*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 13 मई 2026*
*🎈 वार- बुधवार *
*🎈 मास - ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - एकादशी 13:29:23 तत्पश्चात् द्वादशी*
*🎈 नक्षत्र - उत्तरभाद्रपदा 24:16:41*
तक तत्पश्चात् रेवती*
*🎈योग - विश्कुम्भ 20:53:50* तक तत्पश्चात् प्रीति*
*🎈करण - बालव 13:29:23* तक तत्पश्चात् कौलव*
*🎈राहुकाल - 12:32pm से 02:12pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि - कुम्भ*
*🎈चन्द्र राशि - मीन*
*🎈सूर्य राशि - मेष*
*🎈 सूर्योदय - 05:49:29*
*🎈 सूर्यास्त - 19:13:45*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:24 ए एम से 05:06 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं*
*🎈अमृत काल- 07:41 पी एम से 09:13 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:10 ए एम, मई 14 से 12:52 ए एम, मई 14*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण ekafashi व्रत आज होगा (मासिक व्रत )*
*🎈विशेष - एकादशी के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- जेष्ठ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💥सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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🔱🌹🌸 🌹सीता जी अपनी विरह वेदना हनुमान जी से सुनाते हुए कहतीं हैं कि हे हनुमान जब से निशाचर हरण करके ले आया है तब से मुझे न तो दिन में चैन है और न रात्रि में नींद ही आती है, निरंतर मेरे नैनों से जल बरसते रहता है। हे पुत्र क्या स्वामी कभी मेरी याद करते हैं या मुझे भूल गए हैं? कब इस पीड़ा से मुझे मुक्त करेगें? कब मैं स्वामी के श्यामल शरीर को देखूँगी ? कहती हैं कि हे हनुमान दिन रात स्वामी के विरह में मेरा शरीर जलते रहता है। मैं अब तक अपना प्राण इसीलिए रखी हूँ कि एक दिन प्रभु अवश्य आएगें, मैं अग्नि और वायु को साक्षी रख कर यह बात कह रही हूँ। इसी प्रसंग पर प्रस्तुत है मेरी ये रचना :-----
अब कवन चूक हम कियो कपी ,
बिसराय दियो रघुबीर ।
जब से निशिचर हरि लेइ आयो ,
दिन नहिं चैन रैन न सुहायो ,
लोचन बरसत नीर कपी ,
बिसराय दियो रघुबीर ।
अब कवन चूक हम कियो कपी.........
किय मोरि सुधि कभी लिन्हि प्रानपति ,
किय मोहे बिसराय दियो कपि ,
कब हरीहैं मोरे पीर कपी ,
बिसराय दियो रघुबीर ।
अब कवन चूक हम कियो कपी.........
कब देखिहौं राजीव नयन को ,
बरसत लोचन स्वामि अयन को ,
जरत विरह में शरीर कपी ,
बिसराय दियो रघुबीर ।
अब कवन चूक हम कियो कपी.........
राख्यो प्रान एही असरन्ह कपि ,
ऐहैं एक दिन मोरे प्रानपति ,
साखी अनल समीर कपी ,
बिसराय दियो रघुबीर ।
अब कवन चूक हम कियो कपी.........
अयन = घर , अनल = अग्नि , समीर = वायु
रचनाकार
ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्र
🙇 #जयश्रीसीताराम 🙇
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱




