*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 29 मार्च 2026*
*🎈 वार- रविवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈 मास - चैत्र मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष,*
*🎈तिथि- एकादशी 07:45:52* तत्पश्चात्
द्वादशी*
*🎈 नक्षत्र - आश्लेषा 14:36:59* तक तत्पश्चात् मघा 👇
*🎈 योग - धृति 18:18:33* तक तत्पश्चात् शूल*
*🎈करण - विष्टि भद्र 07:45:51* तक तत्पश्चात् बव होगा।
*🎈राहुकाल -05:17 pm से 06:50 pm(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈 चन्द्र राशि- कर्क *till 14:36:59
*🎈चन्द्र राशि- सिंह from 14:36:59
*🎈सूर्य राशि- मीन*
*🎈 सूर्योदय - 06:31:36*
*🎈सूर्यास्त - 18:48:59*pm*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:56 ए एम से 05:43 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:15 पी एम से 01:05 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:16 ए एम, मार्च 30 से 01:03 ए एम, मार्च 30*
*🎈 रवि योग -01:02 पी एम से 02:38 पी एम*
*🎈 व्रत एवं पर्व एकादशी व्रत*
*🎈विशेष चैत्र मास महात्म्य *
🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💥सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
🛟चोघडिया, रात्🛟*
*🛟
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
👣🕉️ 🌹यज्ञोपवीत🌹
उपनयन संस्कार अर्थात ब्रह्मविद्या के अभ्यास का आरम्भ जो नौ वर्ष में हिन्दू बालकों को आध्यात्मिक गुरु द्वारा शक्तिपात कर ब्रह्मचारी बना कर विद्याध्ययन के साथ साथ भ्रू मध्य में स्थित तृतीय नेत्र या दिव्य चक्षु को जागृत कर दी जाने वाली आचार संहिता थी जिसका वह उम्र भर पालन करता था और ब्रह्मतेज में लीन रह कर सांसारिक कर्म करता रहता था। वस्तुतः यज्ञोपवीत एक संकल्प का प्रतीक है जो किसी आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत ऋषि स्वरूप गुरु द्वारा आध्यात्मिक विकास हेतु यम नियमो के पालन की संहिता को दर्शाता है।
हेमाद्रि में संकल्प द्वारा ऋषियों के मार्गदर्शन में सम्पूर्ण स्नान कर तमाम मलिनताओं का त्याग,भूलो का हवन कर किया जाता है ताकि साधना पथ पर अग्रसर हो कर जीवन के चरम लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। तीन चरणों मे होने वाली यह शुद्धिकरण प्रक्रिया आत्मबोध की और अग्रसर करती है। इसमें वैदिक मंत्रों के साथ सामूहिक रूप से दशविध स्नान हवन तर्पण इत्यादि कर जनेऊ बदला जाता है। ब्राह्मणों के लिए ऋषि पंचमी पर यह अनिवार्य वैदिक विधान है।
आध्यात्मिक स्तर पर दशविध स्नान का अलग अर्थ है। हमारे प्राण के दस रूप होते है। पाँच प्राण और पाँच उपप्राण। ये हमारी चेतना के दस हिस्से हैं। पाँच तत्वों के भी दो हिस्से हैं-पंच तन्मात्राएँ और पंचतत्व। पंचतन्मात्रायें-शब्द रस, रूप, गंध और स्पर्श हैं, और अग्नि, जल, वायु, आकाश और पृथ्वी ये पाँच तत्व हैं। अपनी देह की शुद्धि के साथ उनकी शुचिता भी जरूरी है जिससे ये निर्मित है, और मन की पवित्रता इससे ही सम्भव है जो कि प्राणों से बना हुआ है।
दस स्नान का यही उद्देश्य है कि प्रतीक रूप में ये इन प्राणो के परिष्करण की प्रक्रिया द्वारा सदप्रेरणा बन इच्छाधारा को प्रेत कर मनुज मन को ब्रह्मतेज की और ऊपर उठ सके। ऋषि तर्पण से तातपर्य है कि हमारे वह आत्मलीन पुरोधा जो चेतना के स्तर पर जागृत थे उनके साक्षित्व में यह शुद्धिकरण एव संकल्प का दोहरान हो क्योंकि ये ऋषि वो व्यक्ति जो प्रभावशाली दृति मेधा के रूप में आपकी चेतना का मार्गदर्शन कर सकते है। हमे अनुशासन में रखने में वही समर्थ है अतः ऋषि पंचमी पर उन्ही के मार्गदर्शन में यह प्रक्रिया की जाती है।
आप ऋषि का अनुशासन पाये बिना साधना पथ पर आगे नहीं बढ़ सकते, कुसंस्कारों से छुटकारा नहीं पा सकते। ऋषि का पूजन हम इसीलिए करते है कि जीवन में अनुशासन आये। ऋषि हमारे जीवन की महती आवश्यकता हैं। इसलिए ऋषि पंचमी को सप्त ऋषियों का साक्षित्व व मार्गदर्शन में हेमाद्रि किया जाता है। मनुर्भव की वैदिक संस्क्रति की ऋषि परम्परा का महत्वपूर्ण अवशेष धरोहर परम्परा का महती हिस्सा है हेमाद्रि।
हेम से अर्थात स्वर्ण आच्छादित आत्मा को ,जो इन्द्रियगत तन्मात्राओं से ढकी हुई है के शुद्धिकरण की सम्पूर्ण प्रक्रिया ही ऋषियो की सनातन प्रक्रिया है जिसे ‘हेमाद्रि’ कहा गया है।
अस्तु, हमे भारतीयों की हर परम्परा में आत्मबोध वआत्मनिर्माण की प्रक्रिया से समाज निर्माण का क्रम देखने को मिलता है क्योंकि स्वस्थ और पूर्ण व्यक्तिव से ही स्वस्थ समाज का निर्माण सम्भव है। हेमाद्रि भी उसी परिष्करण का सामुहिक संकल्प विधान है। ऋषियो की दूरदर्शी नज़र व समपूर्ण समाज निर्माण का हेतु हेमाद्रि आत्मपरिष्करण का विधान है क्योंकि स्व से ऊपर उठ कर ही हम वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से जुड़ सकते है।
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. 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱





