*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 11 सितंबर 2026*
*🎈वार- शुक्रवार*
*🎈मास - भाद्रपद मास*
*🎈पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈अयन - उत्तरायण*
*🎈ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि- अमावस्या - 08:56 ए एम. तक तत्पश्चात प्रतिपदा*
*🎈नक्षत्र- पूर्वाफाल्गुनी - 01:16 पी एम तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी*
*🎈करण - नाग - 08:56 ए एम तक तत्पश्चात् किंस्तुघ्न*
*🎈योग- साध्य - 05:02 पी एम तक तत्पश्चात् शुभ*
*🎈राहुकाल- 10:58 ए एम से 12:32 पी एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय-06:19 ए एम*
*🎈सूर्यास्त-06:44 पी एम*
*🎈चंद्र राशि-सिंह - 07:08 पी एम तक तत्पश्चात् कन्या*
*🎈सूर्य राशि- सिंह*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:46 ए एम से 05:32 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:07 पी एम से 12:56 पी एम*
*🎈अमृत काल - 07:05 ए एम से 08:37 ए एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -12:09 ए एम, सितम्बर 12 से 12:55 ए एम, सितम्बर 12*
*🎈अमृत काल 11:47 ए एम से 01:18 पी एम*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण- भाद्रपद शुक्ल पक्ष गणेश चतुर्थी व्रत मध्याह्न व्यापिनी चतुर्थी को ग्रहण किया जाता है ,14 सितंबर को चंद्रोदय प्रातः 9:06 पर है अतः इसी दिन चतुर्थी व्रत भी होगा क्योंकि इसी दिन चतुर्थी मध्याह्नव्यापिनी है।
➡️इस दिन चंद्र दर्शन निषेध है।
🌹ब्रह्मवैवर्त पुराण के ब्रह्म खंड (27.29-34) के अनुसार, अमावस्या के दिन तामसिक भोजन (जैसे मांस, मछली, अंडा, शराब), लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, इस दिन किसी दूसरे के घर का अन्न (परात्र) खाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे हमारे पुण्य का हिस्सा अन्नदाता को चला जाता है।
🛟11 सितंबर 2026, शुक्रवार का दिन 11 सितंबर 2026 आज का राशिफल ग्रहों की चाल के अनुसार सभी 12 राशियों के लिए मिला-जुला और खास रहने वाला है। पिठोरी अमावस्या और विशेष युति के प्रभाव से कुछ राशियों को बड़ा धन लाभ व नई जिम्मेदारी मिलेगी।
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
🛟चोघडिया, दिन का🛟*
*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
★√*★√*★√*★√*★√*★
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
‼️💢आज का राशिफल💢‼️
🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️
💥 मेष: पारिवारिक खुशियां बढ़ेंगी। व्यापार में लाभ और नए प्रोजेक्ट्स में सफलता मिलेगी।
💥वृषभ: संवाद कला से उलझे मामले सुलझेंगे। प्रेम जीवन में सुखद पलों का आनंद लेंगे।
💥मिथुन: दफ्तर में मेहनत रंग लाएगी। वरिष्ठ अधिकारी आपकी काम की तारीफ करेंगे।
💥कर्क: नौकरी में पदोन्नति या बड़े प्रोजेक्ट का मौका मिलेगा। रुका हुआ धन प्राप्त हो सकता है।
💥सिंह: आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी। मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग हैं।कन्या: करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुलेंगे। बुद्ध के प्रभाव से योजनाएं सफल होंगी।
💥तुला: टीमवर्क से किए गए कार्यों में बड़ी सफलता मिलेगी। रिश्तों में संतुलन बना रहेगा।
💥वृश्चिक: पुराने संपर्कों से व्यापार आगे बढ़ेगा। फंसा हुआ धन वापस मिलने के संकेत हैं।
💥धनु: सहकर्मियों का पूरा सहयोग मिलेगा। समाज में मान-सम्मान और आकर्षण बढ़ेगा।
💥मकर: कड़े परिश्रम से अधिकारी वर्ग संतुष्ट होगा। नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
💥कुंभ: कार्यक्षेत्र में योग्यता साबित करने का अवसर मिलेगा। प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में लाभ होगा।
💥मीन: रचनात्मकता के बल पर पुरानी समस्याओं का समाधान ढूंढ लेंगे।
💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼 1: क्या मनुष्य अपने भाग्य (Destiny) को बदल सकता है?
क्या होनी (Destiny) को टाला जा सकता है? 🚩✨
महाभारत युद्ध के बाद, अभिमन्यु के पौत्र राजा जनमेजय गद्दी पर बैठे। एक दिन वे महर्षि वेदव्यास जी के पास बैठे थे। बातों-बातों में जनमेजय ने अहंकार से कहा-
"मुनिवर! जहाँ आपके जैसे समर्थ ऋषि, स्वयं भगवान श्रीकृष्ण, भीष्म पितामह और गुरु द्रोणाचार्य जैसे महान लोग उपस्थित थे, फिर भी आप महाभारत के विनाशकारी युद्ध को रोक नहीं पाए? यदि मैं उस समय होता, तो अपने पुरुषार्थ से इस महाविनाश को अवश्य रोक लेता।"
अहंकार से भरे ये शब्द सुनकर भी व्यास जी शांत रहे और बोले- "पुत्र! अपने पूर्वजों की क्षमता पर शंका न करो। यह विधि का विधान था। यदि इसे टाला जा सकता, तो स्वयं श्रीकृष्ण इसे रोक लेते।"
लेकिन जनमेजय अपनी बात पर अड़े रहे। तब व्यास जी ने कहा- "तू भविष्य जानना चाहता है? तो सुन...
🐎 कुछ वर्ष बाद तू एक काले घोड़े पर बैठकर दक्षिण दिशा में समुद्र तट पर जाएगा।
👸 वहाँ तुझे एक सुंदर स्त्री मिलेगी, जिसे तू महलों में लाकर विवाह करेगा।
🔥 उसके कहने पर तू एक यज्ञ करेगा, जिसे तू युवा ब्राह्मणों से कराएगा।
⚔️ उस यज्ञ में रानी के कहने पर तू उन ब्राह्मणों को प्राणदंड देगा, जिससे तुझे ब्रह्म हत्या का पाप और कुष्ठ रोग (Leprosy) होगा... और वही तेरी मृत्यु का कारण बनेगा!"
व्यास जी ने कहा- "जा, अगर इस होनी को रोक सके, तो रोक ले।"
जनमेजय ने एहतियात के तौर पर शिकार पर जाना ही छोड़ दिया। परंतु जब होनी का समय आया, तो सब कुछ वैसे ही घटने लगा:
✔️ उसे अस्तबल में सिर्फ काला घोड़ा ही मिला।
✔️ घोड़ा अनियंत्रित होकर दक्षिण दिशा (समुद्र तट) की ओर ही भागा।
✔️ वहाँ उसे एक सुंदर स्त्री मिली, जिससे उसे प्रेम हो गया और उसने विवाह कर लिया।
✔️ रानी के कहने पर यज्ञ हुआ, युवा ब्राह्मणों का अपमान हुआ और राजा ने उन्हें दंड दे दिया।
परिणामस्वरूप, जनमेजय को भयंकर कुष्ठ रोग हो गया।
घबराकर वह तुरंत वेदव्यास जी के चरणों में गिरा। व्यास जी ने उसे अंतिम अवसर देते हुए कहा- "मैं तुझे महाभारत की कथा सुनाऊँगा। यदि तू इसे पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से सुनेगा, तो तेरा रोग मिट जाएगा। लेकिन जहाँ तूने शंका की, वहीं कथा रुक जाएगी।"
जनमेजय श्रद्धा से कथा सुनने लगा और उसका रोग भी ठीक होने लगा। लेकिन जब व्यास जी ने बताया कि "भीम ने हाथियों को सूंड से पकड़कर अंतरिक्ष में उछाला था और वे आज भी अंतरिक्ष में तैर रहे हैं," तो जनमेजय अपना स्वभाव नहीं बदल पाया। वह बोल उठा- "यह कैसे संभव है? यह तो कोरी गप्प लगती है!"
बस! व्यास जी ने कथा रोक दी। उन्होंने अपने तपोबल से उन हाथियों को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में वापस लाकर दिखा दिया और कहा- "मैंने कहा था शंका मत करना, पर तू अपनी प्रवृत्ति नहीं बदल पाया।"
जितनी कथा राजा ने श्रद्धा से सुनी थी, उतना उसका शरीर ठीक हो गया, लेकिन एक छोटा सा हिस्सा रह गया... और अंततः वही उसकी मृत्यु का कारण बना।
🌟 सार (Moral of the Story):
हमारे जीवन का नाटक परमात्मा के द्वारा ही लिखा गया है। कर्म हमारे हाथ में है... लेकिन उसका फल विधि के हाथों में ही है।
श्रीमद्भगवद्गीता (11:33) में श्रीकृष्ण कहते हैं- "उठ खड़ा हो और यश प्राप्त कर। ये सब तो मेरे द्वारा पहले ही मारे जा चुके हैं, तू तो केवल निमित्त मात्र है।"
होनी को टाला नहीं जा सकता, लेकिन नेक कर्म, श्रद्धा और ईश्वर के नाम जाप से जीवन को संवारा अवश्य जा सकता है। 🙏
जय श्री कृष्णा! 🦚🚩
*🙏🌺 🌺🙏
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💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️




