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पञ्चाङ्ग 18 सितंबर 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*

jyotis


*🎈दिनांक  18 सितंबर 2026*
*🎈वार-  शुक्रवार*
*🎈मास - भाद्रपद मास*
*🎈पक्ष -  शुक्ल पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-    सप्तमी - 01:00.13 pm तक तत्पश्चात अष्टमी *
*🎈नक्षत्र- ज्येष्ठा - 22:43.45 पी एम तकतत्पश्चात मूल* 
*🎈करण    - वाणिज - 01:00.37 पी एम तकतत्पश्चात्, विष्टि,बव*
*🎈योग-    प्रीति - 01:33.37 पी एम तक तत्पश्चात्* आयुष्मान*
*🎈राहुकाल- 10.57: am से 12:29 पी एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय-06:22.47 ए एम*
*🎈सूर्यास्त-06:35.14 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- धनु*
*🎈सूर्य राशि- कन्या*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:48 ए एम से 05:35 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:05 पी एम से 12:54 पी एम*
*🎈अमृत काल - 12:54 पी एम से 02:41 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -12:06 ए एम, सितम्बर 19 से 12:53 ए एम, सितम्बर 19*

*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-   संतान सप्तमी व्रत आज यानी 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। उदया तिथि के अनुसार आज ही सप्तमी तिथि मान्य है।शुभ मुहूर्तब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:59 बजे से सुबह 06:45 बजे तक।अभिजित मुहूर्त: दोपहर 01:19 बजे से दोपहर 02:09 बजे तक।पूजा का समय: दोपहर 12:08 बजे से दोपहर 12:57 बजे तक।यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है।संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए माताएं यह व्रत रखती हैं।पूजा के दौरान सात गांठों वाला सूती डोरा (कलावा) हाथ में बांधा जाता है।

🌹18 सितंबर 2026 को मंगल का कर्क राशि में गोचर और नीचभंग राजयोग का प्रभाव सभी 12 राशियों पर रहेगा, जिससे करियर, स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों में मिलाजुला असर देखने को मिलेगा।
🛟18 सितंबर 2026 को मंगल का कर्क राशि में गोचर और नीचभंग राजयोग का प्रभाव सभी 12 राशियों पर रहेगा, जिससे करियर, स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों में मिलाजुला असर देखने को मिलेगा।
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 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
     🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
 

🛟चोघडिया, दिन का🛟*

day


       *

          🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
★√*★√*★√*★√*★√*★
     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
 
   ‼️💢आज का राशिफल💢‼️

🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️

💥 मेष राशि: चौथे भाव में नीच के मंगल और उच्च के गुरु की उपस्थिति से घर-परिवार में मिलेजुले परिणाम मिलेंगे; माता का आशीर्वाद रहेगा पर वाणी पर संयम रखें।

💥वृषभ राशि: आर्थिक पक्ष मजबूत होगा, बकाया धन की प्राप्ति हो सकती है और लंबे समय से अटके कार्य गति पकड़ेंगे।

💥मिथुन राशि: सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में नए अवसर मिलेंगे, विचारों की सराहना होगी, परंतु निवेश में सावधानी बरतें।

💥कर्क राशि: आपकी राशि में मंगल के प्रवेश से धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी और स्वास्थ्य में सुधार के योग हैं।

💥सिंह राशि: खर्चों में वृद्धि हो सकती है, अतः बजट बनाकर चलें और कानूनी मामलों व विवादों से दूरी बनाए रखें

।💥कन्या राशि: कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों से सहयोग मिलेगा, दिनचर्या व्यवस्थित रखें और मानसिक थकान से बचें।


💥तुला राशि: आपकी साख का लाभ मिलेगा, कार्यस्थल पर पदोन्नति या नई जिम्मेदारी के योग बन सकते हैं।

💥वृश्चिक राशि: आर्थिक और करियर के मामलों में नए अवसर बनेंगे, ट्रांसफर या यात्रा फायदेमंद साबित हो सकती है।


💥धनु राशि: विरोधी कमजोर होंगे, लेकिन मशीनरी या वाहन के प्रयोग में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

💥मकर राशि: आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, पुराने तनाव से मुक्ति मिलेगी और पारिवारिक माहौल सुखद रहेगा।

💥कुंभ राशि: कार्यभार और निजी जीवन में संतुलन बनाने का प्रयास करें, स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

💥मीन राशि: करियर और आर्थिक मामलों में नए लाभ के योग हैं, संपत्ति से जुड़े कार्यों में तेजी आएगी।

💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
  ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
   🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️

🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼 🕉️ 🌸*🌙 🐘 🪔 घर का मुख्य द्वार… छोटी सी जगह, लेकिन बहुत खास मानी जाती है ❤️

हम अक्सर घर की सफाई अंदर से तो खूब करते हैं, लेकिन मुख्य द्वार पर उतना ध्यान नहीं देते। जबकि वास्तु और पारंपरिक मान्यताओं में मुख्य द्वार को घर का महत्वपूर्ण प्रवेश स्थान माना गया है। 🌸
अगर आप चाहते हैं कि घर का माहौल हमेशा सकारात्मक, शांत और सुंदर बना रहे, तो मुख्य द्वार के आसपास इन 3 चीज़ों से बचना अच्छा माना जाता है—
 1. कूड़ेदान या गंदगी
मुख्य दरवाज़े के बिल्कुल पास कूड़ेदान रखना या गंदगी जमा होने देना अच्छा नहीं माना जाता। कोशिश करें कि प्रवेश स्थान हमेशा साफ और व्यवस्थित रहे।
2. बिखरे हुए जूते-चप्पल
दरवाज़े के सामने जूते-चप्पलों का ढेर न लगाएं। एक सुंदर और व्यवस्थित शू-रैक रखें, ताकि प्रवेश द्वार साफ दिखाई दे।
3. टूटी या बंद पड़ी चीज़ें
बंद घड़ी, टूटा सामान, सूखे या कांटेदार पौधे जैसी बेकार चीज़ें मुख्य द्वार के आसपास जमा करके न रखें। जो चीज़ इस्तेमाल में नहीं है, उसे हटाना ही बेहतर है।
🌿 तो फिर क्या करें?
मुख्य द्वार को रोज़ थोड़ा साफ रखें। वहां सुंदर पौधा लगाएं, शुभ चिन्ह जैसे स्वास्तिक या ॐ बनाएं और अवसर के अनुसार दीपक जलाएं। 🪔✨
मान्यता है कि साफ-सुथरा और सुंदर प्रवेश द्वार घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुखद वातावरण को बढ़ावा देता है।
और सच कहें तो जब घर का दरवाज़ा साफ और खूबसूरत होता है, तो घर में आने वाले मेहमानों पर भी एक अच्छी पहली छाप पड़ती है। ❤️
✨ आज बस 10 मिनट निकालिए… अपने घर के मुख्य द्वार को देखिए।
जो चीज़ अनावश्यक है उसे हटाइए, सफाई कीजिए और इस जगह को थोड़ा सुंदर बनाइए।
क्योंकि कई बार घर में बड़ा बदलाव करने के लिए बड़ी चीज़ों की नहीं, बस छोटी-छोटी अच्छी आदतों की जरूरत होती है। 🙏🪔
आपके घर का मुख्य द्वार साफ रहता है? कमेंट में “ॐ” जरूर लिखें। ❤️

अद्भुत रहस्य: गर्भ से जन्म और नामकरण तक की यात्रा! 🤰🌸
सनातन धर्म में गर्भधारण से लेकर शिशु के जन्म और उसके नामकरण तक, हर चरण का गहरा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व है। आइए जानते हैं इसके पीछे छिपे कुछ अद्भुत रहस्य:
🤰 गर्भ में शरीर का विकास:
1 से 15 दिन: पहले शुक्र-शोणित से 'कलल', फिर सात रात में 'बुद्बुद' और 15 दिन में 'पिण्ड' बनता है।
दूसरा व तीसरा महीना: दूसरे महीने सिर और तीसरे महीने पैर बनते हैं।
चौथा से छठा महीना: पेट, रीढ़ की हड्डी, मुख, नाक, आँख और कान का निर्माण होता है।
सातवाँ व आठवाँ महीना: सातवें महीने में शरीर जीव (आत्मा) से युक्त होता है और आठवें महीने में सभी लक्षण प्रकट हो जाते हैं।
नौवाँ महीना (ईश्वर से प्रार्थना): नवें महीने में शिशु को अपने पूर्व जन्मों का स्मरण होता है। वह ईश्वर से प्रार्थना करता है कि "हे प्रभु! मुझे बाहर निकालें, मैं हमेशा आपका नाम जपूँगा।"
माया का प्रभाव: लेकिन जन्म लेते ही संसार की 'वैष्णवी वायु' (माया) के स्पर्श से वह पिछले जन्म और वादे सब भूल जाता है।
🧘‍♂️ शिशु में ऊर्जा चक्र और भस्म (विभूति) का रहस्य:
क्या नवजात शिशु सातों चक्रों के साथ पैदा होता है? नहीं!
12वें सप्ताह के आस-पास 'मूलाधार चक्र' बनता है और 30 सप्ताह तक पहले पाँच चक्र विकसित हो जाते हैं।
आज्ञा और सहस्रार चक्र पूरी तरह विकसित नहीं होते। इसीलिए हमारी संस्कृति में नवजात शिशु को नहलाने के तुरंत बाद उसकी दोनों भौहों के बीच (आज्ञा चक्र पर) विभूति या भस्म लगाई जाती है, ताकि बच्चे का ध्यान उस दिशा में केंद्रित हो सके।
🌸 नामकरण संस्कार का महत्व और विज्ञान:
शास्त्रों के अनुसार बच्चे का नामकरण जन्म के 10वें दिन (सूतक हटने के बाद), 100वें दिन या एक वर्ष के भीतर करना चाहिए। नामकरण से बच्चे की आयु और तेज में वृद्धि होती है।
दो नाम रखने का विधान:
गुप्त नाम (राशि नाम): यह जन्म नक्षत्र और ग्रहों के आधार पर रखा जाता है। इसे गुप्त रखा जाता है ताकि बच्चे पर किसी भी प्रकार की तांत्रिक क्रिया या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव न पड़े।
प्रचलित नाम: यह लोक व्यवहार और बच्चे के गुणों के आधार पर रखा जाता है।
विधि: यज्ञ और आहुतियों के बाद पिता, बुआ या दादी शिशु के दाहिने कान में उसका नाम उच्चारण करते हैं। इसके बाद बच्चे को सूर्यदेव के दर्शन कराए जाते हैं ताकि उसमें सूर्य के समान तेज आए।
(ध्यान रखें: नवजात शिशु पर चावल की जगह गुलाब की पंखुड़ियां बरसानी चाहिए ताकि उसकी नाजुक त्वचा या आँखों को नुकसान न पहुंचे।)
✨ हमारा दायित्व:
आज के समय में जन्म और मृत्यु सिर्फ एक इवेंट बनकर रह गए हैं। लेकिन हमारी संस्कृति सिखाती है कि उत्तम गुणों वाली अगली पीढ़ी के निर्माण के लिए गर्भाधान से ही सात्विक वातावरण, सही भोजन और आध्यात्मिक विचारों का ध्यान रखना चाहिए।
👇 क्या आपके भी बचपन में दो नाम (एक राशि का और एक पुकारने का) रखे गए थे? कमेंट करके जरूर बताएं!       
        💢💢ॐ नमः शिवाय! 🙏


🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏

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 💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
  ✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
           *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
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 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय  बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️
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