*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 11 जनवरी 2026*
*🎈 दिन- रविवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शरद*
*🎈 मास - माघ मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈तिथि- अष्टमी 10:19:35 तक तत्पश्चात् नवमी*
*🎈 नक्षत्र - चित्रा 18:11:11 तक तत्पश्चात् स्वाति *
*🎈 योग - सुकर्मा 17:25:57*pm तत्पश्चात् धृति*
*🎈करण - कौलव 10:19:35 am तक तत्पश्चात् बालव*
*🎈राहुकाल -हर जगह का अलग है- 04:40am to 05:59 pm तक (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈चन्द्र राशि - तुला *
*🎈सूर्य राशि- धनु*
*🎈सूर्योदय - :07:27:35am*
*🎈सूर्यास्त - 17:58:31pm*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:39 ए एम से 06:32 ए एम*(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:22 पी एम से 01:04 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:16 ए एम, जनवरी 12 से 01:10 ए एम, जनवरी 12*
*🎈 अमृत काल- 11:07 ए एम से 12:53 पी एम*
*🎈 व्रत एवं पर्व- ......नवमी*
*🎈विशेष माघ मास महात्म्य *
कल से माघ मास प्रयागराज में कल्पवास*
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*🛟चोघडिया, दिन🛟*
नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।
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*🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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√●*🛡️नव ग्रह में जिस प्रकार #सूर्य_को_राजा का दर्जा प्राप्त है उसी प्रकार चंद्र को स्त्री ग्रह होने के कारण रानी का पद मिला है। ★ 🔅👇
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★★★★
√●*🇯🇵जी हां
🇯🇵नमस्कार
🇯🇵बधाई
🇯🇵अभिनंदन
▪️बात करेंगे #सम्पूर्ण_चंद्र_की
📝▪️ज्योतिष में चंद्र को सूर्य की अर्धांगिनी भी कहा जाता है।
▪️चन्द्र को कालपुरुष का मन कहा गया है इसी लिए कहा जाता है कि "चंद्रमा मनसो जातः"फलित ज्योति में चंद्र के आधार पर ही जातक के मन का पता लगाया जाता है। चंद्रमा के लिये बृहद पाराशर होरा शास्त्र में कहा गया है।
"बहुवातकफ: प्राज्ञश्चन्द्रों वृततनुर्द्विज।
शुभदृक मधु वाक्यश्च चंचलो मदनातुर:।।
▪️अर्थात चंद्रमा वायु, कफयुक्त प्रकृति वाला, बुद्धिमान, गोल शरीर, सुन्दर नेत्र व मीठे वचन बोलने वाला, चंचल व कामी है।
🛡️चंद्रमा एक सौम्य ग्रह है।
▪️यह कर्क राशि का स्वामी है। चंद्र जल तत्व प्रधान, वायव्य,(उत्तर-पश्चिम) दिशा का स्वामी है।यह रात्रि बलि, सत्व गुणी, एवं चर संज्ञक है। यह श्वेत, शुभ एव गौर वर्ण का, वात-कफ प्रकृति,सत्व गुण प्रधान, चंचल स्वाभाव वाला तरुण स्त्री ग्रह है।
▪️यह ग्रह वायव्य दिशा, सोमवार, दक्षिणायन, चतुर्थ भाव में बलि होता है।
▪️पृथ्वी के सबसे नजदीक भ्रमणशील होने के कारण शास्त्रों में चंद्र को मन (अन्तः करण) का प्रतिक (चन्द्रमा मनसो जातः) कहा गया है। चन्द्रमा को नैसर्गिक तौर पर सूर्य, मंगल, बुध, गुरु का मित्र, तथा शुक्र, शनि व् राहु का शत्रु माना जाता है। चौथे भाव के कारक चंद्र को संवेदनाओं, माता धन एवं स्त्री का कारक माना जाता है।
▪️इसके अतिरिक्त चन्द्रमा से स्त्री सुख, सौंदर्य, भावनात्मकता, कल्पनाशक्ति, ज्योतिष् में रूचि, सम्पति, यात्रा, राज्य कृपा, चावल, श्वेत वस्त्र, लवण आदि का भी विचार किया जाता है।उच्च राशिस्थ एवं शुक्ल पक्षीय पूर्ण चंद्र शुभ तथा नीच राशिस्थ या कृष्ण पक्ष षष्ठी से अमावस तक का चंद्र एवं राहु आदि पाप ग्रह से युत या दृष्ट चंद्र क्षीण एवं अशुभ फल माना जाता है।
▪️चंद्र सौम्य एवं शीतल प्रकृति वाला ग्रह है। इसके अन्य नामो में निशापति, मृगांक, अम्बु, शीतरश्मी, शीतद्युति, राकापति, मयंक, रजनीश, अमृत, सोम, शशधर, हिमकर, तारापति, इंदु, कुमुद, जलज व निशाकर है।
▪️चंद्र गौर वर्ण वायव्य दिशा व वर्षा ऋतु का स्वामी है। इसका क्रीड़ा स्थल जलीय क्षेत्र जैसे नदी, तालाब वैश्य वर्ण का, सत्व, गुणी धातु रक्त है। चंद्र के अधिष्ठाता देव वरुण है। रस लवण तथा शुक्ल पक्ष रात्रि व दक्षिणायन में बलि होता है।
शेष भाग आगे........(२)
. 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱



