*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 29 अक्टूबर 2026*
*🎈वार- गुरुवार*
*🎈मास - कार्तिक मास*
*🎈पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-चतुर्थी - 10:09 पी एम तक तत्पश्चात पंचमी*
*🎈नक्षत्र- रोहिणी - 11:11 ए एम तकतत्पश्चात मृगशिरा*
*🎈करण- बव - 11:37 ए एम तक तत्पश्चात् बालव, कोलव*
*🎈योग- परिघ - 12:06 ए एम, अक्टूबर 30 तक तत्पश्चात् शिव*
*🎈राहुकाल- 01:42 पी एम से 03:06 पी एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय- 06:43.00 ए एम*
*🎈सूर्यास्त- 05:54.00 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- वृषभ - 10:06 पी एम तक तत्पश्चात मिथुन*
*🎈सूर्य राशि- तुला*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- दक्षिण दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:00 ए एम से 05:52 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 11:56 ए एम से 12:41 पी एम*
*🎈अमृत काल- 08:17 ए एम से 09:44 ए एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -11:53 पी एम से 12:45 ए एम, अक्टूबर 30*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण- 🏵️ ☀️
☀️☀️30 अक्टूबर 2026 गुरुवार करवा चतुर्थी व्रत 🏓🏓
👁️"विष्णु भगवान की जय हो "🙏 🌹
🏓🏓30 अक्टूबर 2026 को गोचर (ग्रहों की स्थिति) के अनुसार, आज चंद्रमा कर्क राशि में संचार कर रहे हैं और शुक्र (वक्री) तुला राशि में तथा बुध (वक्री) व मंगल के बीच प्रभाव बना हुआ है।
💢.ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, चतुर्थी तिथि को मूली खाना पूरी तरह वर्जित है, क्योंकि इस दिन मूली खाने से धन का नाश होता है।
↘️चूंकि करवा चौथ का व्रत हमेशा कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को ही रखा जाता है, इसलिए शास्त्रों के इस नियम के अनुसार करवा चौथ के दिन (या व्रत के पारण के समय) मूली का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए
💫तिल के तेल का निषेध: किसी भी व्रत के दिन या चतुर्थी तिथि को तिल का तेल खाना और शरीर पर लगाना वर्जित माना गया है↘️
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
‼️💥 सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल इस प्रकार है:💫💥
🏓• मेष (Aries): हाल ही में किए गए प्रयासों के परिणामों पर ध्यान दें। अधूरे कामों के साथ-साथ अपनी मेहनत की समीक्षा करने का दिन है। जल्दबाजी में निर्णय न लें।
🏓• वृषभ (Taurus): आपको चुपचाप हो रही प्रगति और सकारात्मक बदलावों की सराहना करनी चाहिए। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम बढ़ाएं।
🏓• मिथुन (Gemini): आपका मन कई विचारों को आपस में जोड़ेगा। पुराने अनुभवों से सीख मिलेगी। बातचीत में धैर्य रखें क्योंकि बुध वक्री है।
🏓• कर्क (Cancer): चंद्रमा आपकी ही राशि में हैं। भावनाओं और रिश्तों पर ध्यान देने का समय है। जो चीज भावनात्मक रूप से आपके लिए जरूरी है, उसे समझें।
🏓• सिंह (Leo): आत्ममंथन करने का दिन है कि किस तरह की सफलता आपको असली संतुष्टि देती है। दूसरों की राय से ज्यादा अपने अनुभव पर भरोसा रखें।
🏓• कन्या (Libra/Virgo): आध्यात्मिक चिंतन और मन की शांति पर ध्यान रहेगा। अपनों के प्रयास या उपलब्धियों की सराहना करने से रिश्ते गहरे होंगे।
🏓• तुला (Libra): शुक्र आपकी राशि में वक्री गति में है। पैसों और रिश्तों के पुराने मामलों पर दोबारा विचार हो सकता है। अपनी बात स्पष्ट रूप से रखें।
🏓• वृश्चिक (Scorpio): सूर्य आपकी राशि में हैं, जिससे समस्याओं की जड़ तक पहुंचने में मदद मिलेगी। फोन या सोशल मीडिया के जरिए पुरानी बातें या छुपे हुए अहसास सामने आ सकते हैं।
🏓• धनु (Sagittarius): गोचर के अनुसार किसी तीसरे व्यक्ति की दखलअंदाजी से शुरुआती भ्रम हो सकता है, लेकिन बाद में स्थिति स्पष्ट होगी। नए निवेश या लेन-देन में बेहद सतर्क रहें।
🏓• मकर (Capricorn): साझेदारी के कार्यों और रिश्तों में दिखावे की जगह सरलता और ईमानदारी अपनाएं, इससे warmth बढ़ेगी। सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा।
🏓• कुंभ (Aquarius): नए माहौल में किसी से मुलाकात या परिचय हो सकता है जो भविष्य में काम आए। आने वाले 72 घंटों में भावनाओं पर काबू रखकर सतर्क रहें।
🏓• मीन (Pisces): किसी पुराने या खास व्यक्ति का अचानक आया संदेश मन को प्रसन्नता और अपनेपन का अहसास कराएगा।
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼
💢कार्तिक मास में करवा चौथ व्रत‼️💞।। ॐ श्री गणेशाय नमः ।।💞
💞 ।। करवा माता की जय ।।💞
💞।। करवा चौथ की तीन पौराणिक एवं लोकप्रचलित कथाएँ विस्तार से ।।
💞1. करवा धोबिन की कथा
प्राचीन काल में करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री रहती थी। वह अपने पति से अत्यंत प्रेम करती थी और सदैव अपने पति की सेवा तथा उनके कल्याण के लिए तत्पर रहती थी। उसके पतिव्रत धर्म की महिमा दूर-दूर तक प्रसिद्ध थी।
एक दिन करवा का पति नदी में स्नान करने गया। जब वह नदी में स्नान कर रहा था, तभी एक विशाल मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया। मगरमच्छ के चंगुल में फँसकर उसका पति प्राण बचाने के लिए पुकारने लगा।
पति की पुकार सुनकर करवा तुरंत नदी के किनारे पहुँची। उसने देखा कि मगरमच्छ उसके पति को पानी में खींच रहा है। अपने पति को मृत्यु के मुख में देखकर भी करवा घबराई नहीं। उसने अपने पतिव्रत धर्म के बल पर मगरमच्छ को कच्चे सूत के धागे से बाँध दिया। यह उसके अटूट विश्वास और पतिव्रता शक्ति का प्रतीक था।
इसके बाद करवा ने यमराज का स्मरण किया और उनसे प्रार्थना की कि वे उसके पति के प्राणों की रक्षा करें तथा मगरमच्छ को दंड दें।
करवा की पुकार सुनकर यमराज प्रकट हुए। करवा ने उनसे कहा, "हे धर्मराज! इस मगरमच्छ ने मेरे निर्दोष पति को पकड़ लिया है। आप इसे दंड देकर मेरे पति के प्राणों की रक्षा कीजिए।"
यमराज ने कहा, "हे करवा! मगरमच्छ की आयु अभी शेष है, इसलिए उसे समय से पहले मृत्यु देना धर्म के नियमों के विरुद्ध है।"
यह सुनकर करवा ने दृढ़ निश्चय के साथ कहा, "हे धर्मराज! यदि आप मेरे पति की रक्षा नहीं करेंगे, तो मैं अपने पतिव्रत धर्म की शक्ति से आपको भी शाप दे दूँगी।"
करवा के दृढ़ संकल्प और पतिव्रत धर्म को देखकर यमराज प्रसन्न हुए। लोकप्रचलित कथा के अनुसार, उन्होंने मगरमच्छ को दंडित किया और करवा के पति को जीवनदान प्रदान किया।
यमराज ने करवा को आशीर्वाद दिया कि जो सुहागिन स्त्री श्रद्धा और विश्वास के साथ करवा चौथ का व्रत करेगी, उसके जीवन में सौभाग्य, सुख और समृद्धि बनी रहेगी।
🏓कथा का संदेश:=
यह कथा पति-पत्नी के प्रेम, निष्ठा, साहस और अटूट विश्वास का संदेश देती है।
करवा चौथ का व्रत इसी समर्पण और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है।
💞2. द्रौपदी और भगवान श्रीकृष्ण की कथा🏵️
महाभारत काल की लोकप्रचलित मान्यता के अनुसार, जब पांडव वनवास में रह रहे थे, तब उन्हें अनेक कठिनाइयों और संकटों का सामना करना पड़ रहा था। पांडवों के जीवन में अनिश्चितता थी और द्रौपदी अपने पतियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती थीं।
एक समय अर्जुन तपस्या करने के लिए नीलगिरि पर्वत की ओर चले गए। उनके दूर रहने के कारण द्रौपदी को पांडवों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी। उन्हें भय था कि कहीं किसी बड़े संकट के कारण उनके परिवार को कोई हानि न पहुँचे।
द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया। भगवान श्रीकृष्ण उनके सखा और मार्गदर्शक थे। द्रौपदी ने उनसे कहा, "हे माधव! पांडव अनेक कठिनाइयों से घिरे हुए हैं। मैं अपने परिवार के कल्याण और संकटों से मुक्ति के लिए कौन-सा उपाय करूँ?"
भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को धैर्य रखने का उपदेश दिया और उन्हें भगवान के प्रति श्रद्धा, विश्वास तथा व्रत-उपासना के महत्व को समझाया।
करवा चौथ से जुड़ी एक लोकप्रचलित कथा में बताया जाता है कि श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को करवा चौथ के व्रत का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से मन में साहस, धैर्य और संकटों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।
द्रौपदी ने भगवान के वचनों पर विश्वास करते हुए पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की कुशलता की प्रार्थना की। उन्होंने अपने पतियों की रक्षा तथा संकटों से मुक्ति के लिए भगवान से आशीर्वाद माँगा।
लोकमान्यता के अनुसार, द्रौपदी की श्रद्धा और प्रार्थना से उन्हें मानसिक बल मिला। आगे चलकर अर्जुन सकुशल लौटे और पांडवों ने अपने संघर्षों का सामना करते हुए धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ना जारी रखा।
इस कथा को करवा चौथ के व्रत से जोड़कर यह संदेश दिया जाता है कि कठिन परिस्थितियों में श्रद्धा, धैर्य और विश्वास मनुष्य को संबल प्रदान करते हैं।
🎉कथा का संदेश:=
भगवान पर विश्वास, परिवार के प्रति समर्पण और विपत्ति के समय धैर्य रखना जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देता है।
💢धार्मिक संदर्भ में ध्यान दें:=
द्रौपदी और करवा चौथ की यह कथा लोकप्रचलित मान्यता के रूप में सुनाई जाती है।
इसे महाभारत का प्रमाणित मूल प्रसंग मानने से पहले संबंधित शास्त्रीय स्रोत की पुष्टि आवश्यक है।
💞3. साहूकार की बेटी और करवा चौथ की कथा
बहुत समय पहले एक नगर में एक धनी साहूकार रहता था। उसके सात पुत्र और एक पुत्री थी। साहूकार की पुत्री अपने भाइयों की अत्यंत लाड़ली थी। विवाह के बाद जब उसका पहला करवा चौथ आया, तो उसने अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखने का निश्चय किया।
करवा चौथ के दिन उसने प्रातःकाल स्नान किया, पूजा-अर्चना की और व्रत का संकल्प लिया। उसने पूरे दिन अन्न और जल ग्रहण नहीं किया। दिन बीतने के साथ उसे भूख और प्यास सताने लगी, लेकिन वह चंद्रमा के दर्शन करके ही व्रत खोलने के अपने संकल्प पर अडिग रही।
शाम होने लगी तो उसके भाइयों ने अपनी बहन को भूख-प्यास से व्याकुल देखा। वे उससे बहुत प्रेम करते थे और उसकी परेशानी सहन नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने सोचा कि यदि बहन को चंद्रमा दिखाकर व्रत खुलवा दिया जाए, तो उसे राहत मिल जाएगी।
सातों भाइयों ने मिलकर एक उपाय किया। उन्होंने दूर एक पेड़ पर छलनी रखकर उसके पीछे दीपक जला दिया। दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता था मानो आकाश में चंद्रमा निकल आया हो।
भाइयों ने अपनी बहन से कहा, "बहन! चंद्रमा निकल आया है। अब तुम अर्घ्य देकर भोजन कर लो।"
बहन ने छलनी के पीछे चमकती रोशनी को चंद्रमा समझ लिया। उसने उसी के आधार पर व्रत खोलने की तैयारी की और भोजन करने बैठ गई।
लोकप्रचलित कथा के अनुसार, जैसे ही उसने भोजन ग्रहण किया, उसे अपने पति के बारे में अशुभ समाचार मिला। कुछ संस्करणों में बताया जाता है कि उसके पति की मृत्यु का समाचार आया, जबकि कुछ में पति के गंभीर संकट में पड़ने का वर्णन मिलता है।
यह समाचार सुनकर वह अत्यंत दुखी हुई और विलाप करने लगी। उसने अपने भाइयों को बताया कि उसने तो चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोला था, फिर ऐसा अनर्थ क्यों हुआ?
तभी चौथ माता ने उसे दर्शन दिए। उन्होंने समझाया कि व्रत को उचित विधि से पूरा किए बिना खोलने के कारण यह संकट आया है। चौथ माता ने उसे अपनी भूल स्वीकार करने, श्रद्धा बनाए रखने और विधिपूर्वक व्रत करने का मार्ग बताया।
साहूकार की पुत्री ने माता से क्षमा माँगी। उसने निश्चय किया कि वह पूरे वर्ष श्रद्धा के साथ चौथ के व्रत करेगी और करवा चौथ के दिन विशेष नियमों का पालन करेगी।
उसने चौथ माता की आराधना की, पूजा की और अपने पति के कल्याण के लिए प्रार्थना की। लोककथा के प्रचलित रूप में बताया जाता है कि उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर चौथ माता ने उसके पति को पुनः जीवन प्रदान किया अथवा उसे संकट से मुक्त किया।
इस प्रकार साहूकार की पुत्री का वैवाहिक जीवन फिर से सुखमय हो गया। तभी से यह कथा करवा चौथ के अवसर पर सुनाई जाती है और महिलाओं को व्रत के प्रति श्रद्धा, सावधानी तथा संकल्प का महत्व समझाया जाता है।
🎉कथा का संदेश:=
व्रत केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है। उसका वास्तविक महत्व श्रद्धा, संयम, सत्यनिष्ठा और संकल्प में है।
किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को समझकर और अपनी सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए।
💢ध्यान दें:=
साहूकार की बेटी वाली कथा के कई क्षेत्रीय संस्करण प्रचलित हैं।
इसमें पात्रों के नाम और घटनाओं का विवरण अलग-अलग मिल सकता है।
दूसरी मान्यता में सीता जी ने अशोक वाटिका में राम जी के लिए यही व्रत रखा था, जब राम-रावण युद्ध चल रहा था, विशेष रूप से जब वे अशोक वाटिका में थीं।
🛟।। करवा चौथ की तीनों कथाओं का आध्यात्मिक महत्व ।।💫
इन तीनों कथाओं का मूल भाव पति-पत्नी के प्रेम, परिवार के कल्याण, श्रद्धा और कठिन समय में धैर्य बनाए रखने से जुड़ा है।
करवा चौथ पर शिव-पार्वती, भगवान गणेश और चंद्रदेव की पूजा की परंपरा भी इसी मंगलकामना से जुड़ी है।
करवा चौथ की पूजा करते समय श्रद्धापूर्वक यह प्रार्थना की जा सकती है:=
💢मंत्र=
नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संततिं शुभाम्।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥
💫अर्थ: भगवान शिव की प्रिया माता पार्वती को नमन है। हे माता! अपने प्रति भक्तिभाव रखने वाली स्त्रियों को सौभाग्य, संतान-सुख और मंगलमय जीवन प्रदान करें।
🎉विशेष शास्त्रीय टिप्पणी: =
ऊपर दी गई कथाएँ करवा चौथ पर प्रचलित लोककथाओं के रूप में प्रस्तुत की गई हैं। इनके सभी विवरणों को प्राचीन पुराणों या महाभारत के प्रमाणित मूल प्रसंग के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा, जब तक संबंधित ग्रंथ और अध्याय का संदर्भ उपलब्ध न हो।
🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏
🧨🚩⛳💥❤️🕉️🌴🍀🎈🌀🌿
💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
♨️ ⚜️ 🕉🌞 🌞🕉 ⚜🚩
🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न, रुद्राक्ष, वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे उसके बाद उपयोग करे।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️







