*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक -20 फरवरी 2026*
*🎈 दिन- शनिवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈 मास - फाल्गुन मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ला पक्ष*
*🎈तिथि- तृतीया 14:37:56*। तक तत्पश्चात् चतुर्थी*
*🎈 नक्षत्र - उत्तरभाद्रपदा 20:06:34* तक तत्पश्चात् रेवती 👇
*🎈 योग - साध्य 18:22:18* तक तत्पश्चात् शुभ*
*🎈करण - गर 14:37:56* तक तत्पश्चात्
बालव*
*🎈राहुकाल -11:24 pm से 12: 49pm(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈चन्द्र राशि - मीन *
*🎈सूर्य राशि- कुम्भ *
*🎈 सूर्योदय-07:09:01am*
*🎈सूर्यास्त - 18:28:48* pm*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:27 ए एम से 06:17 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:26 पी एम से 01:12 पी एम
*🎈 अमृत काल-03:28 पी एम से 05:01 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:23 ए एम, फरवरी 21 से 01:14 ए एम, फरवरी 21
*🎈 सर्वार्थ सिद्धि योग- 08:07 पी एम से 07:07 ए एम, फरवरी 21*
*🎈 रवि योग- 08:07 पी एम से 07:07 ए एम, फरवरी 21*
*🎈 अमृत सिद्धि योग- 08:07 पी एम से 07:07 ए एम, फरवरी 21*
*🎈 व्रत एवं पर्व व्रत तृतीया*
*🎈विशेष फाल्गुन मास महात्म्य *
🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
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*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*
🛟
*🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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🌿✨ #*🕉️ #🌺व्याघ्रपाद ऋषि। हमारे पुराणों में वर्णित यह महान महर्षि भगवान शिव के अनन्य भक्त माने जाते हैं और विशेष रूप से चिदंबरम् के नटराज मंदिर से उनका गहरा संबंध बताया गया है। व्याघ्रपाद का अर्थ है “व्याघ्र के समान चरण वाले”। व्याघ्र अर्थात बाघ और पाद अर्थात चरण।
कथा के अनुसार महर्षि व्याघ्रपाद प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा के लिए वन में जाकर सबसे कोमल, सुगंधित और ताजे पुष्प चुनते थे। किंतु वे देखते कि मधुमक्खियाँ पहले ही पुष्पों का रस ले लेती हैं, जिससे उनका हृदय व्यथित हो उठता। उनकी भावना केवल एक थी – शिव को सर्वोत्तम अर्पित करना। उनकी इस निष्कलुष भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें व्याघ्र समान तीक्ष्ण नख और शक्तिशाली चरण प्रदान किए, जिससे वे सहज ही ऊँचे वृक्षों पर चढ़कर निष्कलंक पुष्प संकलित कर सकें।
उनकी तपस्या और समर्पण से प्रसन्न होकर स्वयं नटराज रूप में शिव ने उन्हें दर्शन दिए। व्याघ्रपाद इस सत्य के प्रतीक हैं कि जब भक्ति निष्काम और निर्मल होती है, तब स्वयं ईश्वर साधक को समर्थ बना देते हैं।
श्लोक
व्याघ्रपादमहर्षिं तं शिवभक्तिपरायणम्।
नटराजप्रसादेन सिद्धिं प्राप्तं नमाम्यहम्॥
मंत्र
ॐ नमः शिवाय।
ॐ नटराजाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो शिवः प्रचोदयात्॥
यह दिव्य कथा हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा में शक्ति है, और जब हृदय में शिव का वास हो, तो असंभव भी संभव हो जाता है।
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. 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध वि12:19 ए एम, जनवरी 19 से 01:12 ए एम, जनवरी 19शेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱




