*🎈दिनांक 22 मई 2026*
*🎈 वार- शुक्रवार*
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास प्रारंभ*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - षष्ठी 06:23:53*
तिथि- सप्तमी 29:03:45*(क्षय )
*🎈तत्पश्चात्* अष्टमी*
*🎈 नक्षत्र - आश्लेषा 26:07:08* तत्पश्चात् नक्षत्र मघा ,
*🎈योग - वृद्वि 08:17:51* तक तत्पश्चात् ध्रुव*
*🎈करण - तैतुल 06:23:53* तक तत्पश्चात् गर,वणिज*
*🎈राहुकाल -10:50pm से 12:32pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि कर्क *till 26:07:08*
*🎈चन्द्र राशि- सिंह from 26:07:08*
*🎈सूर्य राशि- वृषभ *
*🎈 सूर्योदय - 05:45:02*
*🎈 सूर्यास्त - 19:18:48*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:20 ए एम से 05:02 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:05 पी एम से 12:59 पी एम*
*🎈अमृत काल- 12:34 ए एम, मई 23 से 02:08 ए एम, मई 23*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:11 ए एम, मई 23 से 12:52 ए एम, मई 23*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण. षष्ठी व्रत (मासिक व्रत )*
*🎈विशेष - षष्ठी के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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🔱🌹🌸💢संतान सुख, अपार समृद्धि और अखंड सौभाग्य की दात्री—आदि माता 'लज्जा गौरी'💢🔱
🙏 आज ही पढ़ें देवी का यह सिद्ध स्तोत्र और जानें उनकी महिमा! ✨
🪷 लज्जा गौरी: आदिशक्ति का रहस्यमयी और प्राचीन स्वरूप 🪷
सनातन धर्म में आदिशक्ति के अनेक रूप हैं, जिनमें से एक अत्यंत प्राचीन और रहस्यमयी स्वरूप है— माँ लज्जा गौरी। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई प्राचीन मंदिरों में इनकी उपासना की सदियों पुरानी परंपरा है।
देवी को सृष्टि, उर्वरता (Fertility), समृद्धि, मातृत्व और प्रकृति की अनंत शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
🌸 अद्भुत स्वरूप:
देवी लज्जा गौरी की प्रतिमा सामान्य देवी-देवताओं से बिल्कुल भिन्न होती है। इनमें मुख के स्थान पर एक पूर्ण विकसित कमल (Lotus) दर्शाया जाता है। यह कमल सृष्टि के दिव्य उद्भव और चेतना के खिलने (प्रस्फुटन) का सबसे सुंदर प्रतीक है।
✨ तांत्रिक और शाक्त परंपरा:
तांत्रिक साधनाओं में लज्जा गौरी को “योनि-शक्ति” और “आदि प्रकृति” कहा गया है। यह देवी शक्ति और सृजन (Creation) के परम रहस्य की अधिष्ठात्री हैं।
🙏 आराधना के लाभ:
मान्यता है कि देवी लज्जा गौरी की उपासना से:
संतान सुख की प्राप्ति होती है 👶
गृहस्थ जीवन में अपार सुख और मधुरता आती है 🏡
भूमि और संपत्ति में वृद्धि होती है 🌾
आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है 🧘♀️
📜 ॥ श्री लज्जा गौरी स्तोत्र ॥ 📜
नमस्ते विश्वजननि सृष्टिस्थित्यन्तकारिणि।
कमलासनसंयुक्ते लज्जागौरि नमोऽस्तु ते॥
त्वं माता सर्वलोकानां त्वं शक्तिः परमेश्वरी।
त्वया धृतं जगत्सर्वं लज्जागौरि नमोऽस्तु ते॥
सर्वसंपत्प्रदे देवि पुत्रपौत्रप्रवर्धिनि।
धनधान्यसमायुक्ते लज्जागौरि नमोऽस्तु ते॥
कामदा मोक्षदा चैव भुक्तिमुक्तिप्रदायिनी।
भक्तानुग्रहकर्त्री त्वं लज्जागौरि नमोऽस्तु ते॥
पद्ममुखि पद्महस्ते पद्मगर्भे शुभप्रदे।
सृष्टिबीजस्वरूपे त्वं लज्जागौरि नमोऽस्तु ते॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
🗓️ विशेष पूजा का समय:
शुक्रवार, पूर्णिमा अथवा नवरात्रि के पावन दिनों में इस स्तोत्र का पूरी श्रद्धा से पाठ करने पर देवी की विशेष कृपा बरसती है और घर में स्थायी सुख-समृद्धि का वास होता है।
जय माँ लज्जा गौरी! 🙏🌺
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱




