*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 08 जनवरी 2026*
*🎈 दिन- गुरुवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शरद*
*🎈 मास - माघ मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈तिथि- षष्ठी - 07:05 ए एम, जनवरी 09 तक* तक तत्पश्चात् सप्तमी*
*🎈 नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी - 12:24 पी एम तक तत्पश्चात् उतराफाल्गुनी *
*🎈 योग - सौभाग्य 17:24:49*pm तत्पश्चात् शोभन*
*🎈करण - गर 18:42:50 pm तक तत्पश्चात् वणिज*
*🎈राहुकाल -हर जगह का अलग है- 02:00pm to 03:19 pm तक (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈चन्द्र राशि - सिंह till 18:38:18*
*🎈चन्द्र राशि- कन्या from 18:38:18*
*🎈सूर्य राशि- धनु*
*🎈सूर्योदय - :07:27:27am*
*🎈सूर्यास्त - 17:56:16pm*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल - दक्षिण दिशा में*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:38 ए एम से 06:32 ए एम*(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:21 पी एम से 01:03 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:15 ए एम, जनवरी 09 से 01:09 ए एम, जनवरी 09
*🎈 अमृत काल- 06:06 ए एम, जनवरी 09 से 07:47 ए एम, जनवरी 09*
*🎈 व्रत एवं पर्व- ......षष्ठी*
*🎈विशेष माघ मास महात्म्य *
कल से माघ मास प्रयागराज में कल्पवास*
🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴
*🛟चोघडिया, दिन🛟*
नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।
*🛟*
*🛟चोघडिया, रात्🛟*
*🛟*
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
🌷 ..# 💐🍁🍁✍️ | #🌕 👉
👉🦚❤️💐 🌼🪔🌷❤️💐97 ji 🌼🪔
❤️💐👉 ✍️ ★नक्षत्रराज पुष्य परन्तु वैवाहिक कार्यों के लिए अभिशप्त★ 🔅👇
----------------------------------
★★★★
√●कर्क राशि के मध्य में स्थित पुष्य नक्षत्र बहुत चर्चित रहा है। कर्क का अर्थ है केकड़ा। केकड़े के कई पैर होते हैं और विशेष आकार होता है। ऋग्वेद में पुष्य को तिष्य भी कहा गया है। तिष्य का शाब्दिक अर्थ शुभ माना गया है। पौष माह की पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा पुष्य नक्षत्र में होते हैं।
√●मुहूर्त कार्यों में पुष्य को श्रेष्ठ माना गया है। पाणिनि ने इस नक्षत्र के शुभत्व को जानकर इसका नाम सिद्ध्य भी रखा। परन्तु बाद में पुष्य नक्षत्र को विवाह के लिए वर्जित कर दिया गया, क्योंकि पुष्य नक्षत्र में किया गया विवाह निष्फल हो गया था। बृहदैवज्ञरंजनम् नामक ग्रंथ में पुष्य के बारे में वराहमिहिर ने लिखा है। ब्रह्मा ने अपनी कन्या शारदा का विवाह पुष्य नक्षत्र और गुरुवार को किया था। उस अवसर पर वे स्वयं अपनी पुत्री पर मोहित हो गए थे, प्रतिक्रिया स्वरूप तुरन्त ही उनके रोमकूपों से 60 हजार बालखिल्य ऋषियों का प्रादुर्भाव हो गया। ये सारे ऋषि उच्च कोटि के सिद्ध हुए। परन्तु ब्रह्मा कुपित हो गये और उन्होंने पुष्य नक्षत्र को शाप दे दिया कि विवाह कार्य पुष्य नक्षत्र में नहीं हो सकेंगे।
√●पुष्य नक्षत्र से सम्बन्धित सारे मुहूर्त सफल सिद्ध होते हैं। इसलिए इनको नक्षत्र राज भी कहा गया है। परन्तु आश्चर्य की बात बात है कि जिस गुरु पुष्य नक्षत्र को आज इतनी प्राथमिकता दी जाती है, उसी गुरु पुष्य के दिन हुए विवाह के कारण पुष्य को शाप दे दिया गया।
√●उपरोक्त प्रकरण से यह सिद्ध हुआ कि जहाँ रोहिणी लावण्यमयी है, वहीं पुष्य नक्षत्र कर्क राशि में होने के कारण विवाह के लिए दूषित हो गया। वहाँ चन्द्रमा स्वयं रोहिणी नक्षत्र में हैं तो यहाँ पुष्य नक्षत्र चन्द्रमा की राशि कर्क में स्थित हैं। अतः इसे कामप्रद भी माना गया है। ऋषियों को इसका ज्ञान था। अतः उनके वैज्ञानिक गुणों का अध्ययन करने के बाद इन नक्षत्रों के लिए कार्य विधान तय कर दिये।
√●कर्क राशि के दक्षिण में लघु स्वान और हाइड्रा है। हाइड्रा को एक महासर्प समझा जाता है। एक यूनानी कथा के अनुसार यह एक जलवासी सर्प था और आरगोस राज्य में उसका आतंक था। इसका एक सिर काट दो तो दूसरा निकल आता था। हरकुलिस ने एक सिर काटने के बाद उसे गर्म लोहे से दागना शुरू किया, परन्तु सर्प का नौवाँ सिर अमर था। उसे हरकुलिस ने पत्थर के नीचे दबा दिया। जूनो ने हरकुलिस के पैर को काट खाने के लिए कर्क या केकड़ा भेजा। तब हरकुलिस ने सर्प और कर्क दोनों को मार डाला। जूनो ने इन दोनों को अर्थात् हाइड्रा (सर्प) और कैंसर (कर्क) दोनों को आकाश में नक्षत्र के रूप में स्थापित कर दिया। कई देशों में यह मान्यताएँ थी कि कर्क मण्डल से होकर ही स्वर्ग की आत्माएँ पृथ्वी तक पहुँचती है और जन्म लेती हैं।
√●जिस तरह से सप्तऋषि मण्डल के ऋषियों को नक्षत्र रूप में स्थापित करने की परम्पराएँ रही हैं, यूनान में भी ऐसी बहुत सारी कथाएँ मौजूद हैं जिनमें कुछ अमर पात्रों को नक्षत्र के रूप में स्थापित किया गया है।
√●जहाँ कर्क राशि का पुष्य तारा इतना महत्त्वपूर्ण है वहीं कर्क राशि का अंतिम तारा आश्लेषा गण्डमूल नक्षत्रों में शामिल होने के कारण साधारण नहीं रहा। प्रत्येक जल राशि (कर्क, वृश्चिक, मीन) का अंतिम तारा तथा अग्नितत्त्व राशियों (मेष, सिंह, धनु) का प्रथम तारा अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गये हैं और गण्डमूल में शामिल हो गये हैं।
√●चीन के ज्योतिषियों ने 4 जुलाई, 1054 को वृषभ राशि मण्डल में एक सुपरनोवा विस्फोट देखा था। जो बाद में अदृश्य हो गया। उस सुपर नोवा विस्फोट से बिखरी सामग्री क्रेब नेबुला या कर्क नीहारिका के रूप में फैल गई। कर्क राशि के अन्तर्गत आने वाली इस नीहारिका के नक्षत्रों का अध्ययन आज किया जा रहा है। इस नीहारिका के केन्द्र भाग से प्रति सेकण्ड 33 पल्स रेडियो आवृत्ति प्रसारित हो रही है और यह एक आश्चर्यजनक वैज्ञानिक सूचना थी। खगोल शास्त्रियों ने ऐसे आकाशीय पिण्डों को पल्सर (Pulsating Radio Sources) नाम दिया। कर्क राशि से अत्यधिक रेडियो तरंगें जारी होने के कारण इस राशि के पुष्य जैसे नक्षत्र अत्यंत ऊर्जावान हो गये हैं इस कारण से इस राशि के अन्तर्गत आने वाले नक्षत्र राज पुष्य में शुरू किए गये कार्य अत्यंत ऊर्जावान सिद्ध होते हैं। परन्तु यह भी सत्य है कि वृषभ राशि से कर्क राशि पर्यन्त अनन्त ऊर्जा के स्रोत इन नक्षत्र मण्डलों की ऊर्जा काम ऊर्जा को भी बढ़ाते हैं। वृषभ चन्द्रमा की उच्च राशि है, जैमिनी ऋषि ने मिथुन राशि में दूसरे विवाह के संकेत ढूँढे हैं तथा कर्क राशि भी चन्द्रमा की है और पुष्य नक्षत्र भी कर्क में हैं जिसके कारण विवाह निष्फल होते माने गये। चन्द्रमा स्वयं को चंचल चित्त का माना गया है और गुरु पत्नी तारा के अपहरण का आरोप उन पर है।
√●●वैदिक ऋषियों को इन नक्षत्र मण्डलों का गहरा ज्ञान था और इसलिए उन्होंने तदनुसार ही प्रावधान किए और धर्मभीरू भारतीय जनता को समझाने के लिए इनसे सम्बन्धित पुराण कथाओं की रचना की।
. 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
♨️ ⚜️ 🕉🌞 🌞🕉 ⚜🚩
🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱




