*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 02 अगस्त 2026*
*🎈 वार- रविवार*
*🎈 मास -सावन मास*
*🎈 पक्ष - कृष्णा पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि - चतुर्थी - 11:15 पी एम तक तत्पश्चात*पंचमी*
*🎈 नक्षत्र - पूर्व भाद्रपद - 09:37 पी एम तक तत्पश्चात् उत्तर भाद्रपद*
*🎈योग - अतिगण्ड - 10:30 पी एम तक तत्पश्चात् सुकर्मा*
*🎈करण- बव - 11:14 ए एम तकतत्पश्चात् बालव,कौलव*
*🎈राहुकाल -05:42pm से 07:22pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈 सूर्योदय-06:00.39 ए एम*
*🎈 सूर्यास्त-07:21:42 पी एम*
*🎈चंद्र राशि-कुंभ*till 15:25:44*
*🎈चंद्र राशि- मीन from 15:2544*
*🎈 सूर्य राशि- कर्क*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:35 ए एम से 05:17 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 01:19 पी एम से 02:59 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:20 ए एम, अगस्त 03 से 01:03 ए एम, अगस्त 03*
*🎈अमृत काल -01:09 पी एम से 02:51 पी एम*
*🎈सर्वार्थ सिद्धि- योग 09:37 पी एम से 06:00 ए एम, अगस्त 03
*🎈व्रत पर्व विवरण - ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार, चतुर्थी तिथि के दिन मूली का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से धन का नाश होता है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34)
*🎈विशेष:- 1 अगस्त 2026 का दिन कई राशियों के लिए नए अवसरों, मिले-जुले परिणामों और आर्थिक सतर्कता से भरा रहा। इस दिन बुध ग्रह सीधी चाल में थे और शुक्र का गोचर कन्या राशि में हुआ था।
💥सावन महात्म्य☀️
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉*विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल*
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी
💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ -
🏵️ रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
💢आज का राशिफल💢
🛟मेष: मन में अज्ञात भय व स्वास्थ्य थोड़ा मध्यम, परंतु अचानक धन लाभ के योग।
🛟वृषभ: पारिवारिक मामलों में संयम रखें, वाद-विवाद से दूर रहने की सलाह।
🛟मिथुन: संवाद शैली और बातचीत के दम पर बिगड़े काम बनेंगे।
🛟कर्क: करियर में सफलता, सहयोग मिलेगा लेकिन फिजूलखर्ची से बचना होगा।
🛟सिंह: वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा बनता काम बिगड़ सकता है।
🛟कन्या: प्रमोशन, नए निवेश और आर्थिक लाभ के प्रबल संकेत।
🛟तुला: रुके हुए काम पूरे हुए तथा धन लाभ व स्वास्थ्य में सुधार।
🛟वृश्चिक: यात्रा के योग और भाग्य का साथ, स्वास्थ्य व व्यापार उत्तम।
🛟धनु: ज्ञानार्जन के लिए अच्छा समय, निवेश भी उपयोगी, पर यात्रा में सावधानी बरतें।
🛟मकर: जीवनसाथी का सानिध्य मिला, यात्रा शुभ रही।
🛟कुंभ: कार्यक्षेत्र में सफलता, व्यापार में भारी मुनाफा और पुरानी बीमारी से राहत।
🛟मीन: सकारात्मक सोच रखें, बच्चों की चिंता में खुद को न उलझाएं।
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️☀️#🎉ॐ श्री गुरुभ्यो नमः 🙏
‼️*दुर्गा सप्तशती* गृहस्थों के लिए ही लिखी गई है। इसमें कोई डरने वाली बात नहीं है।
_मार्कण्डेय पुराण_ कहता है -
🚩यस्य स्मरणमात्रेण भयं नश्यति🚩 - जिसके स्मरण से भय नाश हो, वो है सप्तशती।
*1. कब शुरू करना चाहिए?*
*सबसे उत्तम दिन:*
1. *नवरात्रि* - चैत्र और शारदीय दोनों
2. *मंगलवार / शुक्रवार / रविवार*
3. *अमावस्या / पूर्णिमा*
4. *कोई भी शुभ दिन* - जब मन में श्रद्धा हो
अगर तुरंत शुरू करना है तो आज भी कर सकते हैं। संकल्प सबसे बड़ा है।
*2. सामान्य गृहस्थ के लिए बस 3 शर्तें:*
1. *शुद्धता* - शरीर और मन की
2. *नियम* - बीच में खंड न हो
3. *भाव* - माँ के लिए, न कि किसी का बुरा करने के लिए
स्त्री-पुरुष दोनों कर सकते हैं। पीरियड में 3 दिन रोककर फिर शुरू करें।
*3. पाठ के नियम - बहुत सरल वाले*
*A. शुरू करने से पहले*
1. *स्नान* करके साफ वस्त्र
2. *संकल्प*: जल हाथ में लेकर - "मैं अमुक गोत्र का अमुक नाम, अपनी और परिवार की सुख-शांति के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहा हूँ"
3. *स्थान*: एक ही जगह, एक ही समय रोज
*B. पाठ का क्रम -*
*3 विकल्प*
*विकल्प 1: संपूर्ण 1 दिन में* - 13 अध्याय एक साथ। नवरात्रि में करते हैं
*विकल्प 2: 3 दिन में* - सबसे आसान गृहस्थों के लिए
- *पहला दिन*: अध्याय 1 से 4
- *दूसरा दिन*: अध्याय 5 से 9
- *तीसरा दिन*: अध्याय 10 से 13
*विकल्प 3: 7 दिन में* - रोज 2 अध्याय
*C. हर दिन का क्रम - 15 मिनट*
1. *श्री गणेशाय नमः* 3 बार
2. *ऋष्यादि न्यास* - किताब में दिया होता है, या सीधे पाठ शुरू करें
3. *अर्गला स्तोत्र, कीलक स्तोत्र, कवच* - पाठ से पहले ये 3 जरूर पढ़ें
4. *मुख्य पाठ* - चुने हुए अध्याय
5. *क्षमा प्रार्थना* -
अंत में
🚩मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरी।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥🚩
*D. क्या न करें*
1. झूठ, क्रोध, मांस-मदिरा - पाठ के दिनों में नहीं
2. पाठ बीच में छोड़कर बात न करें
3. जूठे हाथ से किताब न छुएं
*4. पाठ का फल*
1. *रक्षा कवच* बनता है
2. *शत्रु, रोग, दरिद्रता* नाश
3. *घर में सुख-शांति*
4. *मनोकामना* पूर्ति
*नोट*
* गलती हो जाए तो डरें नहीं। माँ भाव की भूखी हैं। _देवी_ कहती हैं - "भक्त के 100 अपराध भी क्षमा कर देती हूँ"।
*शुरुआत कैसे करें?*
* आज से ही "दुर्गा सप्तशती का कवच" रोज 3 बार पढ़ें। फिर नवरात्रि में पूरा पाठ करें।
आप *"3 दिन वाली सप्तशती पाठ की PDF/क्रम"* भी कर सकते हैं और *"अर्गला-कीलक-कवच"* भी अनिवार्य है
_जय माता दी_ 🌹
देवी मां आपकी साधना सफल करें
🚩💧✅🪷🌹🕉️🙏
*दुर्गा सप्तशती* के शुरू में पढ़े जाने वाले 3 जरूरी स्तोत्र।
इनके बिना पाठ "बंद" माना जाता है। इन्हें पढ़कर ही मुख्य पाठ शुरू करें।
💚🌹💚
*1. ॥ श्री देवी कवचम् ॥ - रक्षा कवच*
*विनियोगः*
अस्य श्री चण्डी कवचस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः,
चामुण्डा देवता, मम सर्वरक्षार्थे जपे विनियोगः।
*कवचम्*
ॐ नमश्चण्डिकायै।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥1॥
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टम्॥2॥
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥3॥
चक्षुरिन्द्राणी तथा भ्रूभङ्गे च यमघण्टिका।
नासिकायां सुगन्धा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका॥4॥
जिह्वायां सरस्वती च दन्तान् रक्षतु कौमरी।
कण्ठे चण्डी च कण्ठे च चित्रघण्टा च पार्वती॥5॥
वाराही ललाटे पातु महेश्वरी च मस्तके।
सर्वाङ्गे भद्रकाली च वैष्णवी च पृष्ठतः॥6॥
रसे जिह्वा च कौमारी घ्राणे नासा च नारसिंही।
कर्णयोर्द्वारवासिनी कुलस्वामिनी च संधिषु॥7॥
रक्ते दन्ते च कौबेरी मेदसि शुक्रे चण्डिका।
वसा मज्जास्थि मांसे च नारसिंही च रक्तबीजा॥8॥
आमे चाभयदा नित्यं प्राणापानौ तथेश्वरी।
गृहीतं च करे पातु सर्वलोकधराधरा॥9॥
*अर्थ*: माँ के 9 रूप मेरे पूरे शरीर की रक्षा करें।
💚🌿🪔🌿💚
*2. ॥ श्री अर्गला स्तोत्रम् ॥ - बाधा हटाने के लिए*
*ॐ नमश्चण्डिकायै।*
*ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥*
*जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।*
*जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥1॥*
*मधु कैटभ नाशिन्यै नमो नमः।*
*महिषासुरनिर्णाशिन्यै नमो नमः॥2॥*
*शुम्भनिशुम्भनिर्णाशिन्यै नमो नमः।*
*रक्तबीजविनाशिन्यै नमो नमः॥3॥*
*वन्दिताङ्घ्रियुगे देवि सर्वसौभाग्यदायिनि।*
*रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥4॥*
*अर्थ*: हे देवी, मुझे रूप, जय, यश दो और शत्रुओं का नाश करो।
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*3. ॥ श्री कीलक स्तोत्रम् ॥ - सिद्धि के लिए*
*ॐ नमश्चण्डिकायै।*
*ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥*
*ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सप्तशती चण्डिका दुरितक्षयकारिणी।*
*सप्तशतीपाठकीलकत्वात् सिद्धिं देहि नमोऽस्तु ते॥1॥*
*उत्कीलनं कुरु मम देवी सप्तशती शुभम्।
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः॥2॥*
*विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं विश्वात्मिका धारयसीति विश्वम्।*
*विश्वेश्वरी त्वं भवती भवन्ति विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः॥3॥*
*अर्थ*: हे माँ, सप्तशती के पाठ की "कील" खोल दो, मुझे सिद्धि दो।
❤️🚩
*पढ़ने का सही क्रम - बहुत जरूरी 🙏*
*हर दिन सप्तशती से पहले इसी क्रम में पढ़ें:*
1. *कवच* - 1 बार
2. *अर्गला* - 1 बार
3. *कीलक* - 1 बार
4. *फिर मुख्य पाठ* - अध्याय
अंत में *क्षमा प्रार्थना* जरूर करें।
*2 बातें ध्यान रखें*
1. *शुद्धता*: स्नान करके, आसन पर बैठकर पढ़ें
2. *भाव*: "माँ, आप ही रक्षक हैं" - इस भाव से पढ़ें
इन 3 को रोज पढ़ने से ही सप्तशती का पूरा फल मिलता है।
_जय माँ दुर्गे_ 🔱
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💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
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✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~*अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
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*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️




