*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 21 मई 2026*
*🎈 वार- गुरुवार*
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास प्रारंभ*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - पंचमी 08:25:59*
तत्पश्चात्* षष्ठी*
*🎈 नक्षत्र - पुष्य 26:48:27* तत्पश्चात् नक्षत्र आश्लेषा*
*🎈योग - गण्ड 10:57:29* तक तत्पश्चात् वृद्वि*
*🎈करण - बालव 08:25:59* तक तत्पश्चात् कौलव*
*🎈राहुकाल -02:13pm से 03:55pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि कर्क *
*🎈सूर्य राशि- वृषभ *
*🎈 सूर्योदय - 05:45:27*
*🎈 सूर्यास्त - 19:18:15*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- दक्षिण दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:21 ए एम से 05:02 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:05 पी एम से 12:59 पी एम*
*🎈अमृत काल- 08:47 पी एम से 10:18 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:11 ए एम, मई 22 से 12:52 ए एम, मई 22*
*🎈गुरु पुष्य योग- 05:44 ए एम से 02:49 ए एम, मई 22
*🎈सर्वार्थ सिद्धि योग- 05:44 ए एम से 02:49 ए एम, मई 22*
*🎈अमृत सिद्धि योग 05:44 ए एम से 02:49 ए एम, मई 22
*🎈रवि योग 05:44 ए एम से 02:49 ए एम, मई 22*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण. चतुर्थी व्रत द्वितीया चंद्र दर्शन आज होगा (मासिक व्रत )*
*🎈विशेष - चतुर्थी के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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🔱🌹🌸💢यज्ञ और याग में अंतर💢🔱
सामान्य बोलचाल में 'याग' और 'यज्ञ' को एक ही मान लिया जाता है, लेकिन वैदिक परंपरा में दोनों के बीच एक स्पष्ट और सूक्ष्म अंतर है।
यज्ञ एक व्यापक शब्द है, जबकि याग इसका एक विशिष्ट (विशेष) रूप है。
विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:
यज्ञ अर्थ:
'यज्ञ' शब्द संस्कृत की 'यज्' धातु से बना है, जिसका अर्थ है 'पूजन, संगतिकरण और दान'।
यह एक व्यापक और सामान्य प्रक्रिया है।
उद्देश्य:
यह मुख्य रूप से लोक कल्याण, देवताओं को प्रसन्न करने और ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए किया जाता है।
स्वरूप:
यज्ञ बड़े स्तर पर होते हैं और इसे करने के लिए विशेष योग्य पुरोहितों, वेदमंत्रों, आहुति (घी, अन्न आदि) और दक्षिणा की आवश्यकता होती है।
उदाहरण के लिए: अश्वमेध यज्ञ।
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याग अर्थ:
'याग' भी 'यज्' धातु से ही निकला है, लेकिन यह एक संकीर्ण और अधिक विशिष्ट नाम है।
उद्देश्य:
यह किसी विशिष्ट देवता की कृपा प्राप्त करने या किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए किया जाने वाला व्यक्तिगत या कर्मकांडीय अनुष्ठान है।
स्वरूप:
याग मुख्य रूप से आहुति देने (हवि प्रदान करने) पर केंद्रित होते हैं।
उदाहरण के लिए: सोम-याग, पशु-याग, या इष्टि-याग (छोटी आहुतियां)।
मुख्य अंतर स्पष्ट रूप से समझें:
गुणयज्ञ (Yagna)याग (Yaag)व्यापकतायह एक बहुत व्यापक और विस्तृत प्रक्रिया है।
यह यज्ञ का ही एक विशिष्ट या सीमित रूप है。उद्देश्यलोक-कल्याण, सृष्टि की रक्षा और व्यापक स्तर पर शांति।किसी विशेष देवता को प्रसन्न करना या विशेष मनोकामना पूरी करना।
इसमें मंत्रोच्चार, दान, देव-पूजन और सामाजिक भागीदारी सभी शामिल हैं।
यह विशेष अनुष्ठानों जैसे इष्टि या सोम से जुड़ा होता है。संक्षेप में:
प्रत्येक याग एक यज्ञ हो सकता है, लेकिन हर यज्ञ केवल एक याग नहीं है。यज्ञ शब्द में सम्पूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया शामिल होती है, जबकि याग उस यज्ञ के अंतर्गत किसी विशेष देवता के लिए की गई विशिष्ट आहुति या अनुष्ठान को कहते हैं।
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यज्ञ और याग शब्दों का अर्थ लगभग एक ही है;
लेकिन यज्ञ शब्द का व्यापक अर्थ है और यह एक सामान्य नाम है, जबकि याग एक विशिष्ट नाम है जिसका अर्थ संकीर्ण है।
किसी देवता को कुछ अर्पित करना आम तौर पर यज्ञ कहलाता है ; जबकि याग किसी विशेष अनुष्ठान को दर्शाता है ,
जैसे कि इष्टि -याग , पशु -याग , सोम-याग आदि।
इसी प्रकार, याग और होम, हालांकि सतही तौर पर एक ही अर्थ के प्रतीत होते हैं, फिर भी दोनों में अंतर है।
याग शब्द 'यज' से व्युत्पन्न है और होम शब्द ' हु ' से व्युत्पन्न है।
यज्ञ में , मंत्र के अंत में ' वौषट ' का उच्चारण करते हुए खड़े होकर आहुति दी जाती है , जबकि होम में मंत्र के अंत में ' स्वाहा ' का उच्चारण करते हुए बैठकर आहुति दी जाती है ।
यज्ञ में , आहुति में दूध , घी , दही , मक्खन, मक्खन का जल , तरल घी और अन्य पदार्थ शामिल होते हैं ।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
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