*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 31 जुलाई 2026*
*🎈 वार- शुक्रवार*
*🎈 मास -सावन मास*
*🎈 पक्ष - कृष्णा पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि - द्वितीया - 10:31 पी एम तक तक तत्पश्चात* तृतीया*
*🎈 नक्षत्र - श्रवण - 05:43 पी एम तक, तत्पश्चात् घनिष्ठा*
*🎈योग - सौभाग्य - 11:54 पी एम तक तत्पश्चात् शोभन*
*🎈करण- धनिष्ठा - 07:26 पी एम तक तत्पश्चात् शतभिषा*
*🎈राहुकाल -11:01 पी एम से 12:41 पी एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈 सूर्योदय-05:58 ए एम*
*🎈 सूर्यास्त-07:24 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- मकर- 06:38 ए एम तक तत्पश्चात् कुंभ*
*🎈 सूर्य राशि- कर्क*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:34 ए एम से 05:16 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:14 पी एम से 01:08 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:20 ए एम, अगस्त 01 से 01:03 ए एम, अगस्त 01*
*🎈अमृत काल -08:18 ए एम से 10:01 ए एम*
*🎈व्रत पर्व विवरण - हिंदू धर्म शास्त्रों और पुराणों (जैसे ब्रह्मवैवर्त पुराण) के अनुसार, द्वितीया तिथि को छोटा बैंगन (बृहती या कटेहरी) का सेवन करना वर्जित (निषिद्ध) माना गया है।
*🎈विशेष:- *31 जुलाई 2026 (शुक्रवार) का दिन सावन मास के दूसरे दिन के रूप में कुछ का दिन मेष, मिथुन, तुला, धनु और मकर राशि के जातकों के लिए सौभाग्य योग के कारण विशेष रूप से भाग्यशाली और सकारात्मक परिणाम लेकर आया है।
💥सावन महात्म्य☀️
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉*विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल*
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी
💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ -
🏵️ रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
💢आज का राशिफल💢
☀️मेष राशि: मान-सम्मान बढ़ेगा, आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी, और लव लाइफ में खुशियां आएंगी।
☀️वृषभ राशि: करियर में तरक्की के योग हैं, लेकिन सेहत को लेकर थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है।
☀️मिथुन राशि: पैसों के लेन-देन में लाभ होगा, निवेश के अच्छे प्लान बनेंगे, और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी।
☀️कर्क राशि: निवेश से अच्छा रिटर्न मिल सकता है, परिवार का साथ मिलेगा, पर आंखों या जोड़ों का दर्द परेशान कर सकता है।
☀️सिंह राशि: रिश्तों को मजबूत करने का मौका मिलेगा, खर्चों पर नियंत्रण रखें, और संयम से काम लें।
☀️कन्या राशि: अनुशासित बजट से प्रगति होगी, मेहनत का पूरा फल मिलेगा, और मन प्रसन्न रहेगा।
☀️तुला राशि: अटके हुए काम पूरे होंगे, शांत होकर फैसले लें, और सोच-समझकर बचत करें।
☀️वृश्चिक राशि: अटका हुआ धन वापस मिल सकता है, दिन ऊर्जावान बीतेगा, और यात्रा के योग हैं।
☀️धनु राशि: नए और उपयोगी अवसर सामने आएंगे, धन संचय के नियम बनेंगे, और पुराने काम निपटेंगे।
☀️मकर राशि: कार्यशैली में सुधार होगा, दूरदर्शी बजट बनाएं, और निरंतर प्रयास जारी रखें।
☀️कुंभ राशि: नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी, नए आइडिया और कनेक्शन मिलेंगे, सेहत पर ध्यान दें।
☀️मीन राशि: पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे, लव लाइफ में मधुरता आएगी, और रणनीतिक प्रगति होगी।
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️☀️#🎉ॐ श्री गुरुभ्यो नमः 🙏
‼️गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः 🙏
✨#आदियोगी_शिव_और_गुरु_पूर्णिमा✨
↘️#💘आषाढ़ पूर्णिमा को गुरू -पूर्णिमा के रूप में मनाने का क्या राज है?-
👁️गतांक सेआगे.......
आषाढ़ पूर्णिमा को गुरू -पूर्णिमा के रूप में मनाने का क्या राज है?-
‼️1-गुरु पूर्णिमा का बहुत महत्व है।गुरु शब्द दो अक्षरों से बना है 'गु' और 'रु'।ये दोनों अक्षर संस्कृत से लिए गये हैं जिसमें 'गु' का अर्थ होता है 'अंधकार' और 'रु' का अर्थ होता है जो आपके जीवन से उस अंधकार को मिटाता है उसे गुरु कहा गया है। 'गुरु है पूर्णिमा का चांद'। 'सारा धर्म एक महाकाव्य है।आषाढ़ की पूर्णमा बड़ी अर्थपूर्ण हैं। एक तो आषाढ़, पूर्णिमा में बादल घिरे होंगे, आकाश खुला न होगा, चांद की रोशनी भी पूरी नहीं पहुंचेगी। और भी प्यारी पूर्णिमाएं हैं, शरद पूर्णिमा है, तो उसको क्यों न चुन लिया गया? लेकिन चुनने वालों का कोई खयाल है, कोई इशारा है। वह यह है कि गुरु तो है पूर्णिमा जैसा और शिष्य है आषाढ़ जैसा। शरद पूर्णिमा का चांद तो सुंदर होता है, क्योंकि आकाश खाली है। वहा शिष्य है ही नहीं, गुरु अकेला है। आषाढ़ में सुंदर हो, तभी कुछ बात है, जहां गुरु बादलों जैसे शिष्यों से घिरा हो ।शिष्य सब तरह के जन्मों -जन्मों के अंधेरे का लेकर आए है।
‼️2- आषाढ़ का मौसम हैं ,और वे शिष्य अंधेरे बादल हैं।उस अंधेरे से घिरे वातावरण में भी गुरु चांद की तरह चमक सके;उसमें भी रोशनी पैदा कर सके, तो ही गुरु है। इसलिए आषाढ़ की पूर्णिमा में गुरु की तरफ भी इशारा है और शिष्य की तरफ भी इशारा है।और स्वभावत: जहां दोनों का मिलन हो, वहीं कोई सार्थकता है। अगर तुम्हें यह काव्य -प्रतीक समझ में आ जाए , तो तुम आषाढ़ की तरह हो, अंधेरे बादल हो। न मालूम कितनी कामनाओं और वासनाओं का जल तुममें भरा है, और न मालूम कितने जन्मों-जन्मों के संस्कार लेकर तुम चल रहे हो, तुम बोझिल हो।
‼️ 3-तुम्हारे अंधेरे से घिरे हृदय में रोशनी पहुंचानी है। इसलिए पूर्णिमा चांद जब पूरा हो जाता है, तब उसकी एक शीतलता है। चांद को ही हमने गुरु के लिए चुना है। सूरज को चुन सकते थे, ज्यादा तथ्यगत होता क्योंकि चांद के पास अपनी रोशनी नहीं है। हमने गुरू को सूरज ही कहा होता, तो बात ज्यादा तथ्यपूर्ण होती।इसे थोडा समझना।चांद की सब रोशनी उधार है। सूरज के पास अपनी रोशनी है। चांद पर तो सूरज की रोशनी का प्रतिफलन होता है। जैसे कि तुम दीए को आईने के पास रख दो, तो आईने में से भी रोशनी आने लगती है। वह दीए की रोशनी का प्रतिफलन है, वापस लौटती रोशनी है। चांद तो केवल दर्पण का काम करता है, रोशनी सूरज की है।
शेष भाग कल.......👁️👁️👁️
💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
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✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
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*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️




