*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 18 मई 2026*
*🎈 वार- सोमवार*
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास प्रारंभ*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - द्वितीया 17:52:40*
तत्पश्चात्* तृतीया*
*🎈 नक्षत्र - रोहिणी 11:31:09*
तक तत्पश्चात् मृगशीर्षा*
*🎈योग - सुकर्मा 21:46:57* तक तत्पश्चात् धृति*
*🎈करण - बालव 07:45:33* तक तत्पश्चात् कौलव*
*🎈राहुकाल -07:28am से 09:09am (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि- वृषभ* til 22:04:02*
*🎈चन्द्र राशि मिथुन from 22:04:02
*🎈सूर्य राशि- वृषभ *
*🎈 सूर्योदय - 05:46:47*
*🎈 सूर्यास्त - 19:15:58*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:22 ए एम से 05:04 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:05 पी एम से 12:59 पी एम*
*🎈अमृत काल- 08:44 ए एम से 10:08 ए एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:11 ए एम, मई 19 से 12:52 ए एम, मई 19*
*🎈 अमृत सिद्धि योग 11:32 ए एम से 05:45 ए एम, मई 19*
*🎈 सर्वार्थ सिद्धि योग- पूरे दिन*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण अमावस्या व्रत शनि जयंती आज होगा (मासिक व्रत )*
*🎈विशेष - अमावस्या के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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🔱🌹🌸 🌹 💢💢अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में पुराणों के अनुसार 33 की संख्या में वस्तुओं का दान (जैसे फल, मिठाई, या 33 वस्तुएं) श्रेष्ठ माना गया है, जो सोने के दान के बराबर पुण्य देता है। विशेष रूप से पीले वस्त्र, अन्न (खीर), घी, दीपदान और मालपुआ का दान भगवान विष्णु की कृपा और सुख-समृद्धि लाता है।
मालपुआ का दान क्यों अधिक उत्तम है
मालपुआ ही एक ऐसी मिठाई है जिसमें सबसे ज्यादा छिद्र होते हैं।
हमारे पाप भी छिद्रों के समान है। क्षय तिथियों से बनने वाला पुरुषोत्तम मास, छिद्र युक्त है। अतः इसमें मालपुये का दान सर्वाधिक प्रभाव शाली होता है।
जन्म से पंचम तक भाव के पाप छठे भाव मे। छठे, सप्तम के पाप अष्टम भाव में, अष्टम से एकादश भाव के पाप द्वादश भाव मे रहते है। यह तीनों भाव को छिद्र कहते है। अतः ज्योतिष के त्रिक भावों के लिए इससे सुंदर उपाय कुछ नहीं। पाप नष्ट होते ही वैकुंठ की प्राप्ति की ओर अग्रसर।
*“प्रत्यपूपं तु यावन्ति छिद्राणि पृथिवीपते। तावद्वर्षसहस्राणि वैकुण्ठे वसते नरः।।”*
हर एक मालपूआ में जितने छिद्र होते हैं मनुष्य उतने वर्ष पर्यन्त वैकुण्ठ लोक में जाकर वास करता है ।
निर्णयसिन्धु के अनुसार इस दान से पृथ्वीदान का फल मिलता है *“उद्दिश्यापूपदानेन पृथ्वीदानफलं लभेत्”*
इस ३३ संख्या के सम्बन्ध में २ मत हैं :
१. अधिक मास ३३ मास में एक बार आता है
२. अधिकमास में ३३ देवता प्रधान हैं - अष्टवसु (८), एकादश रूद्र (११), द्वादश आदित्य (१२), वषट्कार (१), प्रजापति (१)
❤️#क्यो होता है #मानसिक तनाव ??
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हम हमेशा यह सोचते हैं कि क्या करें जिससे #जिंदगी से मानसिक तनाव दूर हो जाए. कुछ तो ऐसा हो जाए जिससे हमारी जिंदगी तनाव रहित बीते
#इसके लिए हम कई कोशिशें भी करते हैं जो कामयाब नहीं हो पातीं. इसके पीछे एक बड़ा कारण है तनाव के #ग्रहों का हम पर पड़ने वाला असर होता है
#तनाव मन की एक अवस्था है. ज्योतिष में तनाव का सीधा संबंध चन्द्रमा से होता है #चन्द्रमा की स्थितियों से अलग-अलग तरह के तनाव होते हैं. कभी तनाव वास्तविक होता है, तो कभी काल्पनिक. तनाव होता है
#चंद्रमा का संबंध लग्न या बारहवें भाव से हो, तो संतान के विवाह संबंधी तनाव होता है
#अगर कुंडली में चन्द्रमा अग्नि राशिमें हो तो नौकरी व कारोबार में तनाव होता है. सूर्य का चन्द्रमा से संबंध हो तो नौकरी या कारोबार में तनाव रहता है
#चन्द्रमा आठवें भाव में हो तो सेहत संबंधी तनाव होता है, चंद्रमा अकेला हो तो भी सेहत संबंधी तनाव रहता है.....
#सूर्य का चन्द्रमा से संबंध हो तो नौकरी या कारोबार में तनाव रहता हैआदमी नौकरी या #कारोबार बदलता रहता है. अपने करियर को लेकर तनाव में रहता है......
#वैवाहिक जीवन में तनाव कुंडली में चंद्रमा के साथ बृहस्पति कमजोर होता है ऐसे में #महिलाएं वैवाहिक जीवन को लेकर तनाव में रहती हैं.
#चन्द्रमा के साथ शुक्र कमजोर हो तो पुरुष इस तनाव से घिरे रहते हैं।।
🙇#जयश्रीसीताराम🙇
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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‼️अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱




