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आज का पञ्चाङ्ग

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक  27 मई 2026*
*🎈 वार- बुधवार*
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर    पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि    -    एकादशी    06:21:08 am 
*तत्पश्चात्* द्वादशी*
*🎈 नक्षत्र -      हस्त    05:55:46* तत्पश्चात् चित्रा*
*🎈योग    -     व्यतिपत    27:24:03* तक तत्पश्चात्     वरियान*
*🎈करण    - विष्टि भद्र    06:21:08* तक तत्पश्चात्  बव*
*🎈राहुकाल -03:57pm से 05:39pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि-      कन्या* till 18:59:01*
*🎈चन्द्र राशि-       तुला    from 18:59:01*
*🎈सूर्य राशि-       वृषभ    *
*🎈 सूर्योदय -   05:41:33*
*🎈 सूर्यास्त -        19:29:45* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:19 ए एम से 05:01 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त-  कोई नहीं*
*🎈अमृत काल-    01:09 ए एम, मई 28 से 02:54 ए एम, मई 28*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:12 ए एम, मई 28 से 12:53 ए एम, मई 28*
*🎈सर्वार्थ सिद्धि योग    05:42 ए एम से 05:56 ए एम*
*🎈 रवि योग-    05:42 ए एम से 05:56 ए एम*

 *🎈 व्रत एवं पर्व विवरण. एकादशी व्रत बुधवार को  (मासिक व्रत )*
*🎈विशेष - ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, दशमी तिथि के दिन कलम्बी (कलमी/करेमू) का साग खाने की मनाही होती है。मान्यता है कि इस तिथि पर इस विशेष पत्तेदार सब्जी का सेवन करने से बचना चाहिए।
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💢सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    
🛟मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
kundli


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        🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
         *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day




           🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

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  🙏 "🧘‍♂️ ​

 🔱#🌷 पद्मिनी एकादशी  ज्येष्ठ अधिक मास 2026 🌷🔱🌹🌸💢
          (ज्येष्ठ अधिक मास शुक्ल पक्ष)
            27 मई बुधवार 2026

शुभ मुहूर्त • पंचांग • माहात्म्य • पूजा-विधि • व्रत-कथा • आरती
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👉🍁 पद्मिनी एकादशी 2026 — तिथि एवं पंचांग
🍁 एकादशी नाम — पद्मिनी एकादशी
🍁 मास — अधिक ज्येष्ठ मास (पुरुषोत्तम मास)
🍁 पक्ष — शुक्ल पक्ष
🍁 वार — बुधवार
🍁 दिनांक — 27 मई 2026

👉🍁 एकादशी तिथि
प्रारम्भ — 26 मई 2026 सायं लगभग 4:46 बजे
समाप्त — 27 मई 2026 सायं लगभग 3:20 बजे

उदयकालीन मुहुर्त अनुसार 27 मई बुधवार 2026
को पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा जायेगा 

👉🍁 व्रत एवं उपवास — 27 मई बुधवार 2026

 👉🍁पारण — 28 मई  गुरुवार 2026 प्रातः
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👉🍁शुभ मुहूर्त
     ब्रह्म मुहूर्त
प्रातः 4:05 से 4:48 तक

👉🍁 अभिजित मुहूर्त
दोपहर 11:52 से 12:47 तक

👉🍁हरिवासर समाप्ति
द्वादशी प्रातः के प्रथम भाग में

👉🍁 पारण समय
28 मई 2026, गुरुवार
प्रातः लगभग 6:00 से 8:35 तक श्रेष्ठ
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👉🍁अधिक मास की एकादशी माहात्म्य 

17 मई 2026 से अधिक मास यानी पुरुषोत्तम माह की शुरुआत हो चुकी है। यह माह 15 जून 2026 तक बना रहेगा। इसमें भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करना बेहद शुभ होता है। इससे जीवन में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। 
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: सामान्य वर्ष में 12 महीने और 24 एकादशियां होती हैं। लेकिन अधिकमास वाले वर्ष में 13 महीने और कुल 26 एकादशियां हो जाती हैं। इस साल ज्येष्ठ का महीना अधिकमास के कारण 30 के बजाय 60 दिनों का होगा (17 मई से 15 जून 2026 तक अधिकमास रहेगा)।

 इसके कारण इस अवधि में सामान्य 2 एकादशियों का शुभ संयोग पड़ने वाला है। आइए इनके बारे में जानते हैं।

अधिकमास क्या है? 
हिंदू कैलेंडर (चंद्रमा पर आधारित) और सूर्य कैलेंडर के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आता है। इस अंतर को पाटने के लिए हर 3 साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं। 

अधिकमास की विशेष 2 एकादशियां
तीन साल में एक बार आने वाले इस दुर्लभ संयोग में 27 मई 2026 को पद्मिनी एकादशी और 11 जून 2026 को परमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

 यह आध्यात्मिक उन्नति, धन-वैभव और मोक्ष प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को स्वयं इन दोनों एकादशियों के व्रत की विधि और महत्व बताया था। चूंकि अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं, इसलिए इन एकादशियों का फल अनंत गुना हो जाता है।

🌹पद्मिनी एकादशी -ज्येष्ठ शुक्ल अधिक मास 🌹
पद्मिनी एकादशी (कमला एकादशी)
तिथि: 27 मई 2026 (बुधवार)
पक्ष: अधिकमास का शुक्ल पक्ष

🌷 पद्मिनी एकादशी का माहात्म्य
पद्मिनी एकादशी अत्यंत दुर्लभ एवं महापुण्यदायिनी एकादशी मानी जाती है। यह केवल अधिक मास में आती है, इसलिए इसका महत्व अन्य एकादशियों से भी अधिक बताया गया है। इसका वर्णन पुराणों में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा धर्मराज युधिष्ठिर से किया गया है।
इस व्रत के प्रभाव से—
समस्त पापों का नाश होता है,
दरिद्रता दूर होती है,
भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है,
संतान-सुख एवं सौभाग्य की वृद्धि होती है,
और अंत में विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों में कहा गया है—
“हजार अश्वमेध यज्ञ और सैकड़ों राजसूय यज्ञ का फल भी पद्मिनी एकादशी के व्रत के समान नहीं है।”
जो मनुष्य श्रद्धा एवं भक्ति से इस व्रत को करता है, उसके अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
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🌹 पद्मिनी एकादशी पूजा-विधि🌹

: इसका व्रत दशमी तिथि से ही शुरू हो जाता है। दशमी के दिन कांसे के बर्तन में जौ-चावल का भोजन करना चाहिए और नमक का त्याग करना चाहिए।
महत्व व फल: यह व्रत सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी करता है। इससे व्यक्ति को कीर्ति (यश), वैभव और संतान सुख की प्राप्ति होती है। जीवन के भौतिक कष्ट दूर होते हैं और मृत्यु के बाद दुर्लभ बैकुंठ धाम मिलता है।

👉🍁व्रत की तैयारी
दशमी तिथि से सात्त्विक आहार ग्रहण करें।
चावल, मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज आदि का त्याग करें।
रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण करें।

👉🍁 प्रातःकालीन विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
स्नान कर स्वच्छ अथवा पीले वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण या लक्ष्मीनारायण का चित्र स्थापित करें।
घी का दीपक प्रज्वलित करें।

🌺 संकल्प
“मैं भगवान श्रीहरि की कृपा, पाप-क्षय एवं मोक्ष की प्राप्ति हेतु पद्मिनी एकादशी व्रत कर रहा/रही हूँ।”

 👉🍁पूजन सामग्री---
तुलसीदल
पीले पुष्प
धूप, दीप
पंचामृत
फल एवं मिष्ठान
चंदन
शंख एवं घंटा

👉🍁 पूजन क्रम
भगवान विष्णु का ध्यान करें।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
तुलसीदल अर्पित करें।
विष्णुसहस्रनाम, गीता या हरिनाम का पाठ करें।
एकादशी कथा सुनें।
रात्रि में भजन-कीर्तन एवं जागरण करें।

👉🍁 व्रत में क्या खाएँ?
 फल
 दूध
 मखाना
साबूदाना
सिंघाड़ा
कुट्टू आटा
 सूखे मेवे

👉🍁वर्जित ---चावल, गेहूँ, दालें, तामसिक पदार्थ मना है।।

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👉🍁 प्रमुख मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
एकादशी प्रार्थना
एकादश्यै नमस्तुभ्यं पापनाशिनि पुण्यदे।
उपवासं करिष्यामि प्रसन्ना भव केशव॥
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🌷 पद्मिनी एकादशी व्रत कथा 🌷
प्राचीन काल में माहिष्मतीपुरी में कृतवीर्य नामक राजा राज्य करते थे। वे धर्मात्मा, दानी और विष्णुभक्त थे, किन्तु उन्हें संतान प्राप्त नहीं थी। राजा ने अनेक यज्ञ, दान और तप किए, परन्तु पुत्र प्राप्ति नहीं हुई।
राजा की अनेक रानियाँ थीं, परन्तु पद्मिनी नाम की रानी अत्यंत पतिव्रता और भगवान विष्णु की महान भक्त थी। राजा संतानहीनता से दुखी होकर वन में तप करने चले गए और रानी पद्मिनी भी उनके साथ गईं।
वन में राजा ने दीर्घकाल तक कठोर तपस्या की, परन्तु भगवान प्रसन्न नहीं हुए। तब रानी पद्मिनी ने महान सती अनसूया माता से उपाय पूछा। अनसूया माता ने उन्हें अधिक मास की शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी का व्रत करने का उपदेश दिया।
रानी पद्मिनी ने अत्यंत श्रद्धा, उपवास, जागरण और विष्णु-पूजन सहित यह व्रत किया। उनके व्रत से भगवान श्रीहरि प्रसन्न होकर गरुड़ पर आरूढ़ होकर प्रकट हुए और वरदान माँगने को कहा।
रानी ने पुत्र प्राप्ति का वर माँगा। भगवान विष्णु ने उन्हें महान तेजस्वी पुत्र प्राप्त होने का आशीर्वाद दिया।
समय आने पर रानी पद्मिनी ने सहस्रबाहु अर्जुन (कार्तवीर्य अर्जुन) नामक महापराक्रमी पुत्र को जन्म दिया, जिसने आगे चलकर तीनों लोकों में महान यश प्राप्त किया।
जो मनुष्य श्रद्धा से इस कथा को सुनता या पढ़ता है, उसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है तथा उसके समस्त दुःख दूर हो जाते हैं।
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🌺 भगवान विष्णु जी की आरती 🌺
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
सुख-सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
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🌷 शुभ पद्मिनी एकादशी 🌷
🌸 भगवान श्रीहरि आप सभी पर कृपा करें। 🌸

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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹।      💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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🙏हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱🌿
vipul

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