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पञ्चाङ्ग - 21 मार्च 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक 21 मार्च 2026*
*🎈 वार- शनिवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈 मास - चैत्र मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष,*
*🎈तिथि-     तृतीया    23:55:55*
तिथि    चतुर्थी*
*🎈 नक्षत्र -    अश्विनी    24:36:52* तक    तत्पश्चात्     भरणी    👇
*🎈 योग    -         ब्रह्म    22:13:55* तक तत्पश्चातय वैधृति*


*🎈करण    -     तैतुल    13:14:18* तक तत्पश्चात् गर*
*🎈राहुकाल -09:40 am से  11:11am(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈 चन्द्र राशि-     मेष*
*🎈सूर्य राशि-       मीन*
*🎈 सूर्योदय -   06:39:19*
*🎈सूर्यास्त -        18:45:23*pm* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*

*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:03 ए एम से 05:51 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:18 पी एम से 01:07 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:18 ए एम, मार्च 22 से 01:06 ए एम, मार्च 22*
*🎈  अमृत काल    -05:58 पी एम से 07:27 पी एम*
*🎈 रवि योग    -रवि योग    12:37 ए एम, मार्च 22 से 06:37 ए एम, मार्च 22*
*🎈 व्रत एवं पर्व तृतीया गणगौर व्रत
       शनिवार*
*🎈विशेष चैत्र मास महात्म्य *
 🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💥सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
kundli


      🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 
  
    *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
   नागौर, राजस्थान, (भारत)    
   मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
day





    
        *🛟चोघडिया, रात्🛟*
night

*🛟 
 


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गणगौर माता की पूजा का विशेष दिन  सुहागिनें १६ दिवस पूजा कर मां से अटल सुहाग मांगती है। 
गणगौर के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और खास मुहूर्त में पूरी रीति-रिवाज से गणगौर की पूजा करती हैं। वैसे ये पर्व १६ दिन तक चलता है, लेकिन इसका सबसे महत्वपूर्ण दिन चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन होता है, जो इस बार 21 मार्च 2026 चैत्र शुक्ल पक्ष तृतीया को गणगौर का व्रत रखती हैं और खास मुहूर्त में पूरी रीति-रिवाज से गणगौर की पूजा करती हैं। 

सबसे महत्वपूर्ण दिन चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन होता है, जो इस बार 21 मार्च को पड़ रहा है।  इस दिन को बड़ी गणगौर भी कहते हैं। महिलाएं पूजा के लिए बालू और मिट्टी से शिव-पार्वती यानी ईसर-गौरा की मूर्ति बनाती हैं, उन्हें सजाती हैं और फिर गीत गाती हुई पूजा करती हैं। 

तृतीया तिथि प्रारम्भ – 20 मार्च को मध्य रात्रि 2:30 मिनट पर
तृतीया तिथि समाप्त – 21 मार्च को रात 11:56 मिनट पर
उदया तिथि को मानते हुए गणगौर का पर्व 21 मार्च 2026 को मनाया जाएगा और इसी दिन चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है।


पूजा का शुभ मुहूर्त |
ब्रह्म मुहूर्त- 05:03 ए एम से 05:51 ए एम तक*
अभिजित मुहूर्त- 12:18 पी एम से 01:07 पी एम*

गणगौर पूजा के लिए जरूरी सामान |
लकड़ी की चौकी
तांबे का कलश
गणगौर माता की प्रतिमा
दो मिट्टी के बर्तन
मिट्टी के दीये
काली मिट्टी या होली की राख
कुमकुम
चावल
पूजा थाली
फूल
घास
दो मिट्टी के गमले या कुंडे
हल्दी
मेहन्दी
गुलाल
अबीर
मिठाई
चावल
मूंग
माता की चुनरी
काजल
लाल या पीला कपड़ा
घी
आम के पत्ते
पानी से भरा बर्तन
पान के पत्ते
गणगौर के कपड़े
गेहूं
लकड़ी की टोकरी
नारियल
 गणगौर पर देवी पार्वती की भी विशेष पूजा करने का विधान है। तीज यानी तृतीया तिथि की स्वामी गौरी हैं। इसलिए देवी पार्वती की पूजा सौभाग्य सामग्री से करें। सौलह श्रृंगार चढ़ाएं। देवी पार्वती को कुमकुम, हल्दी और मेंहदी खासतौर से चढ़ानी चाहिए। इसके साथ ही अन्य सुगंधित सामग्री भी चढ़ाएं।

गणगौर पूजा में गुने क्या होते हैं?
गणगौर के दिन महिलाएं मैदा, बेसन या आटे में हल्दी मिलाकर माता पार्वती के लिए गहनों की तरह छोटी-छोटी चीजें बनाती हैं। इन्हें 'गुने' (फल)कहा जाता है। मान्यता है कि जितने गुने माता को अर्पित किए जाते हैं, परिवार में उतना ज्यादा धन और खुशहाली आती है। पूजा के बाद ये गुने(फल) महिलाएं अपनी सास, ननद, देवरानी या जेठानी को दे देती हैं।

 गणगौर का पर्व राजस्थान और भारत की भूमि के लिए बड़ा ही पवित्र और सुखद त्यौहार माना जाता है। इस पर्व को भारत में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। यह पर्व मां पार्वती को समर्पित है और इस पर्व में उन्हीं की पूजा की जाती है। खास तौर से राजस्थान में गणगौर  का बेहद ही महत्व है। 
 गणगौर का पर्व हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 21 मार्च 2026 को है। गणगौर (Gangaur 2026) की पूजा चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन की जाती है। इस दौरान सुहागन और कुंवारी कन्याएं माता पार्वती और शिवजी की पूजा करती हैं और पति की लंबी उम्र के लिए कामना करती हैं।

 माना जाता है कि ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच भगवान शिव और मां पार्वती जैसा ही सुखद दाम्पत्य संबंध बनता है।

 गणगौर पूजा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि से आरम्भ की जाती है। इसमें कन्याएं और शादीशुदा महिलाएं मिट्टी के शिवजी यानी गण और माता पार्वती यानी की गौर बनाकर पूजन करती हैं। गणगौर के समाप्ति पर त्योहार धूम धाम से मनाया जाता है और झांकियां भी निकलती हैं।

सोलह दिन तक महिलाएं सुबह जल्दी उठकर बगीचे में जाती हैं, दूब और फूल चुन कर लाती हैं। दूब लेकर घर आती है उस दूब से मिट्टी की बनी हुई गणगौर माता दूध के छीटें देती हैं। वे चैत्र शुक्ल द्वितीया के दिन किसी नदी, तालाब या सरोवर पर जाकर अपनी पूजी हुई गणगौरों को पानी पिलाती हैं। दूसरे दिन शाम को उनका विसर्जन कर देती हैं। जहां पूजा की जाती है उस जगह को गणगौर का पीहर और जहां विसर्जन होता है उस जगह को ससुराल माना जाता है।

गणगौर पूजा  की कई रस्में होती हैं जिनमें से एक है सिंजारा। इस दिन महिलाएं अपने हाथों में मेहंदी लगाती हैं साथ ही अपनी पूजी हुई गणगौरों को किसी नदी, तालाब या सरोवर में जाकर पानी भी पिलाती हैं। इसके बाद दूसरे दिन शाम में उनका विसर्जन किया जाता है। चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हुए गणगौर पर्व का समापन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को होता है।


सिंजारा तिथि (Sinjara Date)    20 मार्च 2026
गणगौर पूजा तिथि (Gangaur Puja)    21 मार्च 2026
अविवाहित कन्या करती हैं अच्छे वर की कामना
गणगौर एक ऐसा पर्व है जिसे, हर महिला करती है।
     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
                   नवरात्रि के 9 दिन…
                     माँ के 9 रूप…
और हर दिन के लिए एक दिव्य मंत्र। 🕉️🌺

नवरात्रि के तीसरे दिन पूजी जाने वाली माँ चंद्रघंटा का सीधा संबंध शुक्र ग्रह (Venus) से है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां चंद्रघंटा शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं। उनकी आराधना से कुंडली में शुक्र मजबूत होता है, जिससे जीवन में प्रेम, सौंदर्य, सुख-समृद्धि और धन-वैभव की प्राप्ति होती है।  नवरात्रि का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा को समर्पित है, जो देवी पार्वती का शांत व शक्तिशाली रूप हैं, जिनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है। उनकी पूजा से साहस, शक्ति, और निर्भयता प्राप्त होती है, साथ ही नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इस दिन जातक को पीले वस्त्र पहनकर, 'ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः' का जाप करना चाहिए। 
माँ चंद्रघंटा पूजा विधि और महत्व:
स्वरूप: माँ सिंह पर सवार हैं और उनके दस हाथों में अस्त्र-शस्त्र (त्रिशूल, तलवार, गदा) हैं।
पूजा मंत्र: ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः।
भोग: माता को दूध से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाया जाता है।
महत्व: यह दिन मानसिक शांति और आत्मविश्वास पाने के लिए विशेष है, जो जीवन में स्थिरता लाता है।
विशेष रंग: इस दिन ग्रे या भूरे रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। 

माँ चंद्रघंटा की पूजा से भय से मुक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 🙏✨
🌿✨  #*🕉️ #🌺#🎉💕💢💥💤💤
 🔱  नवरात्रि के 9 दिन का ३ रा दिन 🕉️🌺

💥एक बार समझ लिया तो कर्ज होगा जड़ से खत्म💥
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💥कर्ज का चक्रव्यूह: क्या आप अपनी ही कमाई के 'मुनीम' बनकर रह गए हैं
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​पहचानिए अपने जीवन से जुड़े वे संकेत जो कर्ज बनकर आपके जीवन में दस्तक देते हैं, और घर में स्थाई सदस्य बनकर पसर कर हमेशा के लिए आपके सर पर बोझ बनकर रह जाते हैं।
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👍​मेरे प्रिय साथियो
,
​जीवन में दो तरह के बोझ होते हैं—एक वो जो हम अपनी तरक्की के लिए उठाते हैं, और दूसरा वो जो हमें भीतर से दीमक की तरह चाट जाता है। आज बात उस 'अदृश्य दीमक' की, जिसे दुनिया कर्ज (Debt) कहती है।
​क्या आप जानते हैं कि कई लोग लाखों-करोड़ो कमाते हैं, पर उनके चेहरे पर वो तेज नहीं होता। क्यों? क्योंकि वे अपनी कमाई के 'मालिक' नहीं, बल्कि उन लेनदारों के 'मुनीम' बन चुके होते हैं जिन्हें महीने की पहली तारीख को ब्याज की भेंट चढ़ानी होती है। यह सारा खेल 'एनर्जी जॉइन' करने का है।

💥​यहाँ एक बात बहुत साफ़ समझ लीजिये—लाइफ में कर्ज कीजिये, खूब लीजिये... इन्वेस्टमेंट कीजिये, खूब कीजिये... जो चाहें वो कीजिये, पर एक बार अपने ग्रहों से भी पूछ लें कि उनकी सहमति है या नहीं। अगर उनकी सहमति नहीं है, तो याद रखिये आपके 'जहाज' का डूबना तय है।
​🛑 कुंडली और वास्तु के वो 'खतरनाक' संकेत (Symptoms):
​यदि आप नीचे दिए गए संकेतों को महसूस कर रहे हैं, तो समझ जाइये कि यह सिर्फ 'पैसों की कमी' नहीं, बल्कि ग्रहों और वास्तु का एक गहरा षड्यंत्र है:
​गलत समय का चुनाव: यदि आपने मंगलवार को कर्ज लिया है या राहुकाल में धन का लेन-देन किया है, तो वह कर्ज 'अमर' हो जाता है। वह खत्म होने का नाम ही नहीं लेगा।

🔗​बुध और 'झूठी साख' का जाल: क्या आप अपनी इज्जत बचाने के लिए एक कर्ज उतारने हेतु दूसरा कर्ज ले रहे हैं? यह आपके खराब बुध का लक्षण है। बुध जब बुद्धि भ्रष्ट करता है, तो इंसान अपनी 'गुडविल' के चक्कर में अपनी 'जिंदगी' दांव पर लगा देता है।

🔗​6वें भाव का क्रूर खेल: कुंडली का छठा भाव 'ऋण' का है। यदि यहाँ शनि, राहु या मंगल की कुदृष्टि है, तो आप एक कर्ज उतारने के लिए दूसरा कर्ज लेने पर मजबूर हो जाएंगे।

🛟​दशा का चक्र: मंगल की महादशा में लिया गया कर्ज अक्सर कानूनी पचड़ों में फंसा देता है, जबकि राहु की दशा का कर्ज इंसान को 'दिवालिया' (Bankrupt) होने की कगार पर ले आता है।

🔗​वास्तु का मौन विद्रोह: आपके घर की उत्तर (North) दिशा में लाल रंग/रसोई होना आपकी तरलता (Liquidity) रोकता है। वहीं वायव्य (North-West) या दक्षिण-पश्चिम (South-West) में भारी दोष होने पर पैसा पानी की तरह बहता है और कर्ज का पहाड़ खड़ा हो जाता है।
🔗​⚠️ सावधान! क्या आप भी ये गलतियां कर रहे हैं?
​घर के ईशान कोण (North-East) में भारी सामान रखना (यह आपकी मति भ्रमित करता है)।
💥​शनिवार के दिन कर्ज की किश्त चुकाना (शास्त्रों में वर्जित है, यह कर्ज को लंबा खींचता है)।
​अपनी कुंडली के 'मारक' ग्रह की दशा को बिना समझे बड़े निवेश करना।
​🔥 
​"दोस्तों, कर्ज से मुक्ति केवल एक 'टोटके' से नहीं मिलती। यह एक 'फाइनेंशियल और एस्ट्रोलॉजिकल सर्जरी' है। जब तक यह नहीं पता चलेगा कि आपकी ऊर्जा किस ग्रह ने 'ब्लॉक' की है, तब तक हर उपाय निष्फल रहेगा। रोने से या भागने से ये दीवारें नहीं गिरेंगी।
​अगर लाखों का कर्ज आपको तोड़ रहा है, तो अपनी किस्मत का ताला खोलने के लिए सही मार्गदर्शन लेने में संकोच करना सबसे बड़ी भूल है। अधूरा ज्ञान और मनमर्जी के उपाय (Self-Remedy) आपको और गहरे संकट में डाल सकते हैं।"

💥"यदि कर्ज का बोझ आपकी सहनशक्ति से बाहर हो रहा है, तो समय 'चमत्कार' के इंतजार का नहीं, बल्कि 'सही उपचार' का है। आपकी व्यक्तिगत कुंडली के सूक्ष्म विश्लेषण और वास्तु सुधार के माध्यम से ही इस चक्रव्यूह को तोड़ा जा सकता है
धन्यवाद।
.     💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥

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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱
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