं करना पड़ता।

◆कार्तिक मास में आकाश दीप जलाने से पितरों को तृप्ति मिलती है।

💥एकादशी से, तुला राशि के सूर्य से अथवा पूर्णिमा से लक्ष्मी सहित भगवान् विष्णु की प्रसन्नता के लिये आकाशदीप प्रारम्भ करना चाहिये।

💥ऊपर दिए इस इस मन्त्र से जो मनुष्य पितरों के लिये आकाश में दीपदान करते हैं, उनके वे पितर नरक में हों तो भी उत्तम गति को प्राप्त होते हैं। जो देवालय में, नदी के किनारे, सड़क पर तथा नींद लेने के स्थान में दीप देता है, उसे अष्टलक्ष्मी  प्राप्त होती हैं।

🗡️ "या तो आज तू दर्शन दे, या मैं काट लूंगा अपनी गर्दन!" जानें रामकृष्ण परमहंस की उस अनोखी पूजा का रहस्य जिसने पत्थर को भी पिघला दिया। ✨

"प्रेम मानता ही नहीं औपचारिकता"
यह कहानी है दक्षिणेश्वर के भव्य मंदिर की, जिसे रानी रासमणि ने बनवाया था। रासमणि शूद्र थीं, इसलिए उस दौर में कोई भी ब्राह्मण उनके मंदिर में पूजा करने को राजी नहीं हुआ। मंदिर बनकर तैयार था, लेकिन सालों तक सूना पड़ा रहा। लोग कहते, "शूद्र के मंदिर में कौन ब्राह्मण पूजा कर अपनी बदनामी कराए?"
तभी एक युवा ब्राह्मण आगे आया। उसने कहा, "मैं करूँगा पूजा।" वे कोई और नहीं, श्री रामकृष्ण परमहंस थे!
रामकृष्ण कोई साधारण पुरोहित नहीं थे; वे काली के दीवाने प्रेमी थे। उनकी पूजा का ढंग ऐसा था कि ट्रस्टी और लोग हैरान रह गए:
🚪 कभी मंदिर में लगा देते ताला:
वे कभी-कभी दिनों तक मंदिर का ताला नहीं खोलते थे। पूछने पर कहते— "पड़ी रहने दो काली को भीतर! भुगतने दो उसे भी। मैं उसके विरह में तड़पता हूँ, तो उसे भी मेरी याद में तड़पने दो।"
🍲 जूठा भोग लगाते:
वे माँ काली को भोग लगाने से पहले खुद प्रसाद चखते थे। जब रानी रासमणि ने घबराकर पूछा कि यह कैसी पूजा है, तो परमहंस ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया— "मेरी माँ भी मुझे खाना खिलाने से पहले चखती थी। अगर प्रसाद में शक्कर कम हुई या कच्चा हुआ तो? मैं अपनी माँ (काली) को बिना परखे कुछ भी कैसे खिला दूँ?"
🗡️ जब उठा ली तलवार:
एक दिन उनकी व्याकुलता अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई। पूजा के कोई बंधे-बंधाए नियम तो थे नहीं। उन्होंने माँ काली के पास रखी तलवार उठा ली और बोले— "आज या तो तू, या मैं! रोज-रोज की क्या लगा रखी है? या तो दर्शन दे, या आज मैं अपनी गर्दन काट लूंगा!"
लोग डर के मारे बाहर भाग गए। रामकृष्ण ने गिनती शुरू की— एक... दो... तीन!
अगर तीसरे पल बात न बनती, तो वे सच में गर्दन काट लेते। लेकिन ठीक तीसरे पल, वह पत्थर की मूर्ति विदा हो गई और उसकी जगह साक्षात्, जीवंत परमात्मा का आविर्भाव हो गया! तलवार उनके हाथ से छूट गई और वे घंटों उस परमानंद के सागर में डूबे रहे।
✨ सार:
ईश्वर कोई स्कूल का शिक्षक नहीं है जो आपके मंत्रों की व्याकरण जाँचेगा। परमात्मा को ना संस्कृत से मतलब है, ना किसी और भाषा से। वह सिर्फ आपका 'भाव' समझता है। अगर आप चुपचाप मौन भी खड़े हो जाएं, तो भी वह आपकी पुकार सुन लेगा। क्योंकि प्रेम का अपना कोई बंधा-बंधाया ढांचा नहीं होता।
"रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय..." ❤️🙏




🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏
🧨🚩⛳💥❤️🕉️🌴🍀🎈🌀🌿
💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
  ✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
           *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹          

 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
♨️  ⚜️ 🕉🌞  🌞🕉 ⚜🚩*♥️💕💥*अगर आपको हमारा पंचांग नियमित चाहिए तो आप मुझे इस चैनल को फॉलो करे*
*https://whatsapp.com/channel/0029Va65aSaKrWR*
      ♨️  ⚜️ 🕉🌞  🌞🕉 ⚜🚩
🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ

*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~*अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न, रुद्राक्ष, वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे उसके बाद उपयोग करे।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय  बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
vipul


*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️
Tags

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Below Post Ad