*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈 वार- गुरुवार*
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - द्वादशी 07:56:22
*तत्पश्चात्* त्रयोदशी*
*🎈 नक्षत्र - चित्रा 08:07:27* तत्पश्चात् स्वाति*
*🎈योग - वरियान 27:53:45** तक तत्पश्चात् परिघ*
*🎈करण - बालव 07:56:22* तक तत्पश्चात् कौलव*
*🎈राहुकाल -03:57pm से 05:39pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि- तुला *
*🎈सूर्य राशि- वृषभ *
*🎈 सूर्योदय - 05:41:33*
*🎈 सूर्यास्त - 19:29:45*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- दक्षिण दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:19 ए एम से 05:00 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:05 पी एम से 01:00 पी एम*
*🎈अमृत काल- 12:55 ए एम, मई 29 से 02:41 ए एम, मई 29*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:12 ए एम, मई 29 से 12:53 ए एम, मई 29*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण.द्वादशी व्रत बुधवार को (मासिक व्रत )*
*🎈विशेष - ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, द्वादशी तिथि के दिन कलम्बी (कलमी/करेमू) का साग खाने की मनाही होती है。मान्यता है कि इस तिथि पर इस विशेष पत्तेदार सब्जी का सेवन करने से बचना चाहिए।
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
👣🕉️ 🌹🌹 🌹🌹।। 🔶🔶🌹🌹 🌹
🙏 "🧘♂️
🔱#🌷 🥥 क्या आप जानते हैं पूजा में फोड़ा जाने वाला 'नारियल' असल में एक राजा है? ✨
जानिए महर्षि विश्वामित्र द्वारा रचित श्रीफल के जन्म की यह अद्भुत पौराणिक कथा!
हिन्दू धर्म में कोई भी मांगलिक कार्य या पूजा नारियल के बिना अधूरी है। इसे 'श्रीफल' (समृद्धि देने वाला फल) कहा जाता है और इसका सीधा संबंध माता लक्ष्मी से है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा फल है जो पूर्ण रूप से शुद्ध है और जिसमें कोई मिलावट नहीं हो सकती। इसके कण-कण की उपयोगिता के कारण ही इसे धरती का "कल्पवृक्ष" भी कहा जाता है।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इस पवित्र फल की उत्पत्ति कैसे हुई? पुराणों के अनुसार, इसकी रचना राजर्षि विश्वामित्र ने की थी!
📜 रोचक कथा:
बात उस समय की है जब महर्षि विश्वामित्र घोर तपस्या के लिए वन में गए थे। उनकी अनुपस्थिति में श्रीराम के पूर्वज और सत्यवादी हरिश्चंद्र के पिता, प्रतापी राजा सत्यव्रत ने उनके परिवार की रक्षा की और खूब सेवा की। तपस्या से लौटकर जब विश्वामित्र को यह बात पता चली, तो वे अत्यंत प्रसन्न हुए।
उन्होंने राजा से वरदान मांगने को कहा। राजा सत्यव्रत की एक ही इच्छा थी— सशरीर स्वर्ग जाने की!
⚡ इंद्र का विरोध और क्रोध:
विश्वामित्र ने अपने तपोबल से राजा के लिए धरती से स्वर्ग तक का एक मार्ग बना दिया। लेकिन जैसे ही सत्यव्रत स्वर्ग के द्वार पर पहुंचे, देवराज इंद्र ने एक मानव को सशरीर आते देख उन्हें वापस नीचे पृथ्वी की ओर धकेल दिया। नीचे गिरते राजा का विलाप सुनकर विश्वामित्र को भयंकर क्रोध आया!
🌴 नारियल और नए स्वर्ग की रचना:
देवताओं के इस कृत्य से कुपित होकर, विश्वामित्र ने पृथ्वी और स्वर्ग के बीच एक नया स्वर्गलोक ही रच डाला! इस नए स्वर्ग को हवा में टिकाए रखने के लिए उन्होंने एक विशाल खंभे (तने) का निर्माण किया।
पुराणों के अनुसार, समय के साथ वही विशाल खंभा नारियल का पेड़ बना और स्वयं राजा सत्यव्रत नारियल का फल बन गए! इन्हीं राजा सत्यव्रत को हम "त्रिशंकु" के नाम से भी जानते हैं, जो न पूरी तरह पृथ्वी के हो पाए और न ही स्वर्ग के।
क्या आपको नारियल के जन्म की यह अद्भुत कथा पहले से पता थी? कमेंट्स में अपने विचार बताएं और धर्म से जुड़ी ऐसी ही रोचक कथाओं के लिए इस पोस्ट को शेयर करें! 🙏
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
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