*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 14 जून 2026*
*🎈 वार- रविवार*
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - चतुर्दशी 12:19:05*
*तत्पश्चात् अमावस्या*-08:23:06*
*🎈तिथि प्रथमा 28:30:22*(क्षय )*
*🎈 नक्षत्र - रोहिणी 22:13:01* तत्पश्चात्
*मृगशीर्षा*
*🎈योग - रोहिणी 22:13:01* तक तत्पश्चात् शूल*
*🎈करण - शकुनी 12:19:05* तक तत्पश्चात् चतुष्पद*
*🎈राहुकाल -05:46pm से 07:29pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि- वृषभ *
*🎈सूर्य राशि- वृषभ *
*🎈 सूर्योदय - 05:41:22*
*🎈 सूर्यास्त - 19:29:21*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:19 ए एम से 04:59 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:08 पी एम से 01:03 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:15 ए एम, जून 15 से 12:56 ए एम, जून 15*
*🎈 अमृत काल- 07:26 पी एम से 08:50 पी एम*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण. ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड, अध्याय 27) के अनुसार, चतुर्दशी तिथि के दिन तिल के तेल का सेवन करना और इसे शरीर पर लगाना निषेध माना गया है。 इसके साथ ही, इस तिथि पर मांस-मदिरा और तामसिक आहार से भी पूर्णतः दूर रहने का विधान है।
*🎈विशेष - चतुर्दशी तिथि (विशेषकर शिवरात्रि) धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विशेष तिथियों पर शरीर को सात्विक रखने और कुछ विशेष वस्तुओं (जैसे तेल) के प्रयोग से बचने से आध्यात्मिक ऊर्जा और स्वास्थ्य की रक्षा होती सदाबहार है।
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
👣🕉️ 🌹🌹 🌹🌹।। 🔶🔶🌹🌹 🌹
➡️ *।। ॐ श्री गणेशाय नमः ।।
🌺🌷🏓.#👉*हनुमान कवच माला*
भगवान हनुमान के दिव्य सुरक्षा घेरे और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत शक्तिशाली आध्यात्मिक साधन है।
यह कोई साधारण माला नहीं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा, ग्रह दोष, और शारीरिक कष्टों से मुक्ति पाने का एक अचूक मंत्र-अनुष्ठान है।
हनुमान कवच माला का रहस्यपंचमुखी रूप की साधना:
हनुमान कवच माला मूल रूप से 'पंचमुखी हनुमान' से जुड़ी होती है।
उनके पांच मुख— ♦️वानर, ♦️गरुड़, ♦️वराह, ♦️हयग्रीव और ♦️नरसिंह— पांच दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और ऊर्ध्व) के समस्त दोषों और शत्रुओं का नाश करते हैं।
अदृश्य ढाल:
यह कवच कोई भौतिक ढाल नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक ऊर्जा है। इसके मंत्रों का जाप करने या सिद्ध माला धारण करने से व्यक्ति के चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा चक्र बन जाता है, जिसे कोई भी नकारात्मक शक्ति, काला जादू या तंत्र-मंत्र भेद नहीं सकता।
हनुमान जी को प्रिय माला तुलसी माला:
भगवान हनुमान को तुलसी और रुद्राक्ष अत्यधिक प्रिय हैं।
तुलसी की माला धारण करने से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और रक्त संचार बेहतर होता है।
इसे पहनने से हनुमान जी सदैव हृदय में वास करते हैं।
लाल चंदन या स्फटिक की माला:
मंत्र जप और विशिष्ट सिद्धियों के लिए लाल चंदन या स्फटिक की माला का भी प्रयोग किया जाता है।
प्रमुख लाभ और प्रभाव
शत्रु शमन:
यह गुप्त शत्रुओं के षड्यंत्र को विफल कर समाज में मान-सम्मान की रक्षा करती है।
भय व ऊपरी बाधा से मुक्ति:
रात में बुरे सपने आना, अज्ञात भय, और भूत-प्रेत या नजर दोष जैसी समस्याओं से तुरंत राहत मिलती है।
ग्रह दोष निवारण:
यह विशेष रूप से शनि की साढ़े साती, ढैय्या और राहु-केतु के अशुभ प्रभावों को शांत करने में रामबाण मानी जाती है।
साधना की विधि / दिन:
इसे आरंभ करने के लिए मंगलवार या शनिवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है।
मंत्र:
साधना के दौरान सामान्यतः 🚩ॐ श्री हनुमते नमः🚩 या पंचमुखी हनुमान मंत्र 🚩ॐ नमो भगवते विचित्रवीर हनुमते 🚩 का ११, २१ या १०८ बार माला के साथ जाप किया जाता है।
नियम:
स्नान के बाद लाल या पीले वस्त्र पहनें और हनुमान जी के सामने धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करके ही जाप शुरू करे।
यदि आप अपने जीवन में नकारात्मक ऊर्जा, कोर्ट-कचहरी के विवाद, या स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो हनुमान कवच माला आपके लिए रक्षा और शांति का मार्ग बन सकती है।
🚩♦️साभार🌹🙏🕉️✅💧$k$❤️🕉️🙏
हनुमान कवच माला मंत्र (श्री विचित्रवीर हनुमान कवच माला मंत्र) अत्यंत शक्तिशाली और चमत्कारी है। इसे 'महावीर रक्षा कवच' भी माना जाता है।
इस मंत्र का जाप जीवन के सभी संकटों, शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा करने के लिए किया जाता है।
हनुमान कवच माला मंत्र:
"ॐ नमो भगवते विचित्रवीर हनुमते प्रलयकालानलप्रभाज्वलत्प्रताप वज्रदेहाय अञ्जनीगर्भसम्भूताय प्रकटविक्रमवीर..."
(यह मंत्र का मुख्य आरंभिक भाग है। पूर्ण और विस्तृत कवच के लिए श्री हनुमान साधना पर उपलब्ध मूल पाठ का संदर्भ लें।)
सावधानी और विधिदिन और समय:
इस साधना को मंगलवार के दिन सुबह स्नान करके लाल या पीले वस्त्र धारण कर शुरू करना उत्तम माना जाता है।माला: इस मंत्र का जाप तुलसी की माला या रुद्राक्ष माला से 108 बार किया जाना चाहिए।ध्यान: मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और सटीक होना चाहिए।यदि आप अपनी विशिष्ट समस्या या मनोकामना के अनुसार सबसे उचित हनुमान मंत्र (जैसे पंचमुखी हनुमान कवच या
💢💧साभार❤️💢💧✅💧💢$k$❤️💧✅
🛟॥ श्री हरिः ॐ ॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱🌿




