*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 20 मई 2026*
*🎈 वार- बुधवार*
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास प्रारंभ*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - चतुर्थी 11:06:11*
तत्पश्चात्* पंचमी*
*🎈 नक्षत्र - नक्षत्र आद्रा 06:11:00 तत्पश्चात् नक्षत्र पुनर्वसु 28:11:10*
*🎈योग - शूल 14:08:59* तक तत्पश्चात् गण्ड*
*🎈करण - विष्टि भद्र 11:06:11* तक तत्पश्चात् बव*
*🎈राहुकाल -12:32pm से 02:13pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि कर्क *
*🎈सूर्य राशि- वृषभ *
*🎈 सूर्योदय - 05:45:27*
*🎈 सूर्यास्त - 19:18:15*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:21 ए एम से 05:03 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं*
*🎈अमृत काल- 02:00 ए एम, मई 21 से 03:28 ए एम, मई 21*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:11 ए एम, मई 21 से 12:52 ए एम, मई 21*
*🎈 रवि योग- रवि योग 05:45 ए एम से 06:12 ए एम *
04:12 ए एम, मई 21 से 05:44 ए एम, मई 21*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण. चतुर्थी व्रत द्वितीया चंद्र दर्शन आज होगा (मासिक व्रत )*
*🎈विशेष - चतुर्थी के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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🔱🌹🌸 🌹 💢💢किसी भी साधना को सिद्ध करने में 21 दिन से ज्यादा समय नहीं लगता। तीन सूत्र अपनाना पड़ता है।
इस मंत्र के लिए तीनों क्रियाओं (अंगीभूत न्यास, प्रायश्चित न्यास और दीपनी क्रिया) को करने का बिल्कुल सटीक और व्यावहारिक तरीका नीचे दिया गया है:-
1. अंगीभूत न्यास (इस मंत्र के साथ)अपने आसन पर सीधे बैठें। इस मंत्र "ॐ क्रीं कालिकायै नमः" का एक बार उच्चारण करें और शरीर के पहले अंग (पैर के तलवे) को छुएं। फिर दोबारा मंत्र बोलें और दूसरे अंग को छुएं। इसी तरह ऊपर बताए गए सभी 24 अंगों को क्रम से स्पर्श करते हुए 24 बार मंत्र का उच्चारण करें।
2. प्रायश्चित न्यास (पहले दिन अक्षरों को जगाने की विधि)इस क्रिया के लिए आपके मंत्र "ॐ क्रीं कालिकायै नमः" को 5 मुख्य अक्षरों (बीज अक्षरों) में तोड़ा जाएगा। साधना के पहले दिन आपको हर एक अक्षर की एक-एक माला (108 बार) का जाप करना है:-
प्रथम अक्षर (ॐ): मन ही मन 'ॐ' का ध्यान करते हुए एक माला (108 बार) जपें।
द्वितीय अक्षर (क्रीं): 'क्रीं' ध्वनि पर ध्यान केंद्रित कर एक माला जपें।
तृतीय अक्षर (का): 'का' अक्षर का मानसिक उच्चारण करते हुए एक माला जपें।
चतुर्थ अक्षर (लिकायै): 'लिकायै' शब्द या इसके मुख्य स्वर पर ध्यान देकर एक माला जपें।
पंचम अक्षर (नमः): 'नमः' का ध्यान करते हुए एक माला का जाप करें।
नोट: यह क्रिया केवल पहले दिन की जाती है ताकि मंत्र का हर हिस्सा आपके भीतर शुद्ध रूप से स्थापित हो जाए।
3. दीपनी क्रिया (मंत्र को सीधा और उल्टा जपना)इस क्रिया में आपको सीधा मंत्र और उल्टा मंत्र मिलाकर एक माला (108 बार) का जाप करना होता है।
आपके मंत्र का सीधा और उल्टा रूप इस प्रकार होगा:सीधा क्रम (लोम):-
ॐ क्रीं कालिकायै नमः
उल्टा क्रम (विलोम): नमः कालिकायै क्रीं ॐ
जप करने का प्रैक्टिकल तरीका:-
पहले बोलें: "ॐ क्रीं कालिकायै नमः" (यह 1 हुआ)
फिर तुरंत बोलें: "नमः कालिकायै क्रीं ॐ" (यह 2 हुआ)
फिर बोलें: "ॐ क्रीं कालिकायै नमः" (यह 3 हुआ)
इसी तरह अदल-बदल कर (सीधा फिर उल्टा) बोलते हुए कुल 108 बार यानी एक माला पूरी करें। यह क्रिया मंत्र की शक्ति को पूरी तरह एक्टिवेट कर देगी।
"ॐ क्रीं कालिकायै नमः" साधना को 21 दिनों में सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए रोज़ की जाने वाली मालाओं की संख्या और भोग (प्रसाद) का नियम नीचे दिया गया है:-
1. सामान्य गृहस्थ या शुरुआत करने वाले साधकों के लिए 21 दिनों का नियम इस प्रकार रखा जाता है:-
न्यूनतम (कम से कम) नियम:- आपको रोज़ कम से कम 11 माला या 21 माला का संकल्प लेना चाहिए।
संख्या का संकल्प:- साधना के पहले दिन हाथ में जल लेकर संकल्प लें कि "मैं 21 दिनों तक रोज़ X संख्या में माला का जाप करूँगा/करूँगी।
"नियम: जितनी माला आप पहले दिन तय करेंगे, 21वें दिन तक रोज़ उतनी ही माला करनी होगी। संख्या को बीच में कम नहीं किया जा सकता।
2. महाकाली का भोग/प्रसाद महाकाली को भाव और पवित्रता प्रिय है।
साधना के दौरान रोज़ दीपक के सामने यह भोग अर्पित करें:-
दैनिक भोग (रोज़ के लिए): रोज़ माता को दो लौंग के जोड़े (साबुत लौंग, जो टूटी न हो) और थोड़ा सा गुड़ या बताशा अर्पित करें।
विशेष भोग (शनिवार या अष्टमी के दिन):- इस दिन माता को हलवा-पूरी या कोई भी लाल रंग की मिठाई (जैसे बर्फी या पेड़ा) अर्पित करें।
अनिवार्य वस्तु:- पूजा स्थान पर रोज़ एक साफ़ बर्तन में ताज़ा जल का पात्र ज़रूर रखें।
3. रोज़ की साधना का पूरा क्रम (एक नज़र में)जब आप रोज़ रात को बैठेंगे, तो आपकी पूजा का क्रम इस प्रकार होना चाहिए:-
आचमन और दीप प्रज्वलन:- हाथ धोकर बैठें और सरसों के तेल या घी का दीपक जलाएं।
गुरु/गणेश स्मरण:- सबसे पहले 1 माला गुरु मंत्र की या "ॐ गं गणपतये नमः" की करें ताकि साधना निर्विघ्न पूरी हो।
अंगीभूत न्यास: जो 24 अंगों को छूने वाली क्रिया ऊपर बताई गई है, उसे करें (रोज़ करें तो उत्तम, नहीं तो पहले और 21वें दिन अनिवार्य)।
मूल मंत्र जप:- अपने संकल्प के अनुसार (11 या 21 माला) "ॐ क्रीं कालिकायै नमः" का जाप करें।
दीपनी क्रिया:- मूल मंत्र के बाद 1 माला सीधे-उल्टे क्रम वाली करें।
क्षमा प्रार्थना: अंत में हाथ जोड़कर कहें कि "हे माँ, जाने-अनजाने में हुई भूलों को क्षमा करें और मेरी साधना स्वीकार करें।"
21 दिनों की साधना के अंतिम दिन (21वें दिन) पूर्णाहुति और हवन करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। इसी से आपकी साधना पूरी तरह सिद्ध और लॉक होती है।इसकी बिल्कुल सरल और सटीक विधि नीचे दी गई है:-
1. हवन सामग्री की तैयारी हवन के लिए आपको निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होगी:-
आम की सूखी लकड़ियाँ (समिटा)तैयार हवन सामग्री (बाज़ार में मिलने वाला पैकेट)शुद्ध गाय का घी काले तिल और जौ (इन्हें हवन सामग्री में मिला लें, महाकाली की पूजा में काले तिल बहुत शुभ माने जाते हैं)गुड़ और मखाने
2. हवन की सरल विधि साधना के अंतिम दिन, रोज़ की तरह अपनी तय मालाओं का जाप पूरा करने के बाद उसी आसन पर बैठे-बैठे हवन कुंड तैयार करें।
अग्नि प्रज्वलन:- आम की लकड़ियों को कपूर की मदद से जलाएं।
हवन की संख्या:- आपने रोज़ जितनी माला का जाप किया है, उसका दसवां हिस्सा (10%) हवन में आहुति देना अनिवार्य माना जाता है।
उदाहरण: यदि आपने रोज़ 11 माला जप किया है, तो आपको अंतिम दिन 110 आहुतियाँ देनी होंगी (लगभग 1 माला से थोड़ी ज़्यादा)।
आहुति मंत्र:- हर बार चम्मच या उंगलियों (अंगूठे, मध्यमा और अनामिका) में हवन सामग्री और थोड़ा घी लेकर अग्नि में डालें और बोलें:👉 "ॐ क्रीं कालिकायै नमः स्वाहा" (हर बार अंत में स्वाहा ज़रूर बोलें)।
3. पूर्णाहुति जब आपकी तय संख्या (जैसे 110 बार) पूरी हो जाए, तो एक साबुत सूखा नारियल (गोला) लें।उस गोले के ऊपर थोड़ा सा घी, कलावा (मौली), और एक पान का पत्ता रखें।इसे अपने दोनों हाथों में पकड़कर महाकाली का ध्यान करें और कहें, "हे माँ, मेरी यह 21 दिनों की साधना आपके चरणों में समर्पित है, इसे स्वीकार करें।
"इसके बाद उस पूरे गोले को जलती हुई हवन की अग्नि के बिल्कुल बीच में रख दें। इसे ही 'पूर्णाहुति' कहते हैं।
4. साधना समाप्ति के बाद क्या करें।
आरती:- पूर्णाहुति के बाद खड़े होकर महाकाली की आरती करें।
साधना का विसर्जन:- अगले दिन सुबह जब हवन कुंड की राख (भस्म) पूरी तरह ठंडी हो जाए, तो उसे किसी पवित्र पेड़ (जैसे पीपल या बरगद) की जड़ में डाल दें या बहते जल में प्रवाहित कर दें। उसे कूड़े में न फेंकें।
ब्राह्मण या कन्या भोज:- साधना के पूर्ण होने की ख़ुशी में किसी छोटी कन्या को भोजन कराएं या कुछ मीठा दान करें।
विशेष ध्यान दें: यह जानकारी केवल ज्ञान और आध्यात्मिक समझ बढ़ाने के उद्देश्य से साझा की जा रही है। महाकाली की 'क्रीं' मंत्र वाली साधनाएँ अत्यंत तीव्र और शक्तिशाली होती हैं। इसलिए किसी भी साधक को यह साधना शुरू करने से पहले किसी योग्य गुरु या मार्गदर्शक की अनुमति और निर्देशन अवश्य लेना चाहिए। बिना तैयारी या नियमों के उल्लंघन से साधना के विपरीत परिणाम भी हो सकते हैं।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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🙏हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱




