*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 31 मई 2026*
*🎈 वार- रविवार *
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - पूर्णिमा 14:14:10
*तत्पश्चात्* प्रतिपदा*
*🎈 नक्षत्र - अनुराधा 16:11:00* तत्पश्चात् ज्येष्ठा*
*🎈योग - सिद्ध 30:18:10* तक तत्पश्चात् सिद्ध*
*🎈करण - बव 14:14:10* तक तत्पश्चात् बालव*
*🎈राहुकाल -05:41pm से 06:24pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि - वृश्चिक*
*🎈सूर्य राशि- वृषभ *
*🎈 सूर्योदय - 05:42:17*
*🎈 सूर्यास्त - 19:23:32*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:19 ए एम से 05:00 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:05 पी एम से 01:00 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:12 ए एम, जून 01 से 12:53 ए एम, जून 01*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण. चतुर्दशी व्रत (मासिक व्रत )* दही: पूर्णिमा को दही खाना वर्जित माना जाता है।
तिल का तेल: इस दिन तिल के तेल का सेवन करने और शरीर पर लगाने से बचना चाहिए।
*🎈विशेष - ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा तिथि के दिन तिल के तेल से बनी चीजें और दही का सेवन नहीं करना चाहिए। इसे निषेध माना गया है। सेवन करने से बचना चाहिए।
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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🙏 "🧘♂️ #छठे भाव में केतु की स्थिति कई कुंडली में विचित्र रूप से शक्तिशाली मानी जाती है। क्योंकि केतु संघर्ष के प्रति भय को कम करता है, इसलिए ये लोग अपेक्षा से अधिक अराजकता सहन कर सकते हैं। माता के भाई की आर्थिक स्थिति यहाँ बिगड़ सकती है।
संकट के दौरान भावनात्मक सुन्नता
दबाव में अति-कार्यक्षमता
जहां दूसरे घबराते हैं, वहां प्रतिक्रिया न देना।
लेकिन एक छिपा हुआ मुद्दा: शरीर के ध्यान देने के लिए मजबूर होने तक स्वास्थ्य की अनदेखी करना। (इससे ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं जिनका पता डॉक्टर भी नहीं लगा सकते)।
कार्यस्थल की गतिशीलता: वे अक्सर चुपचाप उन गड़बड़ियों को संभालते हैं जिनसे दूसरे बचने की कोशिश करते हैं।
दुश्मन? कभी-कभी तो उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वियों का पता भी नहीं चलता।
#सातवें भाव में केतु होने से रिश्ते कर्मों की कक्षा बन जाते हैं। इसका यह अर्थ नहीं है कि विवाह संभव नहीं है।
लेकिन इससे अक्सर अजीबोगरीब साझेदारी के विषय सामने आते हैं:
भावनात्मक रूप से अनुपलब्ध साथी
रिश्तों में भी अकेलापन महसूस करना
अचानक अलगाव
प्रतिबद्धता भ्रम
भावनात्मक अंतरंगता को पूरी तरह से ग्रहण करने में कठिनाई
यह एक आम भावना है: "मैं साझेदारी चाहता था... लेकिन अब करीबी क्यों असहज महसूस होती है?"
कुछ लोग अपरंपरागत लोगों से शादी करते हैं। कुछ लोग गहरा प्यार करने के बावजूद भावनात्मक रूप से दूर हो जाते हैं। व्यावसायिक साझेदारियों में भी सावधानी बरतने की जरूरत है।
#आठवें भाव में केतु: इस स्थिति में व्यक्ति जीवन को अलग नजरिए से देखता है। भले ही वह सामान्य व्यवहार करे। मनोविज्ञान, छिपे हुए सत्य, वर्जित विषय, ज्योतिष, मृत्यु, आघात, तंत्र-मंत्र, मानवीय अंधकार - ये विषय उन्हें पहले की तरह भयभीत नहीं करते।
जीवन में गहरे बदलाव लाने की क्षमता हो सकती है।
अचानक अंत
भावनात्मक पुनर्जन्म चक्र
विश्वास के मुद्दे
तीव्र अंतर्ज्ञान
ऐसा महसूस होना कि कोई भी आपकी आंतरिक दुनिया को पूरी तरह से नहीं समझता।
कई पुरानी आत्माओं को यहाँ से प्रेरणा मिलती है। लेकिन शांति? अपने आप नहीं मिलती।
#नौवें भाव में केतु होने से आस्था जटिल हो जाती है।
हमेशा विद्रोह ही नहीं। कभी-कभी खालीपन भी। (पिताजी यहाँ बेहद धार्मिक हो सकते हैं)
वह व्यक्ति पूरी तरह से विश्वास करना छोड़ सकता है... फिर कई वर्षों बाद बिल्कुल अलग तरीके से आध्यात्मिक रूप से फिर से जुड़ सकता है।
पिता/गुरु से संबंधित विषय कर्मिक दृष्टि से अपूर्ण प्रतीत हो सकते हैं:
अनुपस्थिति
भावनात्मक दूरी
वैचारिक बेमेल
मार्गदर्शन देर से आ रहा है
मन में उठने वाली एक आम भावना: "पारंपरिक जवाब अब मुझे संतुष्ट नहीं करते।" विदेश में बसना संभव है, लेकिन यह आकर्षक होने के बजाय भावनात्मक रूप से एकाकीपन भरा होता है।
#दसवें भाव में केतु का प्रभाव: करियर में अलगाव। (या नौकरी में लगातार बदलाव, यहां तक कि क्षेत्र में भी पूर्ण परिवर्तन)।
आलस्य नहीं। ये अलग बात है। उपलब्धि तो मिलती है...लेकिन संतुष्टि स्थायी नहीं होती।
अचानक करियर की दिशा बदलना
ऐसी नौकरियां छोड़ देना जिन्हें दूसरे लोग खुशी-खुशी करते रहना चाहते।
प्रतिष्ठा के खेल से अलग-थलग महसूस करना
सफलता प्राप्त करने के तुरंत बाद उस पर सवाल उठाना
क्लासिक पल: किसी चीज़ के लिए सालों मेहनत की…मिल गई…लेकिन कोई एहसास नहीं हुआ। सत्ता का समीकरण भी कभी-कभी अजीब सा लगता है।
#ग्यारहवें भाव में केतु: यह सामाजिक जुड़ाव को बदलता है।
बड़े नेटवर्क मौजूद हो सकते हैं। लेकिन क्या सच में कोई भावनात्मक जुड़ाव है? यह एक सवालिया निशान है।
बहुत सारे जान-पहचान वाले, लेकिन असल लोग बहुत कम।
सामाजिक अलगाव के चरण
अचानक दोस्तों के दायरे से बाहर निकल जाना
असामान्य लाभ पैटर्न (अप्रत्याशित लाभ / लाभ से असंबद्ध)
इच्छा ही भ्रम पैदा कर देती है। उन्हें जो चाहिए था वो मिल जाता है... फिर उन्हें परवाह नहीं रहती।
#बारहवें भाव में केतु: यह गहन प्रभाव डालता है। नींद, सपने, अवचेतन मन, एकांत, आध्यात्मिकता, अदृश्य भावनात्मक प्रक्रियाएं। ऐसे लोगों को अक्सर अपनी स्वीकारोक्ति से कहीं अधिक एकांत की आवश्यकता होती है। उन्हें मदद मांगना मुश्किल लगता है।
स्पष्ट सपने
अजीब अंतर्ज्ञान
भीड़ भरे कमरों में भी मानसिक रूप से खो जाना
बिना किसी स्पष्ट कारण के भावनात्मक थकावट
पलायनवाद की प्रवृत्तियाँ
यह व्यक्ति अत्यंत आध्यात्मिक हो सकता है। साथ ही, वह गहरे रूप से खोया हुआ भी महसूस कर सकता है।
बहुत बड़ा अंतर है। इस पद के लिए ठोस प्रशिक्षण की सख्त जरूरत है।
केतु के बारे में आम तौर पर लोग जो गलत समझते हैं:
केतु हमेशा घर को नष्ट नहीं करता। कभी-कभी यह आपको उस घर के सामान्य अर्थ से आगे बढ़ने में मदद करता है।
लेकिन ज्ञान आने से पहले...अक्सर भ्रम की स्थिति आ जाती है।
इसीलिए केतु की स्थिति को सामान्य भाषा में समझाना अक्सर मुश्किल लगता है।
क्योंकि अनुभव सिर्फ इतना नहीं है कि “कुछ हुआ।” बल्कि यह है कि “यहाँ हमेशा कुछ न कुछ कमी सी महसूस होती है।”
ज्योतिषीय विश्लेषण शुरू होने से पहले एक महत्वपूर्ण चेतावनी: राशि की स्थिति, नक्षत्र, अंश, डिस्पोजिटर, युति, दृष्टियां, विभागीय चार्ट, दशाएं, केपी चार्ट, चलित चार्ट, संपूर्ण चार्ट संदर्भ - अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इन सभी कारकों पर विचार करना महत्वपूर्ण है। 🔱#🌷 🥥 *
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱🌿




