*"ठेले-ढाबों के कब्जे से प्रभावित हुआ आवागमन और पार्किंग"*
नागौर l
कलेक्ट्रेट की पश्चिमी दीवार के बाहर बढ़ा अतिक्रमण, तत्काल हटाने की करी मांग
एडवोकेट पवन श्रीमाली ने कहा कलेक्ट्रेट परिसर की पश्चिमी मुख्य दीवार के बाहर लगातार बढ़ रहे अवैध अतिक्रमण ने आमजन, अधिवक्ताओं, पक्षकारों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न कर दी है। चाय के ढाबों, ठेलों एवं अन्य अस्थायी स्टॉलों द्वारा सार्वजनिक भूमि पर कब्जा किए जाने से आवागमन प्रभावित हो रहा है तथा वाहन पार्किंग की भी भारी समस्या पैदा हो गई है।
स्थिति यह है कि जिस स्थान का उपयोग नागरिकों की सुविधा, पैदल आवागमन एवं वाहन पार्किंग के लिए होना चाहिए, वह धीरे-धीरे अस्थायी व्यवसायों के कब्जे में आता जा रहा है। कई ठेले तो स्थायी रूप से वहीं खड़े कर दिए गए हैं, जिससे मार्ग संकरा हो गया है। इसके साथ ही गंदगी, कचरा एवं अस्वच्छ वातावरण भी आसपास के क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है।
कलेक्ट्रेट परिसर जिले का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र है, जहाँ प्रतिदिन हजारों नागरिक अपने विभिन्न कार्यों से आते हैं। अधिवक्ता, पक्षकार, अधिकारी एवं कर्मचारी नियमित रूप से इस मार्ग का उपयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त अनेक प्रशासनिक कार्यक्रम, जनसुनवाई, धरने, रैलियाँ एवं अन्य सार्वजनिक गतिविधियाँ भी इसी क्षेत्र में आयोजित होती हैं। ऐसे में मुख्य मार्ग एवं कलेक्ट्रेट की पश्चिमी दीवार के सामने इस प्रकार का अतिक्रमण सुरक्षा, यातायात व्यवस्था एवं प्रशासनिक गरिमा—तीनों के लिए उचित नहीं कहा जा सकता।
शहर में समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाए जाते हैं। ऐसे में यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि सबसे पहले कलेक्ट्रेट परिसर की मुख्य दीवार एवं उसके आसपास का क्षेत्र पूर्णतः अतिक्रमण मुक्त रखा जाए। यदि इस स्थान को व्यवस्थित पार्किंग अथवा स्वच्छ फुटपाथ के रूप में विकसित किया जाए तो आमजन को बड़ी राहत मिलेगी और पूरे क्षेत्र की व्यवस्था भी बेहतर होगी।
प्रशासन से मांग की गई है कि कलेक्ट्रेट परिसर की पश्चिमी दीवार के बाहर किए गए समस्त अवैध अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए तथा भविष्य में पुनः अतिक्रमण न हो, इसके लिए नियमित निगरानी एवं प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। इससे नागरिकों को सुगम आवागमन, पर्याप्त पार्किंग सुविधा तथा स्वच्छ वातावरण उपलब्ध हो सकेगा और कलेक्ट्रेट परिसर की गरिमा भी बनी रहेगी।

