*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 05 जुलाई 2026*
*🎈 वार- रविवार*
*🎈 मास - आषाढ़ मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - पंचमी 13:30:05 pm
*तत्पश्चात षष्ठी*
*🎈 नक्षत्र - शतभिष 15:11:42* तक* तत्पश्चात् पूर्वभाद्रपदा*
*🎈योग - आयुष्मान 16:38:59* तक , तत्पश्चात् सौभाग्य*
*🎈करण- तैतुल 13:30:05* तक,
तत्पश्चात् गर*
*🎈राहुकाल -05:49pm से 07:32pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈चन्द्र राशि - कुम्भ *
*🎈सूर्य राशि- मिथुन*
*🎈 सूर्योदय - 05:46:51*
*🎈 सूर्यास्त - 19:32:19*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:24 ए एम से 05:05 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त*- 12:12 पी एम से 01:07 पी एम*
*🎈 अमृत काल- 07:34 ए एम से 09:16 ए एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:19 ए एम, जुलाई 06 से 01:00 ए एम, जुलाई 06*
*🎈रवि योग- 03:12 पी एम से 05:46 ए एम, जुलाई 06*
*🎈व्रत पर्व विवरण - विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातून मुंह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- आषाढ़ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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➡️ *।। ॐ श्री गणेशाय नमः ।।
🌺🌷🏓।। नारायण की परम भक्ति का फल🎉
🛟शिव पुराण के कोटिरुद्र संहिता में भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र प्राप्त होने की कथा का ब्योरा मिलता है। यह कथा भगवान शिव की असीम महिमा और नारायण की परम भक्ति को दर्शाती है।
कथा के अनुसार एक समय की बात है, दैत्यों और असुरों का अत्याचार बहुत बढ़ गया था। चक्रवर्ती असुरों ने स्वर्ग लोक पर आक्रमण कर दिया और देवताओं को पराजित कर वहां अपना अधिकार कर लिया। असुरों के अत्याचार से पीड़ित होकर सभी देवता, देवराज इंद्र के साथ भगवान विष्णु के पास सहायता के लिए पहुंचे।
भगवान विष्णु ने देवताओं को आश्वस्त किया कि वे उनका खोया हुआ राज्य वापस दिलाएंगे।
इसके बाद, भगवान विष्णु ने असुरों के साथ भयंकर युद्ध किया। परंतु, उस समय असुरों के पास कुछ ऐसी दिव्य शक्तियां और वरदान थे, जिसके कारण विष्णुजी के तमाम दिव्य अस्त्र- शस्त्र भी निष्फल हो रहे थे।
तब भगवान विष्णु को आभास हुआ कि इन शक्तिशाली असुरों का संहार करने के लिए उन्हें किसी ऐसे अमोघ और अत्यंत शक्तिशाली अस्त्र की आवश्यकता है, जो ब्रह्मांड में सबसे तेज और अचूक हो।
ऐसा अस्त्र केवल देवाधिदेव महादेव की कृपा से ही प्राप्त हो सकता था। इसलिए, भगवान विष्णु ने शिव जी को प्रसन्न करने का निश्चय किया।
भगवान विष्णु हिमालय पर स्थित पवित्र काशी में गए। वहां उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या प्रारंभ की।
भगवान विष्णु ने महादेव के 'शिव सहस्रनाम' (हजार नामों) का पाठ करते हुए, प्रत्येक नाम के साथ एक-एक कमल का फूल शिव लिंग पर अर्पित करने का संकल्प लिया। इसके लिए वे एक हजार अत्यंत सुंदर कमल के फूल लेकर आए थे।
जब भगवान विष्णु शिव सहस्रनाम का पाठ करते हुए एक-एक करके कमल के पुष्प चढ़ा रहे थे,तब महादेव ने विष्णु जी की भक्ति की परीक्षा लेने का विचार किया। शिव जी ने अपनी माया से उन एक हजार कमलों में से एक कमल का फूल छुपा दिया।
जब भगवान विष्णु ९९९ नामों का पाठ कर चुके और अंतिम (१०००वें) नाम पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि थाल में एक भी कमल शेष नहीं बचा है। उनका संकल्प टूटने की कगार पर था। यदि वे बीच में उठकर दूसरा फूल लेने जाते, तो उनकी साधना खंडित हो जाती।
भगवान विष्णु को याद आया कि लोग उन्हें 'कमलनयन' या पुण्डरीकाक्ष (कमल के समान नेत्रों वाले) भी कहते हैं। उन्होंने तुरंत निश्चय किया कि यदि उनके पास पुष्प नहीं है, तो वे अपने एक नेत्र को ही कमल मानकर शिव जी के चरणों में अर्पित कर देंगे।
"यदि पुष्प न मिला तो क्या हुआ, मेरे नेत्र भी तो कमल के समान ही हैं।"
ऐसा सोचकर, जैसे ही नारायण ने अपने त्रिशूल या तीर से अपनी दाईं आंख निकालकर शिवलिंग पर अर्पित करने का प्रयास किया, वैसे ही वहां एक परम दिव्य प्रकाश पुंज प्रकट हुआ।
भगवान विष्णु की इस अटूट भक्ति, समर्पण और पराकाष्ठा को देखकर भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न और भावुक हो उठे। वे तुरंत प्रकट हुए और उन्होंने विष्णु जी का हाथ पकड़ लिया।
शिव जी ने कहा— "हे नारायण! आपके समान इस चराचर जगत में मेरा कोई दूसरा भक्त नहीं है। आपकी इस भक्ति और परीक्षा से मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ।"
भगवान शिव ने विष्णु जी के नेत्र को पुनः ठीक कर दिया और उनसे वरदान मांगने को कहा। तब विष्णु जी ने असुरों के संहार और सृष्टि की रक्षा के लिए एक अमोघ अस्त्र की मांग की।
तब भगवान शंकर ने अपने तेज से निर्मित, करोड़ों सूर्यों की चमक वाले और ब्रह्मांड को संचालित करने की शक्ति रखने वाले 'सुदर्शन चक्र' को विष्णु जी को प्रदान किया। शिव जी ने कहा कि इस चक्र का वार कभी खाली नहीं जाएगा और इससे तीनों लोकों में कोई भी शत्रु टिक नहीं पाएगा।
सुदर्शन चक्र प्राप्त करने के बाद, श्री हरि विष्णु ने उसी क्षण उस दिव्य चक्र की सहायता से अत्याचारी दैत्यों और असुरों का संहार कर दिया। देवताओं को उनका स्वर्ग वापस मिला और सृष्टि में पुनः धर्म की स्थापना हुई।
तभी से भगवान विष्णु के हाथों में सुदर्शन चक्र हमेशा सुशोभित रहता है, जिसे वे महादेव के प्रसाद और ब्रह्मांड की रक्षा के प्रतीक के रूप में धारण करते हैं।
हर हर महादेव !
💕"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः "
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" नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम् "
🛟॥ श्री हरिः ॐ ॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
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