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पञ्चाङ्ग 03 अगस्त 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*

jyotis


*🎈दिनांक  03 अगस्त 2026*
*🎈 वार-   सोमवार*
*🎈 मास -सावन मास*
*🎈 पक्ष -  कृष्णा पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि    -    पञ्चमी - 10:54 पी एम तक तत्पश्चात*षष्टी*
*🎈 नक्षत्र - उत्तर भाद्रपद - 10:00 पी एमतक तत्पश्चात रेवती*
*🎈योग    -     सुकर्मा - 09:13 पी एम तक तक तत्पश्चात् धृति
*🎈करण- बव - कौलव - 11:08 ए एम तक तत्पश्चात् तैतिल*
*🎈राहुकाल -07:41pm  से 07:21pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈 सूर्योदय-06:00.39 ए एम*
*🎈 सूर्यास्त-07:21:01 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- मीन *
*🎈 सूर्य राशि- कर्क*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:35 ए एम से 05:17 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 012:14 पी एम से 01:08 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:20 ए एम, अगस्त 04 से 01:03 ए एम, अगस्त 04*
 *🎈अमृत काल    -05:07 पी एम से 06:45 पी एम*
 *🎈सर्वार्थ सिद्धि- योग    09:37 पी एम से 06:00 ए एम, अगस्त 03
 
*🎈व्रत पर्व विवरण -  धर्म शास्त्रों और ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार, पंचमी तिथि के दिन बेल (बेलफल) का सेवन करना निषेध माना गया है।धार्मिक मान्यताएंकलंक का भय: शास्त्रों के अनुसार पंचमी तिथि को बेल खाने से समाज में कलंक या अपयश लगने की आशंका होती है।मान-सम्मान पर असर: इस तिथि पर बेल खाने से व्यक्ति के रुतबे और मान-सम्मान पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34)
*🎈विशेष:- 03 अगस्त 2026 का दिन श्रावण मास के पहले सोमवार और नाग पंचमी के संयोग के साथ मेष, वृषभ और मकर राशि वालों के लिए विशेष फलदायी रहेगा, जिसमें आत्मविश्वास में वृद्धि और अटके कार्यों की गति में तेजी देखने को मिलेगी

🛟विशेष योग: चंद्रमा आज मीन राशि में गोचर कर रहे हैं।उपाय: देवाधिदेव भोलेनाथ का जलाभिषेक करें तथा 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें

          💥सावन महात्म्य☀️
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 

🎉*विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल*
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    
💢सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ -
🏵️ रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    
🛟मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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     🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
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       *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
night




           🛟चोघडिया, रात्🛟*
 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
    
         💢आज का राशिफल💢
🛟मेष:प्रॉपर्टी से जुड़े अटके काम सुलझेंगे, समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा, लेकिन प्रेम जीवन में सावधानी बरतें।

🛟वृषभ: नई खरीदारी मन को खुश करेगी, लंबे समय से अटकी डील फाइनल हो सकती है, सेहत का खास ख्याल रखें।

🛟मिथुन: भागदौड़ अधिक रहेगी, खर्चों पर नियंत्रण रखें, सरकारी कार्यों में जल्दबाजी से बचें।

🛟कर्क: कार्यक्षेत्र में फोकस बढ़ेगा, बॉस से सराहना मिलेगी, पारिवारिक तनाव से राहत मिलेगी।

🛟सिंह: वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा बनता काम बिगड़ सकता है।

🛟कन्या: प्रमोशन, नए निवेश और आर्थिक लाभ के प्रबल संकेत।

🛟तुला: रुके हुए काम पूरे हुए तथा धन लाभ व स्वास्थ्य में सुधार।

🛟वृश्चिक: यात्रा के योग और भाग्य का साथ, स्वास्थ्य व व्यापार उत्तम।

🛟धनु: ज्ञानार्जन के लिए अच्छा समय, निवेश भी उपयोगी, पर यात्रा में सावधानी बरतें।

🛟मकर: आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी, कानूनी मामलों व सरकारी कार्यों में राहत मिलेगी, जीवनसाथी का सहयोग प्राप्त होगा

🛟कुंभ: कार्यक्षेत्र में सफलता, व्यापार में भारी मुनाफा और पुरानी बीमारी से राहत।

🛟मीन: रचनात्मकता और नए कार्यों में रुचि बढ़ेगी, भगवान शिव की विशेष कृपा से महत्वपूर्ण प्रयासों में सफलता मिलेगी।
    ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
   🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️☀️#🎉ॐ श्री गुरुभ्यो नमः 🙏

‼️शिव और शिवत्व। 
क्या शिव सदैव से शिव थे?

यदि कहा जाए कि ऋग्वेद के ऋषि शायद उस "महादेव" को नहीं जानते थे, जिनकी आज करोड़ों लोग पूजा करते हैं तो पहली दृष्टि में यह कथन असहज भी लग सकता है।
परन्तु शास्त्रों की यात्रा अक्सर वहीं से आरम्भ होती है, जहाँ हमारी धारणाएँ समाप्त होती हैं।
 हम शिव का स्मरण करते ही एक दिव्य स्वरूप देखते हैं-
जटाओं में अविरल गंगा, मस्तक पर अर्धचन्द्र, गले में सर्प, भाल पर तृतीय नेत्र, हाथ में त्रिशूल और डमरू, कैलाश पर समाधिस्थ महायोगी, भोलेनाथ महादेव। 
यही स्वरूप हमारे मन में इतना गहरे बैठ चुका है कि हमें लगता है-शिव सदैव से ऐसे ही थे।
किन्तु क्या वास्तव में ऐसा है?
यदि हम पुराणों से महाभारत, महाभारत से उपनिषद, उपनिषदों से ब्राह्मण ग्रंथ और अंततः ऋग्वेद तक पहुँचें तो वहाँ यह परिचित चित्र दिखाई नहीं देता।
वहाँ मिलता है- रुद्र।
एक ऐसा देवता जिससे ऋषि भयभीत भी हैं और जिनकी शरण भी लेते हैं।
जो बाण धारण करते हैं किन्तु उन्हीं से प्रार्थना की जाती है कि वे अपने बाण भक्तों से दूर रखें।
जो रोग देने की सामर्थ्य रखते हैं किन्तु वही समस्त औषधियों के स्वामी भी हैं।
जो उग्र हैं परन्तु करुणामय भी।
यही विरोधाभास रुद्र को वैदिक देवताओं में अद्वितीय बनाता है।
क्योंकि ऋग्वेद में "रुद्र" का उल्लेख अनेक बार मिलता है किन्तु "शिव" शब्द अधिकांश स्थानों पर किसी देवता का नाम नहीं, बल्कि "कल्याणकारी", "मंगलकारी", "शुभ" अर्थ वाले विशेषण के रूप में प्रयुक्त होता है।
अर्थात् प्रारम्भिक वैदिक साहित्य में "शिव" पहले एक गुण है, फिर एक विशेषण और आगे चलकर वही एक दैव स्वरूप के रूप में प्रतिष्ठित होता है।
यहीं से प्रश्न उठता है- क्या रुद्र और शिव दो अलग-अलग देवता हैं? 
या 
हम भारतीय आध्यात्मिक इतिहास में एक ही दिव्य सत्ता के क्रमिक विकास को देख रहे हैं?
समय के साथ ब्राह्मण ग्रंथ आए। आरण्यक आए। उपनिषदों ने देवताओं के बाहरी स्वरूप से अधिक उनके दार्शनिक अर्थों पर विचार किया। फिर आगम और तंत्र परम्पराओं ने शिव को साधना का केन्द्र बनाया।
पुराणों ने उन्हें लोकमानस का महादेव बना दिया और तब हमारे सामने प्रकट हुए-
नटराज, अर्धनारीश्वर, महायोगी, महाकाल, पशुपति, दक्षिणामूर्ति, भोलेनाथ आदि। 
यह किसी देवता का परिवर्तन नहीं था।
यह भारतीय चेतना के विस्तार की यात्रा थी।
रुद्र बदल नहीं गए थे, उन्हें देखने वाली दृष्टि विकसित होती चली गई।
शायद इसी कारण शिव को केवल एक देवता के रूप में समझना कठिन है।
यदि आप केवल पुराण पढ़ेंगे तो एक रूप मिलेगा।
यदि केवल वेद पढ़ेंगे तो दूसरा। यदि केवल दर्शन पढ़ेंगे तो तीसरा और यदि साधना करेंगे तो सम्भव है प्रश्न ही बदल जाए।
ऋग्वेद से यजुर्वेद तक, उपनिषदों से आगमों तक, महाभारत और पुराणों से कश्मीर शैव दर्शन, नाथ परम्परा और अद्वैत तक।
क्योंकि शिव को समझने के लिए केवल श्रद्धा पर्याप्त नहीं और केवल तर्क भी पर्याप्त नहीं।
दोनों का संगम आवश्यक है।
रुद्र - वैदिक देवता या स्वयं महादेव?

👁️: ऋग्वेद के रुद्र। 
यदि वेदों में "रुद्र" हैं, तो क्या वही आगे चलकर "महादेव" कहलाए?
ऋग्वेद में रुद्र का लगभग ७५ बार उल्लेख मिलता है। इतना ही नहीं, उनके लिए तीन पूर्ण सूक्त समर्पित हैं-ऋग्वेद १.११४, २.३३ और ७.४६। इसके अतिरिक्त दो सूक्तों में रुद्र और सोम की संयुक्त स्तुति भी है।
यह तथ्य ही बताता है कि रुद्र कोई गौण देवता नहीं थे। वे वैदिक चेतना के अत्यंत महत्त्वपूर्ण देवों में से एक थे।
👁️‼️"रुद्र" का अर्थ क्या है?
वेदांग निरुक्त के आचार्य यास्क बताते हैं कि वेदों के शब्दों को केवल शब्दकोश से नहीं, उनके प्रसंग और धातु से समझना चाहिए। "रुद्र" शब्द की अनेक व्युत्पत्तियाँ प्राचीन आचार्यों ने दी हैं। 
कोई इसे 'रुद्' (रुदन) धातु से जोड़ता है-जो रुला भी सकता है और दुःख का नाश भी कर सकता है। 
कोई इसे गर्जना, प्रचण्डता और दिव्य शक्ति का प्रतीक मानता है। 
यही कारण है कि "रुद्र" का अर्थ एक शब्द में बाँधना सम्भव नहीं। शायद इसी कारण ऋग्वेद का रुद्र सरल नहीं है। वह एक साथ कई आयामों में उपस्थित है।
वह धनुर्धर है, वह वैद्य भी है। वह उग्र है परन्तु वही कल्याणकारी भी है।
ऋषि उनसे भयभीत भी हैं और उन्हीं की शरण भी लेते हैं।
ऋग्वेद का एक प्रसिद्ध मंत्र देखिए-

मा नस्तोके तनये मा न आयुषि
मा नो गोषु मा नो अश्वेषु रीरिषः।
(ऋग्वेद १.११४)
ऋषि प्रार्थना करते हैं-
"हे रुद्र! हमारी संतानों, हमारे जीवन, हमारी गौओं और अश्वों को किसी प्रकार की हानि न पहुँचाएँ। हम पर कृपा करें।"
यदि रुद्र केवल संहारक होते तो उनसे आरोग्य और संरक्षण की याचना क्यों की जाती?
 यदि वे केवल करुणामूर्ति होते तो उनके बाणों से बचने की प्रार्थना क्यों होती?
यही रुद्र का रहस्य है।
ऋग्वेद उन्हें भेषज अर्थात् औषधियों का स्वामी भी कहता है। वही रोग हरने वाले हैं, वही जीवन के रक्षक हैं। दूसरी ओर वे धनुष-बाणधारी, प्रचण्ड और अजेय भी हैं। 
यही विरोधाभास नहीं, बल्कि संतुलन है।
आज हम शिव को "भोलेनाथ" कहकर स्मरण करते हैं, किन्तु वैदिक ऋषियों के सामने पहले "रुद्र" प्रकट हुए-
ऐसी शक्ति, जो अनुशासनहीन के लिए भय है और शरणागत के लिए अभय।
ऋग्वेद में रुद्र को कपर्दिन्-जटाधारी-भी कहा गया है। यह वही विशेषण है जिसे सुनते ही आज हमारे मन में शिव का स्वरूप उभर आता है। क्या यह केवल संयोग है, या किसी दीर्घ परम्परा का प्रारम्भिक संकेत?
रुद्र के विषय में एक और बात ध्यान देने योग्य है। वे केवल प्रकृति की विनाशकारी शक्ति नहीं हैं। वे उस शक्ति के भी प्रतीक हैं जो संतुलन बिगड़ने पर व्यवस्था को पुनः स्थापित करती है।
इसीलिए वैदिक ऋषि उनसे भयभीत नहीं थे वे उनके प्रति उत्तरदायी थे।
हम प्रायः "रौद्र" शब्द सुनते ही केवल क्रोध की कल्पना करते हैं, परन्तु भारतीय दर्शन में हर क्रोध रौद्र नहीं होता।
स्वार्थ से उत्पन्न क्रोध विनाश है किन्तु धर्म, संतुलन और सत्य की रक्षा के लिए जागृत हुई शक्ति वही रौद्र है।
शायद इसी कारण बाद के साहित्य में जब किसी दिव्य पुरुष के धर्मयुक्त तेज का वर्णन करना होता है, तो कवि को रुद्र की उपमा याद आती है। 
वाल्मीकि रामायण में भी युद्ध के प्रसंगों में श्रीराम के प्रचण्ड तेज की तुलना रुद्र से की गई है। यह रुद्र-तत्त्व की व्यापक प्रतिष्ठा का संकेत है, न कि केवल एक काव्यालंकार।
यदि ऋग्वेद का रुद्र इतना महान है तो फिर "शिव" नाम कब और कैसे प्रमुख हुआ?
क्या दोनों अलग हैं? या एक ही सत्य के दो नाम?। उसका उत्तर ऋग्वेद नहीं यजुर्वेद का श्रीरुद्रम देगा।
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 💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
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✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨

         *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
 
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 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय  बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️
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