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पञ्चाङ्ग 28 मार्च 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

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*🎈दिनांक 28 मार्च 2026*
*🎈 वार-  शनिवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈 मास - चैत्र मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष,*
*🎈तिथि-     दशमी    08:45:09* तत्पश्चात्
तिथि    एकादशी*
*🎈 नक्षत्र -                पुष्य    14:49:15* तक    तत्पश्चात्     आश्लेषा 👇
*🎈 योग    -         सुकर्मा    20:04:59* तक तत्पश्चात् धृति*
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*🎈करण    -     गर    08:45:09* तक तत्पश्चात्  वणिज होगा।
*🎈राहुकाल -09:36 pm से  11:08pm(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈 चन्द्र राशि-       कर्क    *
*🎈सूर्य राशि-       मीन*
*🎈 सूर्योदय -   06:31:36*
*🎈सूर्यास्त -        18:48:59*pm* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:57 ए एम से 05:44 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:15 पी एम से 01:06 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:16 ए एम, मार्च 29 से 01:03 ए एम, मार्च 29*
*🎈  अमृत काल    -08:35 ए एम से 10:09 ए एम*
*🎈 रवि योग    -06:30 ए एम से 02:50 पी एम*
*🎈 व्रत एवं पर्व दशमी , (एकादशी व्रत
       रविवार को है।(*
*🎈विशेष चैत्र मास महात्म्य *
 🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💥सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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    *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
   नागौर, राजस्थान, (भारत)    
   मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
day




🛟चोघडिया, रात्🛟*
night

*🛟 
 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟रामनवमी विशेष🕉️🌺

👣🕉️ कौन सा जाप सबसे उत्तम फल देता है? – शास्त्र का सबसे बड़ा रहस्य 🕉

                     नमस्ते दोस्तों,

आज मैं एक ऐसे प्रश्न पर बात करने जा रहा हूँ जो हर साधक के मन में कभी न कभी आता है। कौन सा जाप सबसे उत्तम फल देता है? कोई कहता है सुबह ब्रह्म मुहूर्त में किया गया जाप। कोई कहता है स्नान करके, शुद्ध वस्त्र पहनकर किया गया जाप। कोई कहता है मंदिर में बैठकर किया गया जाप। लेकिन शास्त्र कुछ और ही कहते हैं। और वह बात इतनी गहरी है कि शायद ही किसी ने आपको बताई हो।

📜 शास्त्र क्या कहता है?

मानसेऽनन्तगुणितं नियमस्तत्र नैव तु।
गच्छन् शयान आसीनो मुक्तो वा यत्र कुत्रचित्।
अस्नातश्चापवित्रश्च न दोषस्तत्र विद्यते॥

इस श्लोक का अर्थ है – मानसिक जाप अनंत गुना अधिक फल देने वाला है। उसमें किसी नियम की बाधा नहीं है। चलते हुए, लेटे हुए, बैठे हुए, मुक्त अवस्था में, कहीं भी, बिना स्नान किए, अपवित्र अवस्था में भी – उसमें कोई दोष नहीं है।

यह शास्त्र का वह वचन है जो साधना के सारे नियमों को पार कर जाता है। यह कह रहा है कि सबसे उत्तम जाप वह है जो मन से किया जाए। बिना किसी नियम के। बिना किसी शर्त के। बिना किसी समय की बाधा के।

💫 मानसिक जाप ही सबसे उत्तम क्यों है?

जब आप वाचिक जाप करते हैं – मुंह से बोलते हैं – तो उसमें आपका ध्यान शब्दों के उच्चारण पर, माला पर, समय पर, आसन पर, दिशा पर, शुद्धता पर लगा रहता है। ये सब बाहरी चीजें हैं। जाप तो हो रहा है, लेकिन मन कहीं और भटक सकता है।

लेकिन जब आप मानसिक जाप करते हैं – मन ही मन – तो उसमें कोई बाधा नहीं होती। न समय की, न स्थान की, न शुद्धता की। आप बस चलते हुए, लेटे हुए, बैठे हुए, यहाँ तक कि सोते हुए भी मानसिक जाप कर सकते हैं। और सबसे बड़ी बात – मानसिक जाप में आपका मन उस नाम के साथ एकाकार हो जाता है। कोई बीच में नहीं आता। कोई बाधा नहीं आती।

🌊 जाप के तीन स्तर

शास्त्रों में जाप के तीन स्तर बताए गए हैं –

वाचिक जाप – मुंह से ऊंचे स्वर में जाप। यह सबसे प्रारंभिक स्तर है। इसमें मन का ध्यान बाहर होता है। फल भी मिलता है, लेकिन उतना नहीं जितना मानसिक जाप से मिलता है।

उपांशु जाप – धीरे से, केवल होठों से, इतना कि पास बैठा व्यक्ति भी न सुन सके। यह वाचिक से अधिक शक्तिशाली है, क्योंकि इसमें मन थोड़ा अधिक एकाग्र होता है।

मानसिक जाप – बिना होंट हिलाए, बिना आवाज किए, केवल मन में। यह सबसे उत्तम है। इसमें न कोई बाहरी नियम चाहिए, न कोई शर्त। यह जाप सीधे आत्मा से जुड़ता है। और यही वह जाप है जिसके बारे में श्लोक कह रहा है – "मानसे अनंतगुणितं" – मानसिक जाप अनंत गुना फल देने वाला है।

🌿 यहाँ नियम क्यों नहीं है?
शास्त्र कहता है – नियमस्तत्र नैव तु – उसमें कोई नियम नहीं है। क्योंकि मानसिक जाप का कोई बाहरी रूप नहीं है। यह पूरी तरह आंतरिक है।

आप बिना स्नान किए भी मानसिक जाप कर सकते हैं। आप चलते-फिरते भी कर सकते हैं। आप लेटे हुए भी कर सकते हैं। आप कहीं भी हो – घर में, ऑफिस में, बस में, ट्रेन में – मानसिक जाप आप कर सकते हैं। और उसमें कोई दोष नहीं है।

यह बहुत गहरी बात है। इसका मतलब यह नहीं है कि बाहरी नियमों का कोई महत्व नहीं है। उनका भी महत्व है। लेकिन जब आप मानसिक जाप के स्तर पर पहुँच जाते हैं, तो वे सब नियम अपने आप गौण हो जाते हैं। क्योंकि मानसिक जाप में आपका पूरा अस्तित्व उस नाम में डूब जाता है।

💡 तो क्या करें?

यह मत समझिए कि अब स्नान, शुद्धता, समय, आसन – इन सबकी कोई आवश्यकता नहीं। इनका अपना महत्व है। ये शरीर और मन को साधना के लिए तैयार करते हैं। ये बाहरी साधन हैं। और जब तक मन बाहरी साधनों पर निर्भर है, तब तक ये जरूरी हैं।

लेकिन धीरे-धीरे अपने जाप को वाचिक से उपांशु, और उपांशु से मानसिक की ओर ले जाएँ। जब आप मानसिक जाप के स्तर पर पहुँच जाते हैं, तब आप समझ जाएँगे कि शास्त्र क्यों कहता है – मानसे अनंतगुणितं।

🔥 सबसे बड़ी बात

मानसिक जाप का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह कभी बाधित नहीं होता। वाचिक जाप के लिए आपको समय, स्थान, शुद्धता, माला, आसन – सब चाहिए। मानसिक जाप के लिए कुछ नहीं चाहिए। बस आपका मन चाहिए। और जब मन ही मन नाम चलने लगता है, तो वह सोते भी चलता है, जागते भी चलता है। तब वह जाप नहीं रह जाता, वह आपकी सांस बन जाता है।
🙏 जाप का सच्चा अर्थ है – मन का उस नाम में डूब जाना। बस इतना ही।




.     💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥

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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
vipul


*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
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