*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 24 जून 2026*
*🎈 वार- बुधवार*
*🎈 मास - ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - दशमी 18:11:41*
*तत्पश्चात निर्जला एकादशी*
*🎈 नक्षत्र - चित्रा 13:58:08 तक* तत्पश्चात् स्वाति*
*🎈योग - परिघ 10:22:00* तक तत्पश्चात् शिव*
*🎈करण- गर 18:11:41 तक तत्पश्चात् तैतुल*
*🎈राहुकाल -12:37pm से 02:21 pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि- तुला*
*🎈सूर्य राशि- मिथुन*
*🎈 सूर्योदय - 05:43:08*
*🎈 सूर्यास्त - 19:31:49*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:21 ए एम से 05:01 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त* कोई नहीं*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:17 ए एम, जून 24 से 12:58 ए एम, जून 24*
*🎈 रवि योग -रवि योग पूरे दिन*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण. ब्रह्मवैवर्त पुराण (विशेषकर ब्रह्म खंड) के अनुसार, दशमी तिथि को 'कलम्बी' नामक साग का सेवन निषेध माना गया है। इसके अतिरिक्त, यदि आप एकादशी व्रत का पालन कर रहे हैं, तो दशमी तिथि को लहसुन, प्याज, मसूर की दाल, शहद, गाजर और बासी भोजन नहीं करना चाहिए।
*🎈विशेष - दशमी व्रत*
*🎈विशेष:- जेष्ठ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
👣🕉️ 🌹🌹 🌹🌹।। 🔶🔶🌹🌹 🌹
➡️ *।। ॐ श्री गणेशाय नमः ।।
🌺🌷🏓।। जय श्री राम ।।
॥ सर्वतोभद्र मंडल : देवताओं का दिव्य द्वार ॥
सनातन वैदिक परंपरा में यज्ञ, अनुष्ठान, देव प्रतिष्ठा, ग्रह शांति, चंडी पाठ, रुद्राभिषेक तथा सभी मांगलिक कार्यों में जिस मंडल को विशेष महत्व दिया गया है, वह है "सर्वतोभद्र मंडल"।
सर्वतोभद्र मंडल को "देवद्वार" अर्थात देवताओं के प्रवेश का द्वार कहा गया है। इसका नाम ही इसके उद्देश्य को स्पष्ट करता है—जो सभी दिशाओं से शुभता, मंगल और कल्याण प्रदान करे, वही सर्वतोभद्र है।
क्या है सर्वतोभद्र मंडल?
सर्वतोभद्र मंडल एक अत्यंत वैज्ञानिक, आध्यात्मिक एवं रहस्यमयी यज्ञीय रचना है।
धर्मशास्त्रों के अनुसार यह 324 कोष्ठकों वाला एक विशेष मंडल है, जिसमें 57 प्रमुख देवताओं, मातृशक्तियों, सप्तऋषियों, आयुधों तथा विभिन्न दिव्य शक्तियों की स्थापना की जाती है।
यज्ञ या अनुष्ठान में प्रधान देवता को मंडल के मध्य स्थित अष्टदल कमल पर स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।
माना जाता है कि इससे सम्पूर्ण देवशक्तियां जागृत होकर यजमान को आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
।। सर्वतोभद्र मंडल की संरचना ।।
इस मंडल का निर्माण 19 खड़ी तथा 19 आड़ी रेखाओं द्वारा किया जाता है, जिससे कुल 324 वर्गाकार कोष्ठक निर्मित होते हैं।
इनमें प्रमुख रूप से—
1• 12 खण्डेन्दु (श्वेत)
2• 20 कृष्ण शृंखला (काला)
3• 88 वल्ली (हरा)
4• 72 भद्र (लाल)
5 • 96 वापी (श्वेत)
6• 20 परिधि (पीला)
7• 16 मध्य कोष्ठक (लाल)
निर्मित किए जाते हैं।
मध्य भाग में अष्टदल कमल बनाया जाता है, जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा एवं दिव्य चेतना का प्रतीक माना जाता है।
सर्वतोभद्र मंडल में कौन-कौन से देवता स्थापित होते हैं?
इस दिव्य मंडल में ब्रह्मा, विष्णु, महेश, इन्द्र, अग्नि, वरुण, वायु, यम, ईशान, अष्टवसु, एकादश रुद्र, द्वादश आदित्य, अश्विनीकुमार, विश्वेदेव, सप्तयक्ष, अष्टकुलनाग, गंधर्व, अप्सराएं, स्कन्द, नन्दी, महाकाल, गणपति, मरुद्गण, पृथ्वी, सप्तगंगा, सप्तसागर, मेरु पर्वत, अष्ट आयुध, सप्तऋषि, अरुन्धती तथा अष्टमातृकाओं सहित कुल 57 देवताओं एवं दिव्य शक्तियों का आवाहन किया जाता है।
।। इस मंडल का आध्यात्मिक महत्व ।।
1• सभी दिशाओं की शुभ ऊर्जा को आकर्षित करता है।
2• यज्ञ एवं अनुष्ठान को पूर्णता प्रदान करता है।
3• देवशक्तियों का आवाहन एवं स्थापन करता है।
4 • वास्तुदोष एवं ग्रहबाधा शमन में सहायक माना गया है।
5 • यजमान के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
6• आध्यात्मिक उन्नति एवं वातावरण की पवित्रता बढ़ाता है।
किन-किन कार्यों में प्रयोग होता है?
सर्वतोभद्र मंडल का प्रयोग प्राचीनकाल से लेकर आज तक निम्नलिखित शुभ कार्यों में किया जाता रहा है—
1• गणेश यज्ञ
2 • लक्ष्मी यज्ञ
3• रुद्र यज्ञ
4• सूर्य यज्ञ
5. ग्रह शांति
6• पुत्रेष्टि यज्ञ
7• गायत्री यज्ञ
8• श्रीमद्भागवत महायज्ञ
9• चंडी, नवचंडी, शतचंडी
10 • सहस्रचंडी, लक्षचंडी, कोटिचंडी
11• देव प्रतिष्ठा एवं प्राण प्रतिष्ठा
12• गृह प्रवेश एवं मांगलिक संस्कार
क्यों कहा जाता है इसे देवद्वार?
शास्त्रों के अनुसार सर्वतोभद्र मंडल केवल एक ज्यामितीय आकृति नहीं है, बल्कि देवताओं के अवतरण एवं उनकी दिव्य उपस्थिति का माध्यम है।
इसी कारण इसे "देवद्वार" की उपाधि प्राप्त हुई है।
मान्यता है कि जहां विधिपूर्वक सर्वतोभद्र मंडल स्थापित होता है, वहां देवशक्तियों का आवाहन सहज रूप से संभव होता है और यज्ञ का पुण्यफल अनेक गुना बढ़ जाता है।
यही कारण है कि वैदिक कर्मकाण्ड में कहा गया है—
"यज्ञो वै श्रेष्ठकर्मः"
अर्थात यज्ञ सर्वोत्तम कर्म है, और सर्वतोभद्र मंडल उस यज्ञ की दिव्य आधारशिला है।
॥ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ॥
॥ सर्वतोभद्रं भवतु ॥
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" नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम् "
🛟॥ श्री हरिः ॐ ॥☀️
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
।। शुभम् भवतु।।
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
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