**💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥**
*🎈दिनांक 30 जुलाई 2026*
*🎈 वार- गुरुवार*
*🎈 मास -सावन मास*
*🎈 पक्ष - कृष्णा पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि - प्रतिपदा - 09:30 पी एम तक तत्पश्चात* द्वितीया
*🎈 नक्षत्र - श्रवण - 05:43 पी एम तक, तत्पश्चात् घनिष्ठा*
*🎈योग - आयुष्मान् - 12:05 ए एम, जुलाई 31 तक तत्पश्चात् सौभाग्य*
*🎈करण- बालव - 08:50 ए एम तक तत्पश्चात् कौलव,*
*🎈राहुकाल -02:22 पी एम से 04:03 पी एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈 सूर्योदय-05:58 ए एम*
*🎈 सूर्यास्त-07:25 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- मकर*
*🎈 सूर्य राशि- कर्क*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- दक्षिण दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:34 ए एम से 05:16 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:14 पी एम से 01:08 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:21 ए एम, जुलाई 31 से 01:03 ए एम, जुलाई 31*
*🎈अमृत काल -06:24 ए एम से 08:09 ए एम*
*🎈व्रत पर्व विवरण - शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा के दिन तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज और नशीली वस्तुएं नहीं खानी चाहिए। इसके अलावा मांस, अंडा और मलका की दाल का सेवन भी वर्जित माना जाता है।
*🎈विशेष:- *30 जुलाई 2026 (गुरुवार) का दिन सावन मास के पहले दिन के रूप में मेष, वृश्चिक और कर्क राशि वालों के लिए विशेष रूप से आर्थिक और करियर के मामले में शुभ रहने वाला है। आयुष्मान योग और हंस राजयोग के संयोग से आज का दिन सभी राशियों के लिए मिलाजुला रहेगा।
💥सावन महात्म्य☀️
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉*विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल*
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी
💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ -
🏵️ रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
★√*★√*★√*★√*★√*★√*★√*
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
💢आज का राशिफल💢
☀️मेष: राशि: प्रॉपर्टी से जुड़ी योजना आगे बढ़ेगी और धन लाभ के नए अवसर मिलेंगे।
☀️वृष राशि: बिजनेस की समस्याओं से राहत और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति रहेगी।
☀️मिथुन राशि: अपनी योजनाओं को गुप्त रखें, सूझबूझ से आर्थिक लाभ होगा।
☀️कर्क राशि: जमीन-जायदाद की बड़ी डील हो सकती है, पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
☀️सिंह राशि: लाभदायक अनुबंध मिलने के योग हैं, आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।
☀️कन्या राशि: नौकरीपेशा लोगों को ट्रांसफर या नई जिम्मेदारी की खबर मिल सकती है।
☀️तुला राशि: व्यापार में अच्छे मौके मिलेंगे, बजट संतुलित रहेगा।वृश्चिक राशि: प्रमोशन की खुशखबरी मिल सकती है, कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी।
☀️धनु राशि: रुके हुए काम आगे बढ़ेंगे और निवेश से लाभ के संकेत हैं।
☀️मकर राशि: मार्केट में नई साख और उपलब्धियां मिलेंगी, आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें।
☀️कुंभ राशि: उधार दिया गया पैसा वापस मिलने के योग हैं।
☀️मीन राशि: निवेश और रचनात्मक कार्यों के लिए दिन उत्तम रहेगा।
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️☀️#🎉ॐ श्री गुरुभ्यो नमः 🙏
‼️गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः 🙏
✨#आदियोगी_शिव_और_गुरु_पूर्णिमा✨
↘️#आज के आधुनिक विज्ञान ने साबित किया है कि इस सृष्टि में सब कुछ शून्यता से आता है और वापस शून्य में ही चला जाता है। इस अस्तित्व का आधार और संपूर्ण ब्रम्हांड का मौलिक गुण ही एक विराट शून्यता है।उसमें मौजूद #आकाशगंगाएं केवल छोटी-मोटी गतिविधियां हैं, जो किसी फुहार की तरह हैं।उसके अलावा सब एक खालीपन है, जिसे शिव के नाम से जाना जाता है। शिव ही वो गर्भ हैं जिसमें से सब कुछ जन्म लेता है, और वे ही वो गुमनामी हैं, जिनमें सब कुछ फिर से समा जाता है। सब कुछ शिव से आता है, और फिर से शिव में चला जाता है।
↘️शिव के कारण ही सभी धर्मों की उत्पत्ति है।शिव तो जगत के गुरु और परमेश्वर हैं। मान्यता अनुसार सबसे पहले उन्होंने अपना ज्ञान सप्त ऋषियों को दिया था।आदियोगी शिव ने योग विज्ञान का पहला #संचारआषाढ़ पूर्णिमा (गुरु-पूर्णिमा)के दिन #कांतिसरोवर के किनारे किया जो हिमालय में केदारनाथ से कुछ मील दूर पर स्थित एक बर्फीली झील है।भगवान शिव ही पहले योगी हैं और मानव स्वभाव की सबसे गहरी समझ उन्हीं को है। उन्होंने अपने ज्ञान के विस्तार के लिए 7 ऋषियों को चुना और उनको योग के अलग-अलग पहलुओं का ज्ञान दिया, जो योग के 7 बुनियादी पहलू बन गए।यहां आदियोगी शिव ने, इस आंतरिक तकनीक का व्यवस्थित विवरण अपने पहले सात शिष्यों को देना शुरू किया।ये सात ऋषि, आज सप्तर्षि के नाम से जाने जाते हैं। ये सभी धर्मों के आने से पहले हुआ था।
↘️#सप्त_ऋषियों ने शिव से ज्ञान लेकर अलग-अलग दिशाओं में फैलाया और धरती के कोने-कोने में शैव धर्म, योग और ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया। इन सातों ऋषियों ने ऐसा कोई व्यक्ति नहीं छोड़ा जिसको शिव कर्म, परंपरा आदि का ज्ञान नहीं सिखाया हो। आज सभी धर्मों में इसकी झलक देखने को मिल जाएगी।वक्त के साथ इन 7 रूपों से सैकड़ों शाखाएं निकल आईं। बाद में योग में आई जटिलता को देखकर पतंजलि ने 300 ईसा पूर्व मात्र 200 सूत्रों में पूरे योग शास्त्र को समेट दिया। योग का 8वां अंग मोक्ष है। 7 अंग तो उस मोक्ष तक पहुंचने के लिए है।
↘️किसी जमाने में प्रत्येक व्यक्ति को गुरु से मार्गदर्शन लेना अनिवार्य था और जो बिना गुरु के होता था, उसकी निगुरा कहकर सामाजिक भत्र्सना होती थी। विद्या एवं उच्चस्तरीय ज्ञान के क्षेत्र के अतिरिक्त मानवीय चेतना को जाग्रत एवं झंकृत कर आदर्शमय मानवीय जीवन के लिए गुरु का मार्गदर्शन एवं संरक्षण आवश्यक है।गुरु-तत्व हमारे जीवन में व्याप्त है।
↘️हमारी #मां_हमारी_प्रथम गुरु होती हैं। जीवन के हर विषय के लिए गुरु होते हैं- धर्म के लिए ‘धर्म गुरु’, परिवार के लिए ‘कुल गुरु’, राज्य के लिए ‘राजगुरु’, किसी विषय के अध्ययन के लिए ‘विद्या गुरु’ और अध्यात्म के लिए सद्गुरु। सद्गुरु न केवल आपको ज्ञान से भरते हैं, बल्कि वह आपके भीतर जीवन ऊर्जा की ज्योति भी जलाते हैं।
↘️गुरु की उपस्थिति में आप और भी अधिक जीवंत हो जाते हैं। आप बुद्धि की पराकाष्ठा को प्राप्त कर लेते हैं, जो बुद्ध-चेतना है। गुरु न केवल आपको बुद्धिमान, बल्कि ज्ञानी भी बनाते हैं। आचार्य (अध्यापक) व्यक्ति को ज्ञान प्रदान करते हैं, लेकिन गुरु सजगता की उन ऊंचाइयों तक आपको ले जाते हैं, जिससे आप जीवंत हो जाते हैं।उपनिषद के अनुसार,गुरु के पांच
लक्षण हैं - ज्ञान रक्षा, दु:ख क्षय, सुख आविर्भाव, समृद्धि, ऐश्वर्यवद्र्धन। सद्गुरु की उपस्थिति में ज्ञान पल्लवित होता है और दुख क्षीण होने लगता है। बिना कारण आपका मन प्रसन्न रहता है और सभी योग्यताएं बढ़ जाती हैं।
↘️जब जीवन में संपूर्णता होती है, तब कृतज्ञता का भाव उदित होता है। गुरु के आदर से आरंभ होकर अंत में हम जीवन की सभी वस्तुओं का आदर-सत्कार करने लगते हैं। गुरु पूर्णिमा भक्ति और कृतज्ञता दोनों के उदित होने का उत्सव मनाने का अवसर प्रदान करता है हर व्यक्ति के अंदर ऊर्जा का स्रोत है, लेकिन इन शक्तियों से परिचित गुरु कराते हैं। महाभारत में श्रीकृष्ण, अर्जुन के गुरु की भूमिका में थे। उन्होंने अर्जुन को हर उस समय थामा,जब वे लड़खड़ाते नजर आए। गुरु को ब्रह्मा कहा गया, क्योंकि वह शिष्य को नया जन्म देते हैं। गुरु विष्णु भी हैं, क्योंकि वे शिष्य की रक्षा करते हैं। गुरु महेश्वर भी हैं, क्योंकि वे शिष्य के दोषों का संहार करते हैं।इंसान स्वयं की शक्तियों से परिचित हो, इसके लिए गुरु की जरूरत पड़ती है।
💢हमने परमात्मा को एक व्यक्ति समझ रखा है। इसलिए हम सोचते हैं, जैसे हम व्यक्ति के संबंध में सोचते हैं। हम कहते हैं, वह बड़ा दयालु है, बड़ा कृपालु है; वह सदा कल्याण ही करता है। वास्तव में ये हमारी आकांक्षाएं हैं जो हम उस पर थोप रहे हैं।व्यक्ति पर तो ये आकांक्षाएं थोपी जा सकती हैं; और अगर वह इनको पूरा न करे तो उसको उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। शक्ति पर ये आकांक्षाएं नहीं थोपी जा सकतीं। और शक्ति के साथ जब भी हम व्यक्ति मानकर व्यवहार करते हैं तब हम बड़े नुकसान में पड़ते हैं; क्योंकि हम बड़े सपनों में खो जाते हैं। शक्ति के साथ शक्ति मानकर व्यवहार करेंगे तो बहुत दूसरे परिणाम होंगे।
💘उदाहरण के लिए जमीन में ग्रेविटेशन है, कशिश है, गुरुत्वाकर्षण है। आप जमीन पर चलते हैं तो उसी की वजह से चलते हैं। लेकिन वह इसलिए नहीं है कि आप चल सकें और न चलेंगे तो गुरुत्वाकर्षण नहीं रहेगा, इस भूल में मत पड़ जाना।आप जमीन पर नहीं थे , तो भी गुरुत्वाकर्षण था, एक दिन हम नहीं भी होंगे, तो भी होगा। और अगर आप गलत ढंग से चलेंगे, तो गिर पड़ेंगे, टांग भी टूट जाएगी; वह भी गुरुत्वाकर्षण के कारण ही होगा। लेकिन आप किसी अदालत में मुकदमा न चला सकेंगे, क्योंकि वहां कोई व्यक्ति नहीं है।
💘गुरुत्वाकर्षण एक शक्ति की धारा है। अगर उसके साथ व्यवहार करना है तो आपको सोच समझकर करना होगा। वह आपके साथ सोच समझकर व्यवहार नहीं कर रही है।परमात्मा की शक्ति आपके साथ सोच -समझकर व्यवहार नहीं कर रही है उसका, उसका अपना शाश्वत नियम है। उस शाश्वत नियम का नाम ही धर्म है।धर्म का अर्थ है, उस परमात्मा नाम की शक्ति के व्यवहार का नियम। अगर आप उसके अनुकूल करते हैं, समझपूर्वक करते हैं, विवेकपूर्वक करते हैं, तो वह शक्ति आपके लिए कृपा बन जाएगी । अगर आप उलटा करते हैं, नियम के प्रतिकूल करते हैं, तो वह शक्ति आपके लिए अकृपा बन जाएगी। परमात्मा कृपा या अकृपा नहीं है।
💢तो परमात्मा को व्यक्ति मानेंगे तो भूल होगी। परमात्मा व्यक्ति नहीं है, शक्ति है। और इसलिए परमात्मा के साथ न प्रार्थना का कोई अर्थ है, न पूजा का कोई अर्थ है; परमात्मा के साथ अपेक्षाओं का कोई भी अर्थ नहीं है। यदि चाहते हैं कि परमात्मा, वह शक्ति आपके लिए कृपा बन जाए, तो आपको जो भी करना है वह अपने साथ करना है। इसलिए साधना का अर्थ है,परन्तु केवल प्रार्थना का कोई अर्थ नहीं है। ध्यान का अर्थ है, परन्तु केवलपूजा का कोई अर्थ नहीं है।
💢इस फर्क को ठीक से समझ लें।प्रार्थना में आप परमात्मा के साथ कुछ कर रहे हैं -अपेक्षा, आग्रह, निवेदन, मांग। ध्यान में आप अपने साथ कुछ कर रहे हैं। पूजा में आप परमात्मा से कुछ कर रहे हैं; साधना में आप अपने से कुछ कर रहे हैं। साधना का अर्थ है, अपने को ऐसा बना लेना कि आप धर्म के प्रतिकूल न रह जाएं; और जब नदी की धारा बहे तो आप बीच में न पड़ जाएं। आप तट पर हों कि नदी की धारा का पानी आपकी जड़ों को मजबूत कर जाए, उखाड़ न जाए।जैसे ही हम परमात्मा को शक्ति के रूप में समझेंगे, हमारे धर्म की पूरी व्यवस्था बदल जाती है।
💘आषाढ़ पूर्णिमा को गुरू -पूर्णिमा के रूप में मनाने का क्या राज है?-
आगे.......
💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
🌹🌹🌹🌹🌹🌹
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹
*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
♨️ ⚜️ 🕉🌞 🌞🕉 ⚜🚩*♥️💕
💥*अगर आपको हमारा पंचांग नियमित चाहिए तो आप मुझे इस चैनल को फॉलो करे*
*https://whatsapp.com/channel/0029Va65aSaKrWR*
♨️ ⚜️ 🕉🌞 🌞🕉 ⚜🚩
🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~*अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️




