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पञ्चाङ्ग - 09-01-2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक -09 जनवरी 2026*
*🎈 दिन- शुक्रवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शरद*
*🎈 मास - माघ मास*
*🎈 पक्ष -  कृष्ण पक्ष*
*🎈तिथि-    सप्तमी    अहोरात्र*
तत्पश्चात्  अष्टमी*
*🎈 नक्षत्र - उत्तर फाल्गुनी    13:39:53*am तत्पश्चात्         हस्त*
*🎈 योग    - शोभन    16:54:36* pm तत्पश्चात्  अतिगंड*
*🎈करण    -     विष्टि भद्र    19:38:40pm तक
 तत्पश्चात्     बव*
*🎈राहुकाल -हर जगह का अलग है- 11:24:am to 12:42 pm तक (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈चन्द्र राशि-कन्या*
*🎈सूर्य राशि-     धनु*
*🎈सूर्योदय - :07:27:33am*
*🎈सूर्यास्त -    17:57:01pm* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:38 ए एम से 06:32 ए एम ए एम से 06:29 ए एम तक*(नागौर 
राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:21 पी एम से 01:03 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:15 ए एम, जनवरी 10 से 01:09 ए एम, जनवरी 10
*🎈    अमृत काल-    01:01 पी एम से 02:28 पी एम*
*🎈    रवि योग-    07:26 ए एम से 01:40 पी एम*
*🎈 व्रत एवं पर्व- सप्तमी व्रत*
*🎈विशेष - माघ मास महात्म्य *
कल से माघ मास प्रयागराज में कल्पवास*
kundli

 
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    *🛟चोघडिया, दिन🛟*
   नागौर, राजस्थान, (भारत)    
   मानक सूर्योदय के अनुसार।

*🛟*चर - सामान्य07:26 ए एम से 08:45 ए एम*

  *🛟लाभ - उन्नति-08:45 ए एम से 10:04 ए एम*

  *🛟अमृत - सर्वोत्तम-10:04 ए एम से 11:23 ए एम*वार वेला*

  *🛟काल - हानि-11:23 ए एम से 12:42 पी एम*काल वेला*

  *🛟शुभ - उत्तम-12:42 पी एम से 02:01 पी एम*

  *🛟रोग - अमंगल-02:01 पी एम से 03:20 पी एम*

  *🛟उद्वेग - अशुभ-03:20 पी एम से 04:39 पी एम*

   *🛟चर - सामान्य-04:39 पी एम से 05:58 पी एम*
    
        *🛟चोघडिया, रात्🛟*
  
 *🛟 रोग - अमंगल 05:58 पी एम से 07:39 पी एम*

 *🛟 काल - हानि-07:39 पी एम से 09:20 पी एम*

 *🛟 लाभ - उन्नति-09:20 पी एम से 11:01 पी एम काल रात्रि*

 *🛟 उद्वेग - अशुभ-11:01 पी एम से 12:42 ए एम, जनवरी 10*

 *🛟 शुभ - उत्तम-12:42 ए एम से 02:23 ए एम, जनवरी 10*

 *🛟 अमृत - सर्वोत्तम-02:23 ए एम से 04:04 ए एम, जनवरी 10*

 *🛟 चर - सामान्य-04:04 ए एम से 05:45 ए एम, जनवरी 10*

 *🛟 रोग - अमंगल-05:45 ए एम से 07:26 ए एम, जनवरी 10*

     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
🌷 ..# 💐🍁🍁✍️ बुधाष्टमी का व्रत बहुत महत्व होता है.| #🌕 👉 
👉🦚✨❤️💐 🌼🪔🌷❤️💐 🌼🪔√#💕🌙 🐐 🍁  :-❤️💐🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉

*बुधाष्टमी का व्रत बहुत महत्व होता है. ये व्रत सफलता दिलाने में बहुत सहायक बनता है जिनमें व्यक्ति को साहस और शौर्य की अधिक आवश्यकता होती है. धर्मराज, माँ दुर्गा और भगवान शिव की शक्ति के लिए भी बुधाष्टमी का व्रत बहुत महत्व होता है. इस व्रत की ऊर्जा का प्रवाह व्यक्ति को जीवन शक्ति और विपदाओं से आगे बढ़ने की क्षमता देता है. जिस पक्ष में बुधाष्टमी का अवसर हो उस दिन यह सिद्धि का योग बनाता है._* 
*_ बुध अष्टमी तिथि में किसी पर विजय प्राप्ति करना उत्तम माना गया है. यह विजय दिलाने वाली तिथि है, इस कारण जिन भी चीजों में व्यक्ति को सफलता चाहिए वह सभी काम इस तिथि में करे तो उसे सकारात्मक फल मिल सकते हैं. यह दिन बुरे कर्मों के बंधन को दूर करता है. इस दिन लेखन कार्य, घर इत्यादि वास्तु से संबंधित काम, शिल्प निर्माण से संबंधी काम, अस्त्र-शस्त्र धारण करने वाले काम का आरम्भ भी सफलता देने वाला होता है._*

*_बुध अष्टमी पूजन विधि_* 
*_ बुध अष्टमी का व्रत करने के लिए पहले से ही सभी तैयारियों को कर लेना भी सही होता है. व्रत के पहले दिन व्रती को चाहिए कि वह सात्विकता और आध्यात्मिकता का आचरण करना चाहिए. बुधअष्टमी के दिन व्रती को चाहिए की वह ब्रह्म मुहूर्त समय पर उठना चाहिए. प्रातः काल उठकर स्नान कार्य करना चाहिए. यदि संभव हो सके तो इस दिन किसी पवित्र नदी या सरोवर इत्यादि में स्नान करना चाहिए. पर अगर ये संभव न हो सके तो घर पर ही स्नान कार्य करना चाहिए. घर पर अपने नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करना गंगा स्नान जैसा फल दिलाने वाला होता है. अपने नित्य कार्यों को कर लेने के बाद व्रती को पूजा का संकल्प लेना चाहिए._*

..*_पूजा स्थान पर एक पानी से भरा कलश स्थापित करना चाहिए. कलश के पानी में गंगाजल भरना चाहिए. इस कलश को घर के पूजा स्थान में स्थापित करना उत्तम होता है. बुधाष्टमी के दिन बुध देव व बुध ग्रह का पूजन किया जाता है. पूजा में बुधाष्टमी कथा का पाठ भी करना उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है._*

*_ भक्त को चाहिए की इस दिन व्रत का संकल्प भी धारण करे. बुधाष्टमी के व्रत के अवसर पर संपूर्ण दिन मानसिक, वाचिक और आत्मिक शुद्धि का पालन करना चाहिए. इस भगवान के समक्ष धूप-दीप, पुष्प, गंध इत्यादि को अर्पित करना चाहिए. भगवान को विभिन्न पकवान और मेवे फल इत्यादि का अर्पित करने चाहिए. बुध भगवान की पूजा विधिवत तरीके से संपन्न करनी चाहिए. पूजा अर्चना करने के पश्चात भगवान बुध देव को को भोग लगाना चाहिए. पूजा समाप्ति के बाद भगवान का प्रसाद सभी लोगों में वितरित करना चाहिए._*

.     💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱

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