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आज का पञ्चाङ्ग

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक  03 जून 2026*
*🎈 वार- बुधवार*
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर    पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि    -    तृतीया    21:20:39
*तत्पश्चात्* चतुर्थी*
*🎈 नक्षत्र -      पूर्वाषाढा    24:58:51* तत्पश्चात्  उत्तराषाढा*
*🎈योग    -     शुभ    08:11:14* तक तत्पश्चात्     शुक्ल*
*🎈करण    - वणिज    08:11:29* तक तत्पश्चात् विष्टि भद्र*
*🎈राहुकाल -12:33pm  से 02:16pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि    -   धनु    *
*🎈सूर्य राशि-       वृषभ    *
*🎈 सूर्योदय -   05:41:46*
*🎈 सूर्यास्त -        19:24:59* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:18 ए एम से 04:59 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:13 ए एम, जून 04 से 12:54 ए एम, जून 04*
*🎈 अमृत काल-    07:37 पी एम से 09:24 पी एम*
 *🎈 व्रत एवं पर्व विवरण. तृतीया तिथि पर मुख्य रूप से बैंगन (छोटा बैंगन या कटेहरी) और करेला खाने की मनाही होती है。 हिंदू धार्मिक मान्यताओं (विशेषकर तिथिनुसार आहार-विहार नियमों) के अनुसार, इस दिन इन सब्जियों का सेवन निषेध माना गया है
*🎈विशेष - ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, तृतीया तिथि को 'परवल' (Patola) का सेवन निषिद्ध माना गया है । धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, इस दिन परवल खाने से शत्रुओं में वृद्धि होती है या शत्रुता बढ़ती है।
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💢सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    
🛟मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
kundli


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        🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
         *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day




           🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

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  🙏 "🧘‍♂️ ​#***जय शिव शक्ति *** 🙏 
शरीर के भीतर एक “सूक्ष्म शरीर” भी है… और अधिकांश लोग पूरी जिंदगी उससे अनजान रहते हैं। 
उपनिषदों का ज्ञान केवल शरीर और मन तक सीमित नहीं है।
ऋषि कहते थे कि मनुष्य केवल यह दिखाई देने वाला शरीर नहीं है। उसके भीतर और भी परतें हैं — सूक्ष्म, अदृश्य और अत्यंत शक्तिशाली।
तैत्तिरीय उपनिषद में “पंचकोश” का वर्णन आता है।
ऋषि कहते हैं कि मनुष्य पाँच परतों से बना है:
• अन्नमय कोश — स्थूल शरीर
• प्राणमय कोश — प्राण की परत
• मनोमय कोश — मन की परत
• विज्ञानमय कोश — बुद्धि और चेतना की परत
• आनंदमय कोश — आनंद की सूक्ष्म अवस्था
शरीर तो सबसे बाहरी परत है।
उपनिषद कहते हैं कि जब साधक ध्यान में भीतर उतरता है, तब धीरे-धीरे वह इन सूक्ष्म स्तरों को अनुभव करना शुरू करता है। उसे महसूस होने लगता है कि उसके भीतर केवल विचार नहीं चल रहे… ऊर्जा भी चल रही है।
इसीलिए पुराने योगी “प्राण” को इतना महत्व देते थे।
वे जानते थे कि:
जहाँ प्राण जाएगा, वहीं मन जाएगा।
यदि प्राण नीचे की इच्छाओं में बिखरा रहेगा, तो चेतना भी भारी और अशांत रहेगी।
यदि प्राण ऊपर उठने लगे, तो मन स्वतः शांत होने लगता है।
आज लोग शरीर के लिए:
gym करते हैं, भोजन सुधारते हैं, बाहरी personality बनाते हैं लेकिन भीतर:
 मन बिखरा हुआ है, प्राण कमजोर है, चेतना भारी है, इच्छाएँ नियंत्रण में नहीं हैं। 
यही कारण है कि बाहर से strong दिखने वाला व्यक्ति भीतर से टूट जाता है।
सूक्ष्म शरीर स्थूल शरीर से अधिक शक्तिशाली है।
इसीलिए कई बार:
• किसी स्थान पर जाते ही भारीपन महसूस होता है। 
• कुछ लोगों के पास शांति महसूस होती है। 
• कुछ लोगों के पास बेचैनी बढ़ती है। 
• बिना शब्दों के भी ऊर्जा का अनुभव होता है। 
ऋषि कहते थे कि यह केवल psychology नहीं, ऊर्जा का विज्ञान है।
पुराने आश्रमों में इसलिए: शुद्ध भोजन, शुद्ध वाणी, मंत्र, अग्निहोत्र, मौन, ब्रह्मचर्य, ध्यान
इन सब पर जोर दिया जाता था।
क्योंकि ये केवल धार्मिक कर्म नहीं थे… ये सूक्ष्म शरीर को शुद्ध करने की प्रक्रियाएँ थीं।
आज का जीवन सूक्ष्म शरीर को लगातार disturb कर रहा है। अत्यधिक वासना, क्रोध
 भय, नकारात्मक संगति, अशांत मनोरंजन
 लगातार distraction ये सब प्राण को नीचे खींचते हैं।
इसीलिए आधुनिक मनुष्य को:
 बिना कारण थकान, anxiety, भारीपन,  concentration की कमी, भीतर खालीपन
इन सबका अनुभव बढ़ता जा रहा है।
उपनिषद कहते हैं कि साधना का वास्तविक उद्देश्य केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं… बल्कि चेतना को refine करना है।
यही कारण है कि ऋषि घंटों ध्यान में बैठते थे।
वे केवल विचार शांत नहीं कर रहे थे…
वे सूक्ष्म शरीर को जागृत कर रहे थे।
जब साधक भीतर गहराई में उतरता है, तब उसे महसूस होने लगता है कि उसके भीतर एक ऊर्जा-प्रवाह चल रहा है।
इसीलिए योग में: नाड़ी, चक्र, कुंडलिनी, प्राण
इन सबका वर्णन आता है। ये केवल प्रतीक नहीं हैं। ऋषियों के लिए ये अनुभव की गई वास्तविकताएँ थीं।
लेकिन उपनिषद चेतावनी भी देते हैं:
यदि मन शुद्ध न हो, तो शक्ति भी अहंकार बन सकती है।
इसीलिए पहले शुद्धि… फिर शक्ति।
यहीं से सूक्ष्म साधना शुरू होती है।
उपनिषद कहते हैं कि जिसने केवल शरीर को जाना, उसने जीवन का बाहरी भाग जाना।
लेकिन जिसने भीतर की चेतना और प्राण को जान लिया… उसने अस्तित्व का रहस्य छू लिया।
अंतिम सत्य:
मनुष्य केवल मांस और हड्डियों का शरीर नहीं है… वह चलती हुई चेतना और ऊर्जा का रहस्य है।
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹।      💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱🌿
vipul

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