*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 14 मई 2026*
*🎈 वार- गुरुवार *
*🎈 मास - ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - द्वादशी 11:20:04 तत्पश्चात्
*🎈 त्रयोदशी 08:30:45*
*🎈तिथि चतुर्दशी 29:10:35*(क्षय )*
*🎈 नक्षत्र - रेवती 22:33:04*
तक तत्पश्चात् अश्विनी*
*🎈योग - प्रीति 17:52:31* तक तत्पश्चात् आयुष्मान*
*🎈करण - तैतुल 11:20:04* तक तत्पश्चात् गर*
*🎈राहुकाल - 02:12pm से 03:52pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि - मीनtill 22:33:04
*🎈चन्द्र राशि- मेष from 22:33:04
*🎈सूर्य राशि- मेष *
*🎈 सूर्योदय - 05:48:22*
*🎈 सूर्यास्त - 19:14:53*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- दक्षिण दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:23 ए एम से 05:05 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:05 पी एम से 12:59 पी एम*
*🎈अमृत काल- 08:20 पी एम से 09:49 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:10 ए एम, मई 15 से 12:52 ए एम, मई 15*
*🎈 सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण द्वादशी व्रत आज होगा (मासिक व्रत )*
*🎈विशेष - dawadashi के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- जेष्ठ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💥सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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🔱🌹🌸 🌹महाशक्तिशाली श्रीगणपति मालामंत्र साधना!!
यह एक सिद्ध माला मंत्र है, आप इसे नित्य पूजन मे एक या दो बार पाठ कर सकते है, या समस्या समाधान हेतु इसका 51 या 108 पाठ संकल्प करके कर सकते हैं।
ॐ क्लीं ह्रीं श्रीं ऐं ग्लौं ॐ ह्रीं क्रौं गं ॐ नमो भगवते महागणपतये स्मरणमात्रसंतुष्टाय सर्वविद्याप्रकाशकाय सर्वकामप्रदाय भवबंधविमोचनाय ह्रीं सर्वभूतबंधनाय क्रों साध्याकर्षणाय क्लीं जगतत्रयवशीकरणाय सौ: सर्वमनक्षोभणाय श्रीं महासंपत्प्रदाय ग्लौं भूमंडलाधिपत्यप्रदाय महाज्ञानप्रदाय चिदानंदात्मने गौरीनंदनाय महायोगिने शिवप्रियाय सर्वानंदवर्धनाय सर्वविद्याप्रकाशनप्रदाय द्रां चिरंजिविने ब्लूं सम्मोहनाय ॐ मोक्षप्रदाय ! फट वशी कुरु कुरु! वौषडाकर्षणाय हुं विद्वेषणाय विद्वेषय विद्वेषय ! फट उच्चाटय उच्चाटय ! ठ: ठ: स्तंभय स्तंभय ! खें खें मारय मारय ! शोषय शोषय ! परमंत्रयंत्रतंत्राणि छेदय छेदय ! दुष्टग्रहान निवारय निवारय ! दु:खं हर हर ! व्याधिं नाशय नाशय ! नम: संपन्नय संपन्नय स्वाहा ! सर्वपल्लवस्वरुपाय महाविद्याय गं गणपतये स्वाहा !
यन्मंत्रे क्षितलांछिताभमनघं मृत्युश्च वज्राशिषो भूतप्रेतपिशाचका: प्रतिहता निर्घातपातादिव ! उत्पन्नं च समस्तदु:खदुरितं उच्चाटनोत्पादकं वंदेsभीष्टगणाधिपं भयहरं विघ्नौघनाशं परम ! ॐ गं गणपतये नम:।
ॐ नमो महागणपतये, महावीराय, दशभुजाय, मदनकाल विनाशन, मृत्युं हन हन, यम यम, मद मद, कालं संहर संहर, सर्व ग्रहान चूर्णय चूर्णय, नागान मूढय मूढय, रुद्ररूप, त्रिभुवनेश्वर, सर्वतोमुख हुं फट स्वाहा !
ॐ नमो गणपतये, श्वेतार्कगणपतये, श्वेतार्कमूलनिवासाय, वासुदेवप्रियाय, दक्षप्रजापतिरक्षकाय, सूर्यवरदाय, कुमारगुरवे, ब्रह्मादिसुरावंदिताय, सर्पभूषणाय, शशांकशेखराय, सर्पमालालंकृतदेहाय, धर्मध्वजाय, धर्मवाहनाय, त्राहि त्राहि, देहि देहि, अवतर अवतर, गं गणपतये, वक्रतुंडगणपतये, वरवरद, सर्वपुरुषवशंकर, सर्वदुष्टमृगवशंकर, सर्वस्ववशंकर, वशी कुरु वशी कुरु, सर्वदोषान बंधय बंधय, सर्वव्याधीन निकृंतय निकृंतय, सर्वविषाणि संहर संहर, सर्वदारिद्र्यं मोचय मोचय, सर्वविघ्नान छिंदि छिंदि, सर्ववज्राणि स्फोटय स्फोटय, सर्वशत्रून उच्चाटय उच्चाटय, सर्वसिद्धिं कुरु कुरु, सर्वकार्याणि साधय साधय, गां गीं गूं गैं गौं गं गणपतये हुं फट स्वाहा !
ॐ नमो गणपते महावीर दशभुज मदनकालविनाशन मृत्युं हन हन, कालं संहर संहर, धम धम, मथ मथ, त्रैलोक्यं मोहय मोहय, ब्रह्मविष्णुरुद्रान मोहय मोहय, अचिंत्य बलपराक्रम, सर्वव्याधीन विनाशाय, सर्वग्रहान चूर्णय चूर्णय, नागान मोटय मोटय, त्रिभुवनेश्वर सर्वतोमुख हुं फट स्वाहा !
ॐ गं गणपतये नमो नमः।।
🙇 #जयश्रीसीताराम 🙇
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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‼️अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱





