*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 24 मार्च 2026*
*🎈 वार- मंगलवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈 मास - चैत्र मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष,*
*🎈तिथि- षष्ठी 16:07:19* तत्पश्चात्
तिथि सप्तमी*
*🎈 नक्षत्र - रोहिणी 19:03:59* तक तत्पश्चात् मृगशीर्षा 👇
*🎈 योग - प्रीति 09:06:28* तक तत्पश्चात् आयुष्मान*
*🎈करण - तैतुल 16:07:19* तक तत्पश्चात् बालव 18:37:50 फिर गर होगा।
*🎈राहुकाल -03:44 pm से 05:16apm(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈 चन्द्र राशि - वृषभ *till 30:16:20*
*🎈 चन्द्र राशि- मिथुन from 30:16:20*
*🎈सूर्य राशि- मीन*
*🎈 सूर्योदय - 06:35:59*
*🎈सूर्यास्त - 18:46:55*pm*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:01 ए एम से 05:48 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:17 पी एम से 01:06 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:17 ए एम, मार्च 25 से 01:04 ए एम, मार्च 25*
*🎈 अमृत काल -04:06 पी एम से 05:35 पी एम*
*🎈 रवि योग -06:35 ए एम से 07:05 पी एम*
*🎈 द्विपुष्कर योग 07:05 पी एम से 06:34 ए एम, मार्च 25*
*🎈 व्रत एवं पर्व कात्यायनी मां सष्टी व्रत
सोमवार*
*🎈विशेष चैत्र मास महात्म्य *
🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💥सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, रात्🛟*
*🛟
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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नवरात्रि के 9 दिन…
माँ के 9 रूप…
और हर दिन के लिए एक दिव्य मंत्र। 🕉️🌺
नवरात्रि का छठा दिन (२४ मार्च 2026) मां कात्यायनी माता की पूजा को समर्पित है। माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी को समर्पित है। पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसलिए उन्हें कात्यायनी कहा जाता है। मान्यता है कि इनकी पूजा से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।
छठे दिन के मुख्य विवरण:
देवी स्वरूप: माँ कात्यायनी चार भुजाधारी हैं, जो सिंह पर सवार हैं। इनके हाथों में तलवार और कमल का फूल है, तथा अन्य दो हाथ अभय और वर मुद्रा में हैं।
पूजा का महत्व: इन्हें साहस, शक्ति और विजय की देवी माना जाता है। इनकी साधना से आज्ञा चक्र जाग्रत होता है और भक्त का मन एकाग्र होता है।
रंग और भोग: इस दिन लाल या नारंगी रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। माता को शहद का भोग लगाना सबसे उत्तम है।
मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः। 🙏✨
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🔱 नवरात्रि के 9 दिन का पंचम दिन 🕉️🌺
💥माँ भगवती की जय
> अट्टहास कर गर्जीं काली, धरा रूप विकराल,
> क्षणभर में ही कर दिया, सैन्य सहित संहार।
> जब-जब संतन पर पड़ी, कष्टों की पदचाप,
> माँ बनकर तुम आ गईं, मिटाने सारे ताप।
> 🚩 जय माँ आदिशक्ति भगवती! 🙏🏼
>
> रूप कराल धार कर काली, रिपु-दल का संहार किया,
> भक्तों की रक्षा की खातिर, असुरों का संहार किया।
> संतन पर जब छाई विपदा, तुम ही बनीं सहारा माँ,
> शरणागत की रक्षा को, माँ तुमने सदा पुकारा माँ।
> 🌺 जय माँ आदिशक्ति जगदम्बे! 🚩
>
> "कालिका का विकराल रूप, अधर्म का सर्वनाश..."
> जब-जब संतों पर संकट आया, माँ तुम ढाल बनकर खड़ी हुईं। अपने प्रचंड रूप से दुष्टों का अंत किया और भक्तों का उद्धार किया।
> शक्ति की अधिष्ठात्री माँ भगवती के चरणों में कोटि-कोटि नमन। > जय माँ आदिशक्ति! 🚩🙏🏼
>
4. शुद्ध भक्ति रस (शास्त्रीय पुट के साथ)
> करालवदनां घोरां मुक्तकेशीं चतुर्भुजाम्।
> सैन्य संहारिणी, संत सुखकारिणी, माँ आदिशक्ति तुम्हारी सदा ही जय हो। जब-जब धर्म की हानि हुई, माँ तुमने अपनी शक्ति से संतों की रक्षा की।
> ॐ क्रीं कालिकायै नमः 🚩
: 🌳 लाल किताब की अनोखी और गूढ़ रेमेडीज का अभूतपूर्व मनोविज्ञान 🌳
(समझिए 5 बड़ी समस्याओं की रेमेडीज से )
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ज्योतिष और लाल किताब की चर्चा में आपने अक्सर सुना होगा कि अमुक वस्तु को किसी विशेष वृक्ष के नीचे रख आएं। सुनने में यह बात बहुत सामान्य लग सकती है, लेकिन इसके पीछे का ब्रह्मांडीय मनोविज्ञान अत्यंत गहरा है।
वृक्ष केवल लकड़ी और पत्तों का समूह नहीं हैं, वे आकाश मंडल की ऊर्जाओं को पृथ्वी के तत्वों से जोड़ने वाले 'एंटीना' हैं। जब हम किसी वृक्ष की जड़ों के पास विशिष्ट पका हुआ भोजन अर्पित करते हैं, तो हम वास्तव में एक 'एनर्जी एक्सचेंज' कर रहे होते हैं।
आइए, आज इस रहस्य को ५ अनुभूत उदाहरणों और उनके पीछे छिपे विज्ञान (Science) से समझते हैं:
🔱 ५ सिद्ध प्रयोग और उनके पीछे का 'लॉजिक':
1️⃣ कर्ज और शत्रु बाधा (शनि-राहु):
प्रयोग:
शनिवार शाम कीकर (बबूल) या पीपल के नीचे ७ मीठी तंदूरी रोटियां (गुड़ वाली) रखें।
विज्ञान: कीकर कांटों वाला वृक्ष है (शनि-मंगल मिश्रित ऊर्जा)। गुड़ मंगल की सकारात्मकता है। यह प्रयोग आपके जीवन के संघर्षों की 'कड़वाहट' को मंगल की 'मिठास' से न्यूट्रलाइज करने का एक "Psychological Healing" तरीका है।
2️⃣ मानसिक भ्रम और अज्ञात भय (राहु-केतु):
प्रयोग: घी में भुनी हुई शक्कर मिश्रित 'पंजीरी' चींटियों के बिल (बांबी) पर डालें।
विज्ञान: चींटियां राहु की श्रेणी में आती हैं और उनका बिल पाताल (Subconscious) का द्वार है। उन्हें भोजन देना राहु की नकारात्मक ऊर्जा को 'सकारात्मक कर्म' में बदलकर मानसिक जाल को काटने का विज्ञान है।
3️⃣ संतान सुख व जोड़ों का दर्द (केतु-मंगल):
प्रयोग: मंगलवार को बरगद (बड़) के नीचे ८ शुद्ध घी की जलेबियाँ रखें।
विज्ञान: बरगद की जड़ें 'केतु' का प्रतीक हैं और जलेबी की कुंडलीदार (Spiral) बनावट केतु की ऊर्जा दर्शाती है। मीठा मंगल है। मंगल के जरिए केतु को संतुलित करना वंश और शरीर की ऊर्जा को स्थिर करता है।
4️⃣ घर की बरकत और शांति (चंद्र-गुरु):
प्रयोग: गुरुवार सुबह पीपल के नीचे सूजी का हलवा और कच्ची लस्सी (दूध-पानी) रखें।
विज्ञान: पीपल २४ घंटे ऑक्सीजन (प्राण ऊर्जा) देता है। चंद्रमा (दूध) और गुरु (हलवा) का संगम 'गजकेसरी प्रभाव' पैदा करता है, जो आपके वातावरण के 'रिसेप्टर्स' को शुद्ध कर समृद्धि का मार्ग खोलता है।
5️⃣ दांपत्य सुख व आकर्षण (शुक्र-बुध):
प्रयोग: शुक्रवार को नीम या फलदार वृक्ष के नीचे मिट्टी के कुल्हड़ में दही-शक्कर रखें।
विज्ञान: नीम कड़वा (मंगल-बुध) है जो इन्फेक्शन सोखता है। दही-शक्कर (शुक्र) वहां छोड़ने का अर्थ है अपने रिश्तों की कड़वाहट को शुक्र की सौम्यता से 'न्यूट्रलाइज' (Neutralize) करना।
💡 आखिर ऐसा करने से होता क्या है?
जब पशु-पक्षी उस भोजन को ग्रहण करते हैं, तो हमारा कर्म ऋण' (Karmic Debt) कटता है। हमारा अवचेतन मन प्रतीकों (Symbols) के माध्यम से ब्रह्मांड को सिग्नल भेजता है, जिससे ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव कम होकर प्रकृति का आशीर्वाद मिलने लगता है।
⚠️ विनम्र निवेदन
उपरोक्त जानकारी केवल ज्योतिषीय शोध और ज्ञानवर्धन के लिए है। ज्योतिष एक व्यक्तिपरक और सूक्ष्म विज्ञान है। किसी भी उपाय को बिना सोचे-समझे आजमाना जोखिम भरा हो सकता है। अपनी व्यक्तिगत जन्म कुंडली के सूक्ष्म विमर्श (Consultation) के बिना कोई कदम न उठाएं। गलत प्रयोग से होने वाली किसी भी हानि के लिए आप स्वयं उत्तरदायी होंगे।
🛑 विशेष सूचना (मर्यादा हेतु)
"प्रिय मित्रों, ज्योतिष शास्त्र केवल २ या ४ ग्रहों की युति का मेल नहीं है, बल्कि यह दशा, गोचर और संपूर्ण चार्ट का गहरा गणित है। अधूरी जानकारी पर दी गई राय भ्रामक हो सकती है।
. 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱






