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आज का पञ्चाङ्ग

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक  15 जून 2026*
*🎈 वार-  सोमवार*
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर    पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि    -    अमावस्या - 08:23 ए एम तक*
*तत्पश्चात् प्रतिपदा - 04:30 ए एम, जून 16 तक*
*🎈तिथि    प्रथमा    28:30:22*(क्षय )*
*🎈 नक्षत्र -     मृगशिरा - 07:08 पी एम तक* तत्पश्चात्  आर्द्रा*
*🎈योग    -     शूल - 08:56 ए एम तक* तक तत्पश्चात्  गण्ड*
*🎈करण    - नाग    08:23:07
*🎈करण-    किन्स्तुघ्न    18:25:38*
*🎈करण-    बव    28:30:22* तक तत्पश्चात् बालव*
*🎈राहुकाल -07:25 ए एम से 09:08 ए एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि-       वृषभ    * 08:39:52
*🎈चन्द्र राशि    -   मिथुन   08:39:52*
*🎈सूर्य राशि-       12:51:36
*🎈सूर्य राशि-       मिथुन   12:51:36    *
 मिथुन   12:51:36*
*🎈 सूर्योदय -   05:41:28*
*🎈 सूर्यास्त -        19:29:40* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:19 ए एम से 05:00 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त-  12:08 पी एम से 01:03 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:15 ए एम, जून 16 से 12:56 ए एम, जून 16*
*🎈 अमृत काल-    11:28 ए एम से 12:52 पी एम*
*🎈 अमृत सिद्धि योग-    05:40 ए एम से 07:08 पी एम*
 *🎈सर्वार्थ सिद्धि योग    -05:40 ए एम से 07:08 पी एम*
 *🎈 व्रत एवं पर्व विवरण. ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड, अध्याय 27) के अनुसार, अमावस्या  तिथि के दिन तिल के तेल का सेवन करना और इसे शरीर पर लगाना निषेध माना गया है。 इसके साथ ही, इस तिथि पर मांस-मदिरा और तामसिक आहार से भी पूर्णतः दूर रहने का विधान है।
*🎈विशेष - अमावस्या तिथि (विशेषकर शिवरात्रि) धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विशेष तिथियों पर शरीर को सात्विक रखने और कुछ विशेष वस्तुओं (जैसे तेल) के प्रयोग से बचने से आध्यात्मिक ऊर्जा और स्वास्थ्य की रक्षा होती सदाबहार है।
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💢सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    
🛟मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
kundli


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        🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
         *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day




           🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

👣🕉️ 🌹🌹 🌹🌹।। 🔶🔶🌹🌹 🌹
       ➡️ *।। ॐ श्री गणेशाय नमः ।।
    🌺🌷🏓.#👉*1. सरकारी नौकरी के कुंडली योग 

बृहत्पाराशर होराशास्त्र का प्रमाण श्लोक:  
दशमे सूर्य-भौमौ वा गुरुश्च बलसंयुतः । लग्नेशो दशमस्थश्च राज-सेवां विनिर्दिशेत् ॥  

अर्थ: यदि दशम भाव में सूर्य या मंगल स्थित हो, अथवा बृहस्पति बलवान होकर बैठा हो, और लग्न का स्वामी दशम भाव में स्थित हो, तो यह स्थिति जातक को निश्चित रूप से राज-सेवा यानी सरकारी नौकरी का संकेत देती है।

मुख्य भाव जिनका सरकारी नौकरी में सीधा संबंध है:  
`दशम भाव = कर्म, राज्य, पद, प्रतिष्ठा`। `षष्ठ भाव = नौकरी, सेवा, प्रतियोगिता, शत्रु पर विजय`। `एकादश भाव = लाभ, आय, इच्छापूर्ति`। `लग्न भाव = स्वयं का व्यक्तित्व, आत्मबल, प्रयास`।

1. सूर्य का बली होना:  
`सूर्य = राजा, सरकार, प्रशासन, उच्च अधिकारी`। यदि सूर्य दशम भाव में स्थित हो, या अपनी स्वराशि सिंह में हो, या अपनी उच्च राशि मेष में हो, या फिर लग्नेश के साथ युति करके बैठा हो, तो यह योग IAS, IPS, IRS, राज्य प्रशासनिक सेवा जैसी उच्च स्तरीय सरकारी सेवा देता है। सूर्य जितना बली होगा, पद उतना ही ऊँचा होगा।

2. मंगल का बली होना:  
`मंगल = सेना, पुलिस, भूमि, साहस, पराक्रम`। यदि मंगल दशम भाव में या षष्ठ भाव में अपनी स्वराशि मेष या वृश्चिक में स्थित हो, या अपनी उच्च राशि मकर में हो, तो जातक को पुलिस विभाग, भारतीय सेना, BDO, SDO, वन विभाग जैसे पदों की प्राप्ति होती है। मंगल प्रतियोगिता में विजय का कारक है।

3. गुरु और शनि का शुभ संबंध:  
गुरु दशम भाव में हो + शनि की शुभ दृष्टि गुरु पर हो - यह योग न्याय विभाग, शिक्षा विभाग, राजस्व विभाग, लेखा विभाग में उच्च पद दिलाता है। यहाँ शनि = जनता की सेवा, अनुशासन, स्थायित्व और गुरु = ज्ञान, पद, सम्मान का संयोग बनता है।

4. दशमेश और लग्नेश की युति:  
दशम भाव का स्वामी लग्न में हो या लग्न का स्वामी दशम भाव में हो - यह योग बताता है कि जातक अपने स्वयं के पराक्रम, मेहनत और प्रयास से राज-सेवा प्राप्त करेगा। उसे नौकरी के लिए किसी सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ती।

5. अमात्यकारक ग्रह का प्रभाव:  
जैमिनी सूत्र के अनुसार - जन्म कुंडली में आत्मकारक ग्रह के बाद दूसरा सर्वाधिक अंश वाला ग्रह अमात्यकारक कहलाता है। यदि यह अमात्यकारक ग्रह दशम भाव में या एकादश भाव में स्थित हो, तो जातक मंत्री, सचिव, मुख्य सचिव जैसे अत्यंत उच्च पदों को प्राप्त करता है।

6. सूर्य-गुरु की युति दशम भाव में:  
इसे गजकेसरी राज-योग का एक रूप माना जाता है। जब सूर्य और बृहस्पति दशम भाव में एक साथ बैठते हैं, तो जातक मंत्री स्तर, सचिव स्तर, या किसी विभाग का प्रमुख बनता है। समाज में अत्यधिक मान-सम्मान मिलता है।

सरकारी नौकरी में बाधा डालने वाले दुर्योग:  

1. दशमेश का 6, 8, 12 भाव में जाना:  
यदि दशम भाव का स्वामी छठे, आठवें या बारहवें भाव में चला जाए, तो नौकरी या तो मिलती ही नहीं है, या मिलकर बार-बार छूट जाती है। स्थिरता नहीं रहती।

2. शनि-राहु की युति दशम भाव में:  
यह शापित योग बनाता है। शनि और राहु दशम भाव में एक साथ हों तो नौकरी में बदनामी, सस्पेंशन, विजिलेंस जांच, रिश्वत का झूठा आरोप जैसी समस्याएँ आती हैं।

3. सूर्य का नीच होना और शनि से पीड़ित होना:  
यदि सूर्य अपनी नीच राशि तुला में हो और उस पर शनि की दृष्टि पड़ रही हो, तो सरकार से दंड मिलता है। नौकरी में बार-बार अपमान झेलना पड़ता है, प्रमोशन रुक जाता है।

2. सरकारी नौकरी प्राप्ति के 7 सिद्ध एवं अनुभूत अनुष्ठान

सामान्य नियम: `सभी अनुष्ठान 43 दिन तक बिना नागा किए लगातार करने हैं`। `सूर्योदय से पहले शुरू करना सर्वोत्तम है`। `श्रद्धा + निरंतर प्रयास + अनुष्ठान = सफलता का सूत्र याद रखें`।

1. आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ - सूर्य देव को बली करें  
शास्त्रीय प्रमाण: वाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड में भगवान राम ने रावण वध से पहले अगस्त्य मुनि से यह स्तोत्र सुना था।  
करने की विधि: `रविवार के दिन से प्रारंभ करें`। `प्रातः स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें`। `तांबे के लोटे में जल भरें, उसमें रोली, अक्षत और लाल रंग का फूल डालकर सूर्य नारायण को अर्घ्य दें`। `अर्घ्य देने के बाद आदित्य हृदय स्तोत्र के 3 पाठ करें`। `यह क्रम 43 रविवार तक बिना तोड़े चलाएं`।  
विशेष मंत्र: ॐ घृणि सूर्याय नमः इस मंत्र की 108 बार यानी 1 माला रोज जाप करें।  
फल: `सूर्य = सरकार का प्रत्यक्ष कारक है`। `जब सूर्य बली होता है तो सरकार की कृपा अपने आप बरसती है`। `UPSC, SSC, राज्य PSC जैसी परीक्षाओं में अद्भुत सफलता मिलती है`।

2. हनुमान अनुष्ठान - मंगल ग्रह को बली करें  
करने की विधि: `मंगलवार के दिन से शुरू करें`। `लगातार 43 दिन तक हनुमान मंदिर जाएं`। `बजरंगबली को चोला चढ़ाएं, गुड़-चना का भोग लगाएं, और एक लाल रंग का झंडा अर्पित करें`। `रोज सुंदरकांड का सम्पूर्ण पाठ करें`।  
विशेष मंत्र: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः का 108 बार जाप करें।  
फल: `मंगल = पुलिस, सेना, साहस और बल का कारक है`। `इस अनुष्ठान से दरोगा, फौज, रेलवे सुरक्षा बल, अर्धसैनिक बल की नौकरी में सफलता मिलती है`। `किसी भी प्रतियोगिता में विजय प्राप्त होती है`।

3. गणेश-बुध अनुष्ठान - परीक्षा में सफलता के लिए  
करने की विधि: `बुधवार के दिन से प्रारंभ करें`। `प्रथम पूज्य गणेश जी को 21 दूर्वा घास और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं`। `यह नियम 43 दिन तक निभाएं`।  
विशेष मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः और ॐ बुं बुधाय नमः दोनों मंत्रों की 108-108 बार माला करें।  
फल: `बुध = बुद्धि, परीक्षा, लेखन, वाणी का कारक है`। `गणेश जी = विघ्न-हर्ता हैं`। `इससे परीक्षा में प्रश्न आसानी से याद आते हैं, इंटरव्यू में वाणी का प्रभाव पड़ता है और पेपर क्लियर होता है`।

4. शिव-शनि अनुष्ठान - शनि की बाधा को हटाएं  
करने की विधि: `शनिवार के दिन से शुरू करें`। `लगातार 43 शनिवार तक पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं`। `शिवलिंग पर काले तिल अर्पित करें`।  
विशेष मंत्र: ॐ शं शनैश्चराय नमः के साथ महामृत्युंजय मंत्र की 1 माला रोज करें।  
फल: `शनि = नौकर, सेवा, देरी और न्याय का कारक है`। `शनि की कृपा से चपरासी, लेखपाल, क्लर्क स्तर से अधिकारी स्तर तक पदोन्नति मिलती है`। `नौकरी में स्थिरता आती है`।

5. दुर्गा सप्तशती अर्गला स्तोत्र का पाठ  
मुख्य श्लोक: रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥  
करने की विधि: `नवरात्रि के पहले दिन से शुरू करें`। `दुर्गा सप्तशती के अर्गला स्तोत्र का 11 पाठ रोज करें`। `यह साधना 43 दिन तक करें`।  
फल: दुर्गा = शक्ति और राज्य की अधिष्ठात्री देवी हैं`। `जयं देहि = प्रतियोगिता में जीत का आशीर्वाद`। `यशो देहि = सरकारी पद का यश और कीर्ति प्राप्त होती है।

6. गुरु-चांडाल दोष शांति - बृहस्पति को बली करें  
करने की विधि: `गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करें`। `केले के पेड़ में जल चढ़ाएं, साथ में चने की दाल और हल्दी डालें`। `43 गुरुवार तक यह करें`। `पीली मिठाई या पीले वस्त्र का दान किसी ब्राह्मण को करें`।  
विशेष मंत्र: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः की 108 बार माला जपें।  
फल: `गुरु = उच्च पद, मंत्री, प्रोफेसर, न्यायाधीश का कारक है`। `गुरु के बली होने पर सरकारी फाइल बिना किसी रुकावट के पास होती है`। `प्रमोशन के रास्ते खुलते हैं`।

7. दशरथ कृत शनि स्तोत्र - त्वरित नौकरी के लिए  
करने की विधि: `शनिवार को शाम 7 बजे के बाद शनि मंदिर जाएं`। `शनि देव को सरसों का तेल, काले तिल, और उड़द की दाल चढ़ाएं`। `दशरथ कृत शनि स्तोत्र के 11 पाठ करें`। `यह 43 दिन तक करें`।  
फल: `शनि देव प्रसन्न होकर बहुत शीघ्र नौकरी दिलाते हैं`। `यह अनुष्ठान विशेषकर रेलवे, बैंक, SSC, पुलिस भर्ती के लिए रामबाण उपाय माना गया है`।
3. विशेष शास्त्रीय टोटके - शास्त्र + लोक परंपरा

1. नौकरी का इंटरव्यू देने जाएं तो: `घर से दही और शक्कर खाकर निकलें`। `अपनी जेब में 5 तुलसी के पत्ते रखें`। `घर से निकलने से पहले सूर्य देव को अर्घ्य देकर जाएं`। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

2. सरकारी फाइल अटक रही हो तो: `अपनी ऑफिस टेबल या स्टडी टेबल पर सूर्य यंत्र और मंगल यंत्र स्थापित करें`। `रोज सुबह इन्हें धूप-दीप दिखाएं`। इससे काम में आ रही बाधा दूर होती है।

3. परीक्षा से ठीक पहले: `मंगलवार के दिन हनुमान जी के मस्तक पर लगा सिंदूर अपनी जीभ पर लगाएं`। `मान्यता है कि इससे बुद्धि तेज होती है, स्मरण शक्ति बढ़ती है और परीक्षा का डर खत्म हो जाता है`।

4. रत्न धारण: `6 मुखी रुद्राक्ष और मूंगा रत्न को तांबे की अंगूठी में जड़वाकर मंगलवार के दिन अनामिका उंगली में धारण करें`। `मंगल = पराक्रम का कारक है`। इससे प्रतियोगिता में जीत सुनिश्चित होती है।

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4. सबसे जरूरी बात - महर्षि पराशर का अटल सूत्र

ग्रहा राज्यं प्रयच्छन्ति तद्भावस्थाः सुहृद्ग्रहाः । दशायां तस्य खेटस्य राज-पदं अवाप्नुयात् ॥  

श्लोक का अर्थ: दशम भाव में स्थित मित्र ग्रह ही राज्य यानी सरकारी पद दिलाते हैं। और जब उस ग्रह की दशा-अंतर्दशा आती है, तभी जातक को राज-पद की प्राप्ति होती है।

इसलिए क्या करें:  
1. पहले कुंडली विश्लेषण: `सबसे पहले अपनी जन्म कुंडली में सूर्य, मंगल, गुरु और शनि की स्थिति को ध्यान से देखें`। `यदि दशम भाव का स्वामी निर्बल है तो पहले रत्न, रुद्राक्ष या मंत्र जाप से उसे बली करें`। बिना कुंडली देखे उपाय करना व्यर्थ है।

2. दशा-अंतर्दशा का विचार: `ध्यान रखें कि सूर्य, मंगल, गुरु, शनि या दशमेश की दशा-अंतर्दशा में ही सरकारी नौकरी लगने का योग बनता है`। `राहु की दशा में भ्रम और गलत निर्णय होते हैं, केतु की दशा में वैराग्य आता है और नौकरी छूटने का डर रहता है`।

3. अनुष्ठान + मेहनत का संतुलन: `यह सबसे महत्वपूर्ण बात है कि अनुष्ठान केवल 30% काम करता है, बाकी 70% आपकी मेहनत पर निर्भर 
         🛟॥ श्री हरिः ॐ ॥☀️

    
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹।      💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱🌿
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