*वोटिंग खत्म, बाड़ेबंदी शुरू ! जीत की संभावनाएं बाड़ों में कैद, कौन बनेगा सभापति*
नगर निकाय की पहली चरण की वोटिंग खत्म हो चुकी है और आज दुसरे दौर की मतदान प्रक्रिया अभी जारी है हम यहां आज बात कर रहे हैं नागौर के प्रथम चरण में हुए मतदान के बाद बनी परिस्थितियों की,,
तो, वोटिंग खत्म, अब वोटों की रखवाली शुरू
जीत की संभावनाएं बाड़ों में क़ैद
वोटिंग ख़त्म होते ही भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने प्रत्याशियों को फ़ोन करके पार्टी कार्यालय बुलाना शुरू कर दिया था और बाड़े बंदी शुरू हो चुकी है
*लोकतंत्र की परीक्षा मतदाता ने मतदान केंद्र पर जाकर दे दी और अब उसकी परीक्षा लेने की बारी राजनीतिक दलों की है।*
अब देखिए कितना अदभुत नजारा था, चुनाव के पहले तक यही उम्मीदवार जनता के दरवाज़े पर खड़े होकर कह रहे थे कि हमें एक मौक़ा दीजिए, हम आपके सेवक हैं, आपके बीच रहेंगे, आपके सुख-दुख में काम आएंगे और आपके वार्ड की तस्वीर बदल देंगे। मगर मतदान के ख़त्म होते ही तस्वीर ही बदल गई है। अब उम्मीदवार जनता के बीच नहीं, पार्टी के बीच है। बाड़े में हिनहिनाते हुए।
आप चाहें तो इसे इस प्रकार भी समझ सकते हैं,,, *कल तक मतदाता उम्मीदवार को ढूंढ रहा था और आज पार्टी उम्मीदवार को ढूंढ रही है। फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि कल उम्मीदवार वोट मांगने जा रहा था और आज पार्टी उसकी निष्ठा की गिनती करने जा रही है।*
चलिए बात करते हैं अगले दौर कि तो, मतदान के बाद नागौर में दोनों ही प्रमुख दल कांग्रेस एवं भाजपा, दोनों ने अपने-अपने राजनैतिक पत्ते बिछाने शुरू कर दिए हैं, सूत्रों की माने तो दोनों ही दलों से सभापति के संभावित प्रत्याशी अपने अपने संभावित वार्ड पार्षद को अपना शुभचिंतक बताकर अपने अपने पाले में करनै का प्रयास कर रहे हैं और पार्षदों की खातिरदारी व रखवाली शुरू कर चुके हैं जिसे आप और हम सामान्य बोलचाल में बाड़ेबंदी कहते हैं।
बात की जाए, संभावित सभापति की तो कांग्रेस से एक नाम खुलकर नागौर शहर के राजनैतिक गलियारों में चल रहा है सूत्रों के अनुसार पूर्व सभापति स्व. कृपाराम जी सोलंकी के पुत्र प्रवीण सोलंकी इस रेस में आगे नजर आ रहे हैं बताया जा रहा है इनके सम्पर्क में निर्दलीय पार्षद प्रत्याशी दहाई की संख्या में सम्पर्क में हैं और देखने वाली बात यह दिलचस्प होगी कि कांग्रेस इस नगरपरिषद चुनाव में कितनी सीटें निकाल पाती है। यदि कांग्रेस की सीटें एक अच्छी संख्या में आती है तो प्रवीण सोलंकी की दावेदारी सभापति पद के लिए कितनी मजबूत होगी यह तो आने वाले परिणाम ही बता पाएंगे लेकिन यह तय है सभापति की कुर्सी का रास्ता कांग्रेस के लिए प्रवीण सोलंकी के वार्ड नंबर 10 से ही होकर गुजरेगा।
बात की जाए भाजपा के संभावित सभापति पद के उम्मीदवार की तो नागौर के राजनीतिक गलियारों में फिलहाल संतोष टाक का नाम सबसे आगे लिया जा रहा है जैसा कि सूत्रों का कहना है कि संतोष टाक इस सभापति की रेस में भाजपा की ओर से काफी आगे नजर आ रही है तो वहीं दूसरी और संघ के भी विश्वसनीय शिवकुमार राव यह भी अपनी दौड़ दौड़ने में लगे हुए हैं और शिवकुमार राव भी भाजपा के संभावित सभापति पद के लिए अपनी दावेदारी करने में जुटे हुए हैं दोनों ही भाजपा के संभावित सभापति पद के प्रत्याशी अपनी अपनी दौड़ में कितना सफल होता है यह तो आने वाले दो दिनों के बाद पता चल ही जाएगा लेकिन फिलहाल बाड़े बंदी का दौर और यह गुटबाजी जो देखने को मिल रही है नागौर में एक स्थाई सभापति के लिए कौन उपयुक्त होगा जनता बस इसी चीज का इंतजार कर रही है कि हमारा अगला सभापति होता कौन ?
ऐसा नहीं है कि कांग्रेस में और सभापति पद के उम्मीदवार नागौर में नहीं है लेकिन फिलहाल जो चर्चा कांग्रेस से सभापति पद के लिए नाम निकालकर मजबूत दावेदारी के रूप में सामने आ रहा है उसमें सूत्रों का यह कहना है कि प्रवीण सोलंकी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है।
इन सब राजनीतिक गलियारों की चर्चाएं और सूत्रों से निकलकर आने वाली जानकारी से भी एक महत्वपूर्ण बात यह है की संभावित सभापति पद के उम्मीदवारों को पार्टियां किसको चुनती है पार्टी जिसको टिकट देगी संभावनाएं उसकी ज्यादा प्रबल हो जाएगी या फिर सभापति के पार्टी के द्वारा टिकट देने के बाद भी क्या दोनों पार्टियों में गुटबाजी नजर आएगी यह तो आने वाला समय ही बताया क्योंकि जब नगर परिषद चुनाव के लिए टिकट वितरण हुआ तो उसके बाद जिनका टिकट पार्टी ने काटा वह नाराज होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन किया और चुनाव लड़ा तो क्या वह जो नाराज होने वाले पार्षद थे जिनका टिकट कटा या जिन्होंने चुनाव लड़ा क्या वह अभी अपनी पार्टी के साथ बने रहेंगे या फिर खेल कुछ और ही होगा यह तो जल्द ही परिणाम के बाद आप सबके सामने होगा।
*इसलिए फ़िलहाल चुनाव का नतीज़ा मत पूछिए। बस इतना देखिए कि कोन बैग लेकर कहां जा रहा है और किसके फोन पर जा रहा है। क्योंकि लोकतंत्र में अब वोट पड़ने के बाद सिर्फ वोटों की गिनती नहीं होती, वोटों की रखवाली भी होती है।*
