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पञ्चाङ्ग 02 अप्रैल 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक 02 अप्रैल 2026*
*🎈 वार-  गुरुवार *
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈 मास - चैत्र मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष,*
*🎈तिथि-     पूर्णिमा    07:40:49* तत्पश्चात्
तिथि    प्रथम*
*🎈 नक्षत्र -     हस्त    17:37:42* तक तत्पश्चात्     चित्रा*
*🎈योग    - ध्रुव    14:18:32*तक तत्पश्चात् व्याघात*
*🎈करण    -     बव    07:40:49* तक तत्पश्चात्  बालव होगा।
*🎈राहुकाल -02:12 pm से  03:45pm(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
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*🎈चन्द्र राशि-     कन्या*
*🎈सूर्य राशि-       मीन*
*🎈 सूर्योदय -   06:26:05*
*🎈सूर्यास्त -        18:51:31*pm* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- दक्षिण दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:53 ए एम से 05:39 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:14 पी एम से 01:04 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:15 ए एम, अप्रैल 03 से 01:01 ए एम, अप्रैल 03*
*🎈 अमृत काल    -11:18 ए एम से 12:59 पी एम*
*🎈 व्रत एवं पर्व-  हनुमान जयंती 2apr 26 .को व्रत* sahit जयंती मनाई जायेगी.
*🎈विशेष चैत्र मास महात्म्य *
 🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💥सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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       *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day


          नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟


       🛟चोघडिया, रात्🛟*
night

*🛟 
 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

👣🕉️ 🌹🌹 सर्वार्थ सिद्धि योग में हनुमान जन्मोत्सव, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, आरती, चालीसा, पारण का समय सहित 
 चैत्र मास का पूर्णिमा तिथि को हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। हनुमान जयंती
प्रतिवर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जी का जन्म हुआ था। शिवपुराण में बताया गया है कि भगवान शिव ने रुद्र अवतार के रूप में हनुमान जी को जन्म दिया। उनका जन्म माता अंजना और वानरराज केसरी के यहां हुआ था। हालांकि कई लोगों का मानना है कि हनुमान जी का जन्म कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ था। इसलिए इस दिन भी हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। चैत्र पूर्णिमा के दिन जन्मे हनुमान जी की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ व्रत रखने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन बजरंगबली की पूजा करने से सुख-समृद्धि, धन-संपदा, ऐश्वर्य की प्राप्ति हो सकती है। रोग, दोष और भय से मुक्ति मिल सकती है। इसके अलावा श्री राम के साथ माता सीता की भी कृपा प्राप्त हो सकती है। आइए जानते हैं हनुमान जयंती का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, कथा, चालीसा, भोग, आरती सहित

हनुमान जयंती समय .
चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि आरंभ -1 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से
चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि समाप्त- 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर
हनुमान जयंती 2026 तिथि- 2 अप्रैल 2026, गुरुवार

हनुमान जयंती का शुभ मुहूर्त
पहला मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 26 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 03 मिनट तक
दूसरा मुहूर्त-  को 6 बजकर 26 amमिनट से लेकर 7 बजकर 59 मिनट amतक
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 53 मिनट से सुबह 5 बजकर 44 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:14 बजे से लेकर दोपहर 01 बजकर 04 मिनट तक

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त या फिर सूर्योदय से पहले उठकर नित्य कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद स्वच्छ कपड़े धारण कर लें। हो सके तो लाल रंग के कपड़े पहनें, क्योंकि ये रंग हनुमान जी को अति प्रिय है। इसके बाद सबसे पहले एक लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाकर उसमें हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद जल से आचमन करके शुद्धि करें। फिर फूल, माला, वस्त्र, लाल या गुलाब के फूल, केसर युक्त चंदन, माला, चोला, जनेऊ और लाल लंगोट अर्पित करें। इसके साथ ही चमेली के तेल में लाल सिंदूर मिलाकर तिलक लगाएं। रूई में इत्र लगाकर भी चढ़ा सकते हैं। फिर भोग लगाएं। भोग के बाद घी या चमेली के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद हनुमान चालीसा, मंत्र, कथा, बजरंग बाण का पाठ करने के बाद हनुमान जी की आरती कर लें। अंत में भूल चूक के लिए माफी मांग लें।

हनुमान जन्मोत्सव पर करें बजरंगबली के इन नामों का जाप
ॐ हनुमान, ॐ अंजनीसुत, ॐ वायुपुत्र, ॐ महाबल, ॐ रामेष्ठ ॐ फाल्गुनसखा , ॐ पिंगाक्ष , ॐ अमितविक्रम, ॐ उदधिक्रमण , ॐ सीताशोकविनाशन , ॐ लक्ष्मणप्राणदाता , ॐ दशग्रीवदर्पहा

श्री राम स्तुति: श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन
॥दोहा॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमनहरण भवभय दारुणं ।

नव कंज लोचन कंज मुखकर कंज पद कंजारुणं ॥१॥

कन्दर्प अगणित अमित छविनव नील नीरद सुन्दरं ।

पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचिनोमि जनक सुतावरं ॥२॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानवदैत्य वंश निकन्दनं ।

रघुनन्द आनन्द कन्द कोशलचन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥

शिर मुकुट कुंडल तिलकचारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।

आजानु भुज शर चाप धरसंग्राम जित खरदूषणं ॥४॥

इति वदति तुलसीदास शंकरशेष मुनि मन रंजनं ।

मम् हृदय कंज निवास कुरुकामादि खलदल गंजनं ॥५॥

मन जाहि राच्यो मिलहि सोवर सहज सुन्दर सांवरो ।

करुणा निधान सुजान शीलस्नेह जानत रावरो ॥६॥

एहि भांति गौरी असीस सुन सियसहित हिय हरषित अली।

तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनिमुदित मन मन्दिर चली ॥७॥

॥सोरठा॥जानी गौरी अनुकूल सियहिय हरषु न जाइ कहि ।

मंजुल मंगल मूल वामअङ्ग फरकन लगे।रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास

हनुमानजी स्तुति,जय बजरंगी जय हनुमाना,रुद्र रूप जय जय बलवाना

,पवनसुत जय राम दुलारे,संकट मोचन सिय मातु के प्यारे ॥

जय वज्रकाय जय राम केरू दासा,हृदय करतु सियाराम निवासा,

न जानहु नाथ तोहे कस गोहराई,राम भक्त तोहे राम दुहाई ॥

विनती सुनहु लाज रखहु हमारी,काज कौन जो तुम पर भारी,

अष्टसिद्धि नवनिधि केरू भूपा,बखानहु कस विशाल अति रूपा ॥

धर्म रक्षक जय भक्त हितकारी,सुन लीजे अब अरज हमारी,

भूत प्रेत हरहु नाथ बाधा,सन्तापहि अब लाघहु साधा ॥

मान मोर अब हाथ तुम्हारे,करहु कृपा अंजनी के प्यारे,

बन्दतु सौरभ दास सुनहु पुकारी,मंगल करहु हे मंगलकारी ॥

हनुमान जी की स्तुति
हनुमानजी स्तुति,जय बजरंगी जय हनुमाना,

रुद्र रूप जय जय बलवाना,पवनसुत जय राम दुलारे,

संकट मोचन सिय मातु के प्यारे ॥

जय वज्रकाय जय राम केरू दासा,हृदय करतु सियाराम निवासा,

न जानहु नाथ तोहे कस गोहराई,राम भक्त तोहे राम दुहाई ॥

विनती सुनहु लाज रखहु हमारी,काज कौन जो तुम पर भारी,

अष्टसिद्धि नवनिधि केरू भूपा,बखानहु कस विशाल अति रूपा ॥

धर्म रक्षक जय भक्त हितकारी,सुन लीजे अब अरज हमारी,

भूत प्रेत हरहु नाथ बाधा,सन्तापहि अब लाघहु साधा ॥

मान मोर अब हाथ तुम्हारे,करहु कृपा अंजनी के प्यारे,

बन्दतु सौरभ दास सुनहु पुकारी,मंगल करहु हे मंगलकारी ॥
हनुमान जयंती पर करें ये उपाय 
हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी की विधिवत पूजा करने के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करें। इसके साथ ही सरसों के तेल के दीपक में काला तिल और एक सिक्का डालकर अपनी छाया दिखाकर शनि मंदिर में रख दें। ऐसा करने से कुंडली में मौजूद शनि साढ़े साती और ढैया के दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं।

 हनुमान जयंती पर करें इन चौपाईयों का पाठ
हनुमान जयंती पर इन चौपाईयों का पाठ करना लाभकारी माना जाता है। इन चौपाईयों का पाठ करने से हनुमान जी अति प्रसन्न हो सकते हैं।

1- नासै रोग हरै सब पीरा।

जपत निरंतर हनुमत बल बीरा।।

2- अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता।

अस बर दीन जानकी माता।।

3-विद्यावान गुनी अति चातुर।

रामकाज करीबे को आतुर।।

4- भीम रूप धरि असुर संहारे।

रामचंद्रजी के काज संवारे।।

 हनुमान जयंती 2026 पूजा विधि
हनुमान जन्मोत्सव पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें और यदि व्रत रख रहे हैं तो एक हाथ में फूल और थोड़ा सा अक्षत लेकर हनुमान जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा के लिए मंदिर या लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर रखें। जल से आचमन कर अपने आप को शुद्ध करें और फिर भगवान को गुलाब या अन्य फूल चढ़ाएं। इसके बाद सिंदूर लगाएं और चमेली का तेल, केसर युक्त चंदन, चोला, जनेऊ, लाल लंगोट आदि अर्पित करें। एक रूई में इत्र लगाकर भी चढ़ाएं। भोग के रूप में अपनी श्रद्धा अनुसार बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू, गुड़-भीगे चने की दाल आदि अर्पित करें, साथ ही तुलसी के पत्ते और पान का बीड़ा भी रखें। जल चढ़ाने के बाद घी या चमेली के तेल का दीपक जलाएं, अगरबत्ती और धूप जलाकर चालीसा, बजरंग बाण, व्रत कथा आदि कह लें।
हनुमान जन्मोत्सव पर करें इन मंत्रों का जाप 
हं हनुमंते नम:।

नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा

ॐ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।

ॐ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।

ॐ महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते. हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये।

नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल: अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।
चैत्र पूर्णिमा को हुआ था हनुमान जी का जन्म
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी का जन्म चैत्र पूर्णिमा के दिन हुआ था और इसे उनका वास्तविक जन्मदिन माना जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, बचपन में हनुमान जी को बहुत तेज भूख लगी थी और उन्होंने सूर्य को लाल फल समझकर निगलने का प्रयास किया। इसे देखकर देवराज इंद्र ने उन्हें वज्र से प्रहार किया, जिससे हनुमान जी मूर्छित हो गए। यह देखकर पवन देव अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने पूरे संसार में वायु प्रवाह रोक दिया। अंततः सभी देवताओं ने मिलकर हनुमान जी को पुनः जीवनदान दिया और तब जाकर  श्रृष्टि में हनुमान जी का परचम लहराया।
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.     💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥

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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱
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