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आज का पञ्चाङ्ग

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक  24 मई 2026*
*🎈 वार-  रविवार*
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास प्रारंभ*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर    पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि    -    नवमी    28:30:09*तत्पश्चात्* दशमी*
*🎈 नक्षत्र -  फाल्गुनी    26:50:03* तत्पश्चात् उत्तर फाल्गुनी*
*🎈योग    -     हर्शण    27:43:38* तक तत्पश्चात्     वज्र*
*🎈करण    - बालव    16:23:27* तक तत्पश्चात् कौलव*
*🎈राहुकाल -05:39pm से 07:21pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि-       सिंह    *
*🎈सूर्य राशि-       वृषभ    *
*🎈 सूर्योदय -   05:43:55*
*🎈 सूर्यास्त -        19:20:26* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:20 ए एम से 05:01 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त-  12:05 पी एम से 12:59 पी एम*
*🎈अमृत काल-    08:16 पी एम से 09:54 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:11 ए एम, मई 25 से 12:53 ए एम, मई 25*
*🎈रवि योग- पूरे दिन*
 *🎈 व्रत एवं पर्व विवरण.अष्टमी व्रत  (मासिक व्रत )*
*🎈विशेष - सर्वार्थ सिद्धि योग    02:51 ए एम, मई 25 से 05:43 ए एम, मई 25 इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💢सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    
🛟मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
kundli


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        🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
         *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day




           🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

👣🕉️ 🌹🌹 🌹🌹।। 🔶🔶🌹🌹 🌹
  
🔱🌹🌸💢 स्नान का तरीका💢🔱

  🙏 "शरीर की मजबूती एवं आरोग्यता के लिए रगड़-रगड़कर स्नान करना चाहिए। जो लोग ठंडे देशों में रहते हैं, उनका स्वास्थ्य गर्म देस के लोगों की अपेक्षा अच्छा होता है। ठंडी से अपना शरीर सुधरता है।

🌺स्नान करते वक्त 12-15 लिटर पानी, बाल्टी में लेकर पहले उसमें सिर डुबाना चाहिए। फिर पैर भिगोना चाहिए। पहले पैर गीले नहीं करने चाहिए। शरीर की गर्मी ऊपर की ओर चढ़ती है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है।

💥अतः पहले ठंडे पानी की बाल्टी भर लें। फिर मुँह में पानी भरकर, सिर को बाल्टी में डालें और आँखें पटपटाएँ। इससे आँखों की शक्ति बढ़ती है। शरीर को रगड़-रगड़कर नहाएँ। बाद मे गीले वस्त्र से शरीर को रगड़-रगड़कर पोंछें जिससे रोम कूप का सारा मैल बाहर निकल जाये और रोमकूप(त्वचा के छिद्र) खुल जाएँ। त्वचा के छिद्र बंद रहने से ही त्वचा की कई बीमारियाँ होती हैं। फिर सूखे कपड़े से शरीर को पोंछ कर (अथवा थोड़ा गीला हो तब भी चलेगा) सूखे साफ वस्त्र पहन लें। वस्त्र भले सादे हों किन्तु साफ हों। बासी कपड़े नहीं पहनें। हमेशा धुले हुए कपड़े ही पहनें। इससे मन भी प्रसन्न रहता है।

🎉पाँच प्रकार के स्नान होते हैः ब्रह्मस्नान, देवस्नान, ऋषिस्नान, मानवस्नान, दानवस्नान।

👌ब्रह्मस्नानः ब्रह्म-परमात्मा का चिंतन करके, 'जल ब्रह्म... थल ब्रह्म... नहाने वाला ब्रह्म...' ऐसा चिंतन करके ब्रह्ममुहूर्त में नहाना, इसे ब्रह्मस्नान कहते हैं।

🛟देवस्नानः देवनदियों में स्नान या देवनदियों का स्मरण करके सूर्योदय से पूर्व नहाना यह देवस्नान है।

🛟ऋषिस्नानः आकाश में तारे दिखते हों और नहा लें यह ऋषिस्नान है। ऋषिस्नान करने वाले की बुद्धि बड़ी तेजस्वी होती है।

🛟मानवस्नानः सूर्योदय के पूर्व का स्नान मानवस्नान है।

दानवस्नानः सूर्योदय के पश्चात चाय पीकर, नाश्ता करके, आठ नौ बजे नहाना यह दानव स्नान है।

अतः हमेशा ऋषिस्नान करने का ही प्रयास करना चाहिए।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹।      💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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‼️अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱
Vipul

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