Type Here to Get Search Results !

पञ्चाङ्ग 10 अक्टूबर 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*

Jyotis



*🎈दिनांक  10 अक्टूबर 2026*
*🎈वार-   शनिवार*
*🎈मास - आश्विन मास*
*🎈पक्ष -  कृष्ण पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-अमावस्या - 21:18:55 पी एम तक तत्पश्चात प्रतिपदा * 
*🎈नक्षत्र- हस्त - 21:18:48 पी एम तक तत्पश्चात, चित्रा*
*🎈करण    - चतुष्पद - 09:23:46 पी एम तत्पश्चात् नाग तक तत्पश्चात्, किंस्तुघ्न*
*🎈योग-    इन्द्र - 22:01:26 पी एम, अक्टूबर 09 तक तत्पश्चात्, वैद्युति * 
*🎈राहुकाल- 09:28 ए एम से 10:55 ए एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय- 06:33.08 ए एम*
*🎈सूर्यास्त- 06:10:35 पी एम*
*🎈चंद्र राशि-कन्या*
*🎈सूर्य राशि- कन्या*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:53 ए एम से 05:43 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 11:59 ए एम से 12:45 पी एम*
*🎈अमृत काल    - 03:36 पी एम से 05:14 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -11:57 पी एम से 12:47 ए एम, अक्टूबर 11*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-  🏵️ ☀️☀️☀️10 अक्टूबर 2026: अमावस्या श्राद्ध शनिवार को है।🏓🏓🏓
💥।। ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः ।।
सर्वपितृ अमावस्या : पितरों के प्रति कृतज्ञता और आत्मिक शांति का पावन पर्व
🎉पितृपक्ष की पूर्णता का दिवस — 💓🛟सर्वपितृ अमावस्या — हमारे पूर्वजों के त्याग, स्नेह और आशीष को नमन करने का श्रेष्ठ अवसर है। यह दिन विशेष रूप से उन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों को समर्पित है जिनकी तिथि हमें स्मरण न हो, या किसी कारणवश जिनका श्राद्ध पूर्व में न हो पाया हो।

💫तिथि एवं शुभ समय
🏓 * पर्व तिथि: 10 अक्टूबर 2026, शनिवार
🌺 * अमावस्या प्रारंभ: 9 अक्टूबर, रात्रि 09:35:05 बजे से
🌺 * अमावस्या समापन: 10 अक्टूबर, रात्रि 09:18:55 बजे तक

🏵️सरल पूजन एवं श्रद्धा-विधि🏵️
 * धूप एवं तर्पण: घर में शुद्ध घी, गुग्गल व हवन सामग्री से पितरों के निमित्त धूप दें। इससे वातावरण शुद्ध होता है और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति व समृद्धि का वास होता है।
🏵️ * दान का महत्व: अपनी सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, गौ-ग्रास अथवा सात्विक भोजन कराएं।
🏵️ * दीपदान व स्मरण: संध्या समय दक्षिण दिशा की ओर दीपक प्रज्वलित कर शांत मन से पूर्वजों का ध्यान करें और मंत्र जपें:
🏵️   > "ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः"
   > 
🏵️> सर्वपितृ अमावस्या केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने और पूर्वजों की चेतना के प्रति हृदय से आभार प्रकट करने की पावन वैदिक परंपरा है।

👁️"विष्णु भगवान की जय हो "🙏 🌹

🛟ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-38) के अनुसार, अमावस्या तिथि के दिन तिल का तेल खाना और शरीर पर लगाना पूरी तरह से निषिद्ध (वर्जित) माना गया है।

💥10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या है। इस दिन चंद्रमा तुला राशि में स्थित रहेंगे (या पंचांग के अनुसार तुला राशि का गोचर रहेगा और सूर्य भी तुला राशि में हैं

kundli



   👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
     🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
       *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day

 

                                               *🛟चोघडिया, रात्🛟*

night



          
 
★√*★√*★√*★√*★√*★
     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
   
    ‼️💢आज का राशिफल💢‼️

🏓🏓सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल💕
💢• मेष: साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी। कामकाज में तेजी आएगी, लेकिन जल्दबाजी से बचें।
💢• वृषभ: मन थोड़ा परेशान या चिंतित रह सकता है। मानसिक तनाव से बचें और कोई बड़ा फैसला टाल दें।
💢• मिथुन: घर-परिवार में किसी बात को लेकर मतभेद या मनमुटाव हो सकता है। वाणी पर संयम रखें।
💢• कर्क: नए लोगों से मुलाकात और संपर्क से लाभ मिलने के योग हैं। कामकाज में पूरी सावधानी बरतें।
💢• सिंह: आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी और परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा।
💢• कन्या: कार्यक्षेत्र में आपके काम की प्रशंसा होगी। योजनाएं सफल रहेंगी, पर स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
💢• तुला: साझेदारी और व्यापार में लाभ मिलेगा। जीवनसाथी का सहयोग प्राप्त होगा। जीवन के प्रति गंभीर विचार आ सकते हैं।
💢• वृश्चिक: अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। निवेश या लेन-देन में सावधानी बरतें।
💢• धनु: भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। उत्साह में बढ़ोतरी होगी और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी।
💢• मकर: उन्नति और शुभ समाचार मिलने से मन प्रसन्न रहेगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा।
💢• कुंभ: अपनी जिम्मेदारियों को पूरी गंभीरता और ईमानदारी से निभाएं। कार्यक्षेत्र में ध्यान केंद्रित रखें।
💢• मीन: कामकाज में जल्दबाजी करने से बचें। शांति से फैसले लें और खान-पान पर ध्यान दें।
💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
shradh


  
 ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं अभी श्राद्ध पक्ष चल रहा है। ☀️

#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼 
🌿 🌿 👉 🌷 गया जी में पिंडदान का इतना महात्म्य क्यों? 🌷😱👇  
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 
〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

👉*  📖 श्रीमद्भागवत महात्म्य की वो अमर कथा, जो सबसे घोर पापी को भी प्रेत योनि से मुक्त कराकर सीधे वैकुंठ भेज सकती है! 🙏✨
श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य में गौकर्ण जी और धूंधुकारी की यह कथा केवल एक पौराणिक प्रसंग नहीं है, बल्कि यह इस बात का जीवित प्रमाण है कि 'भगवत कथा' में कितनी अपार शक्ति है। यह कथा बताती है कि चाहे पाप कितने ही बड़े क्यों न हों, यदि पश्चाताप और सच्ची भक्ति हो, तो उद्धार निश्चित है।
आइए जानते हैं इस अद्भुत कथा को, जिसे सुनने मात्र से ही जन्मों-जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं:
🌟 भाग 1: दो भाइयों का जन्म - एक पापी, एक परम ज्ञानी
प्राचीन काल में आत्मदेव नाम के एक ब्राह्मण संतान न होने से दुखी थे। एक महात्मा ने उन्हें एक फल दिया कि वे अपनी पत्नी को खिला दें। लेकिन उनकी पत्नी धूंधुलि ने डर और संशय के कारण वह फल अपनी गाय को खिला दिया और खुद अपनी बहन के बच्चे को अपना बताकर पालने लगी। उस बच्चे का नाम रखा गया धूंधुकारी।
उधर, उस फल के प्रभाव से गाय के गर्भ से एक मनुष्य रूपी बालक का जन्म हुआ, जिसके कान गाय जैसे थे। आत्मदेव ने उसका नाम गौकर्ण रखा। धूंधुकारी अत्यंत दुष्ट, हिंसक और पापी निकला, जबकि गौकर्ण जी परम ज्ञानी, दानी और धर्मात्मा बने।
🔥 भाग 2: धूंधुकारी के अत्याचार और उसकी दर्दनाक मृत्यु
पिता आत्मदेव बेटे के अत्याचारों से तंग आकर वन चले गए। धूंधुकारी ने धन के लिए अपनी मां को इतना प्रताड़ित किया कि दुखी होकर उन्होंने कुएं में कूदकर जान दे दी। इसके बाद धूंधुकारी पांच वैश्याओं के साथ रहने लगा और चोरी-डकैती करने लगा।
एक दिन पकड़े जाने के डर से उन्हीं वैश्याओं ने सोते हुए धूंधुकारी को रस्सी से बांध दिया, उसका गला घोंटने की कोशिश की और अंत में उसके मुंह में जलते अंगारे डालकर उसे तड़पा-तड़पा कर मार डाला। उसके शव को घर में ही गड्ढा खोदकर दबा दिया।
👻 भाग 3: भयंकर प्रेत योनि और तड़पता हुआ भाई
अपने घोर पापों के कारण धूंधुकारी भयंकर प्रेत बन गया। वह बिना अन्न-जल के दसों दिशाओं में भटकता और "हा देव! हा देव!" चिल्लाता।
जब ज्ञानी भाई गौकर्ण जी को इसकी सूचना मिली, तो उन्होंने गयाजी जाकर उसके नाम से विधि-विधान से श्राद्ध और पिंड दान किया। लेकिन धूंधुकारी के पाप इतने घोर थे कि गया-श्राद्ध से भी उसे मुक्ति नहीं मिली। एक रात जब गौकर्ण अपने घर के आंगन में सो रहे थे, तब धूंधुकारी ने उन्हें डराने के लिए कभी हाथी, कभी भैंसा तो कभी भयानक प्रेत का रूप दिखाया।
जब गौकर्ण जी ने धैर्यपूर्वक उससे पूछा, "तुम कौन हो?" तो वह प्रेत रोने लगा और बोला— "भाई! मैं तुम्हारा पापी भाई धूंधुकारी हूँ। मैं अपनी प्रेत योनि से तड़प रहा हूँ, दया करो और मुझे मुक्ति दिलाओ!"
🌅 भाग 4: सूर्यनारायण का आदेश और 7 दिन का चमत्कार
गौकर्ण जी ने भाई की मुक्ति का उपाय जानने के लिए अपने तपोबल से सूर्यदेव की गति को रोक दिया और उनसे प्रार्थना की। तब सूर्यनारायण ने आकाशवाणी की— "गौकर्ण! श्रीमद्भागवत का सप्ताह पारायण (7 दिनों की कथा) करो, इसी से इस प्रेत की मुक्ति होगी।"
गौकर्ण जी ने कथा का आयोजन किया। कथा सुनने के लिए धूंधुकारी प्रेत भी वहां आया, लेकिन प्रेत योनि में होने के कारण वह बैठ नहीं पा रहा था। इसलिए वह वहां रखे एक सात गांठों वाले बांस के छेद में जाकर बैठ गया।
जैसे-जैसे रोज कथा आगे बढ़ती, हर शाम को बांस की एक-एक गांठ "तड़-तड़" करके फटती जाती। सातवें दिन सातों गांठें फट गईं और 12 स्कंधों की कथा पूरी होते ही धूंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त होकर दिव्य रूप में प्रकट हो गया! उसने भाई गौकर्ण को प्रणाम कर भागवत महात्म्य की जय-जयकार की।
🛸 भाग 5: वैकुंठ से आए विमान और 'श्रवण' का रहस्य
उसी क्षण वैकुंठ लोक से पार्षदों सहित एक दिव्य विमान उतरा और धूंधुकारी उसमें बैठ गया।
गौकर्ण जी ने भगवान के पार्षदों से पूछा— "प्रभु! यहाँ तो हज़ारों श्रोता हैं, फिर विमान केवल धूंधुकारी के लिए ही क्यों आया? सभी ने समान रूप से कथा सुनी थी।"
तब पार्षदों ने बहुत सुंदर उत्तर दिया— "हे ज्ञानी गौकर्ण! कथा तो सबने सुनी, लेकिन धूंधुकारी ने इसका 'मनन और चिंतन' किया। उसने सात दिनों तक बिना कुछ खाए-पिए, एकाग्रचित होकर अपने पापों का पश्चाताप करते हुए कथा को हृदय में उतारा। बाकी लोगों ने केवल सुना, लेकिन उसे अपने जीवन और मनन में नहीं ढाला। फल का अंतर श्रवण और मनन की गहराई से होता है।"
गौकर्ण जी ने बाद में दोबारा कथा कही, और इस बार सभी श्रोताओं ने पूरे मनन के साथ कथा सुनी, जिससे भगवान स्वयं प्रकट हुए और सभी को वैकुंठ धाम ले गए।
🌿 कथा की सीख:
श्रीमद्भागवत कथा केवल कानों से सुनने की चीज नहीं है, इसे जीवन में उतारने, मनन करने और पश्चाताप के साथ आत्मसात करने की आवश्यकता है। यह कथा इतनी पवित्र है कि श्राद्ध के समय इसका पाठ करने से पितरों को परम तृप्ति मिलती है और नित्य मनन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यदि आपको कान्हा की इस महिमा पर विश्वास है, तो कमेंट बॉक्स में लिखें:
👇
🙏 ।। श्रीमद्भागवत महापुराण की जय ।। 

🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏

🧨🚩⛳💥❤️🕉️🌴🍀🎈🌀🌿

 💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
  ✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
           *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹          

 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
♨️  ⚜️ 🕉🌞  🌞🕉 ⚜🚩*♥️💕💥*अगर आपको हमारा पंचांग नियमित चाहिए तो आप मुझे इस चैनल को फॉलो करे*
*https://whatsapp.com/channel/0029Va65aSaKrWR*
      ♨️  ⚜️ 🕉🌞  🌞🕉 ⚜🚩
🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~*अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय  बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️
vipul

Tags

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Below Post Ad