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*मकर सक्रांति के बारे में जानते है रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश प्रेमजी से*

  *मकर सक्रांति के बारे में जानते है रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश प्रेमजी से* 


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मकर संक्रांति पर्व १४ जनवरी को आस्था के साथ मनाया जाएगा।
माघ मास में जब सूर्यदेव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस दिन मकर संक्राति का त्यौहार मनाया जाता है। 
उत्तरायण शुरू होने के साथ ही खरमास समाप्त हो जाता है, इस दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। मकर संक्रांति से ही ऋतु में परिवर्तन होने लगता है, शरद ऋतु क्षीण होने लगती है और बसंत का आगमन शुरू हो जाता है। 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। चूंकि शनि मकर व कुंभ राशि के स्वामी है। इसलिए यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जुड़ा है।

मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं, सूर्य का उत्तरायण होना बेहद शुभ माना जाता है। 

पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान करने पर सभी कष्टों का निवारण होता है, इसीलिए इस दिन तीर्थ या गंगा में स्नान और दान करने की प्राचीन परंपरा है।
*तीर्थों में स्नान व सूर्य उपासना का महत्व प्रात:काल से मान्य, लेकिन संक्रांति का  पुण्य काल अपराह्न से सूर्यास्त तक  रहेगा*
 सूर्य उपासना का पर्व मकर संक्रांति इस बार माघ कृष्ण एकादशी बुधवार 14 जनवरी को बुधवार को मनाई जाएगी।
 इस दिन मल मास समाप्त होंगे,तथा इस दिन से मांगलिक कार्य शुरू हो जाते है,लेकिन इस बार 2 फरवरी तक शुक्र तारा अस्त होने के कारण मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। इस बार संक्रांति के दिन षट्तिला एकादशी व्रत भी है। इसलिए तिल का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा। बुधवार 14 जनवरी को अपराह्न 03 बजकर 07 मिनट पर सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ सूर्यदेव उत्तरायण हो जायेंगे एवं मलमास भी समाप्त हो जायेंगे। मकर संक्रान्ति का पर्व 14 जनवरी 2026 को ही मनाया जायेगा एवं इसका पुण्यकाल अपराह्न से सूर्यास्त तक रहेगा।इसी दिन स्नान -दान का महत्व रहेगा।इस दिन सूर्य उपासना करनी चाहिए।इस दिन तिल व तिल से बनी वस्तुओं का दान किया जाता है।साथ ही जरूरत मंद लोगों को सर्दी से बचाने हेतू काष्ठ व ऊनी वस्त्र व कम्बल देना चाहिए।लेकिन खिचड़ी का दान दूसरे दिन द्वादशी को किया जा सकता है। इस बार संक्रांति शरीर पर कुमकुम का लगाकर पीले वस्त्र धारण कर जाति के फूलों की माला धारण किए हुए हाथ में गदा लेकर चांदी के पात्र में खीर का भोजन करती हुई कुमारी अवस्था में रहेगी।संक्रांति का वाहन बाघ एवं उप वाहन घोड़ा रहेगा।यह संक्रांति 30 मुहूर्त रहेगी।
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